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पीएमओ ने ओएनजीसी से ओवीएल को लेकर भविष्य की रणनीति पर मांगा श्वेतपत्र

Sun, 09 Dec 2018 07:33 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sun, 09 Dec 2018 07:33 PM IST
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PMO asks White paper on ONGC future strategy for OVL
ओएनजीसी - फोटो : LOGO
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल उत्खनन कंपनी ओएनजीसी के कुछ क्षेत्रों की बिक्री के मामले पर विचार के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने उसकी विदेश में काम करने वाली इकाई ओएनजीसी विदेशी लिमिटेड (ओवीएल) की स्थिति और भविष्य की रणनीति पर श्वेतपत्र मांगा है। सरकार कई मौकों पर ओएनजीसी से ज्यादा सफल साबित हुई ओवीएल को अलग कर उसे घरेलू या अंतरराष्ट्रीय बाजार में सूचीबद्ध करने पर विचार कर चुकी है।
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सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 12 अक्तूबर को बुलाई गई बैठक में तेल व गैस क्षेत्र की समीक्षा की गई। पेट्रोलियम मंत्रालय से ओवीएल की स्थापना का कारण, लागत और आज तक के रिटर्न समेत विभिन्न मुद्दों पर श्वेतपत्र तैयार करने को कहा गया है। इसके अलावा श्वेतपत्र में ओवीएल की भविष्य की रणनीति के बारे में भी बताने को कहा गया है।
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ओएनजीसी की ओवीएल में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ओवीएल 20 देशों में 41 परियोजनाओं में अब तक डेढ़ लाख करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है। पीएम की बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के नेतृत्व में छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जो ओएनजीसी के मौजूदा 66 तेल क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने के तरीकों का पता लगाएगी। कंपनी के घरेलू उत्पादन में इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी 95 प्रतिशत है। 
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149 छोटे तेल व गैस क्षेत्र बेचने पर विचार करेगी समिति

समिति देश के पांच फीसदी कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले 149 छोटे तेल व गैस क्षेत्रों को निजी और विदेशी कंपनियों को बेचने पर भी विचार करेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने ओएनजीसी के तेल क्षेत्रों को निजी और विदेशी कंपनियों को देने का यह दूसरा प्रयास किया है। अक्तूबर, 2017 में हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) ने राष्ट्रीय पेट्रोलियम कंपनियों के 15 ऐसे क्षेत्रों की पहचान की थी, जिन्हें निजी कंपनियों को दिया जा सकता है। तब ओएनजीसी के कड़े विरोध के कारण योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका था।
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