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West Bengal: पीएमएलए कोर्ट ने पार्थ चटर्जी की जमानत अर्जी खारिज की, बताई यह बड़ी वजह
Tue, 14 Feb 2023 09:05 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Tue, 14 Feb 2023 09:05 PM IST
सार
पार्थ चटर्जी के वकील ने यह कहते हुए उनकी जमानत के लिए अर्जी लगाई थी कि वह लंबे समय से हिरासत में हैं। मामले में तलाशी और जब्ती पूरी हो गई है। सभी साक्ष्य ईडी की निगरानी में हैं और कई तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर आधारित हैं। ऐसे में जमानत पर रिहा होने की स्थिति में उसके साथ छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है।
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पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
कोलकाता की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री की पार्थ चटर्जी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने पार्थ चटर्जी को बहुत प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए यह फैसला सुनाया। उन्हें ईडी ने राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों में धांधली के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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पार्थ चटर्जी को उनकी कथित करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के आवास से भारी मात्रा में नकदी, आभूषण और अन्य दस्तावेजों की बरामदगी के बाद 23 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। वे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामले में पिछले साल 23 जुलाई से हिरासत में हैं।
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पार्थ चटर्जी के वकील ने यह कहते हुए उनकी जमानत के लिए अर्जी लगाई थी कि वह लंबे समय से हिरासत में हैं। मामले में तलाशी और जब्ती पूरी हो गई है। सभी साक्ष्य ईडी की निगरानी में हैं और कई तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर आधारित हैं। ऐसे में जमानत पर रिहा होने की स्थिति में उसके साथ छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है।
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ईडी के वकील फिरोज एडुल्जी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर और पार्थ चटर्जी दोनों का जन्म बंगाल में हुआ था, लेकिन उनके बीच अंतर यह है कि जहां ईश्वर चंद्र विद्यासागर को राज्य में आधुनिक शिक्षा प्रणाली के विकास और उन्नति के लिए जाना जाता है और पार्थ चटर्जी को पश्चिम बंगाल की शिक्षा प्रणाली को नष्ट करने में उनकी कथित भूमिका के लिए जाना जाता है।