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राम लीला मैदान में ताल ठोकेंगे राहुल तो केदार नाथ में सिर झुकाएंगे पीएम मोदी
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Updated Thu, 26 Apr 2018 12:32 AM IST
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राहुल गांधी, पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ दर्शन पूजन करके जहां हिन्दुत्व के मुद्दे पर सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट करने का निर्णय लिया है, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नई दिल्ली के ऐतिहासिक राम लीला मैदान में जन आक्रोश रैली को संबोधित करेंगे। यह दोनों ही कार्यक्रम रविवार 29 अप्रैल को होने हैं। 29 अप्रैल को केदार नाथ के कपाट खुलेंगे।
ऐसे में केदारनाथ धाम का भाजपा शासित 19 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ दर्शन पूजन आस्था से जुड़ा मसला है। वहीं राहुल गांधी केन्द्र सरकार द्वारा जनता के बीच में अपना इस्तकबाल खो चुकने को लेकर आवाज बुलंद करेंगे। राजनीतिक गलियारे में इन दोनों ही कार्यक्रमों को कर्नाटक विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री 27-28 अप्रैल को चीन के वुहान शहर में होंगे। वहां वह संघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं। वहां से लौटने के बाद प्रधानमंत्री 29 अप्रैल केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर वहां दर्शन पूजन के लिए जाएंगे। वहां जाने से पहले प्रधानमंत्री ने बुधवार 25 अप्रैल को अपने कार्यालय से केदार नाथ धाम के पुननिर्माण कार्यों का जायजा लिया।
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प्रधानमंत्री के साथ 18 राज्यों के मुख्यमंत्री भी 29 अप्रैल को उत्तराखंड में होंगे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत इसके बाबत काफी उत्साहित हैं और सूत्र बताते हैं कि तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। केदारनाथ धाम का दर्शन करने के बाद प्रधानमंत्री कर्नाटक के चुनाव प्रचार अभियान को धार देंगे। वह एक दिन के अंतराल पर 12 मई को होने वाले मतदान से ठीक पहले तक कर्नाटक में हर रोज करीब दो जनसभाओं को संबोधित करेंगे।
कांग्रेस को दिखाएंगे आईना
कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जनता के बीच में बढ़ रही लोकप्रियता से घबराए हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी हर रोज मंदिर में दर्शन करते थे और इसके बाद राज्य में चुनाव प्रचार के लिए निकलते थे। राहुल ने यह सिलसिला कर्नाटक में जारी रखा और मंदिरों मठों में लगातार पूजा अर्चना करने जा रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी के नेताओं के अनुसार गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे ने भाजपा के माथे पर बल ला दिया है। इसलिए कर्नाट में चुनाव मतदान की तारीख नजदीक देखकर प्रधानमंत्री 19 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ केदारनाथ जा रहे हैं। ताकि भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण के लक्ष्य को साथ सके।
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ऐसे में केदारनाथ धाम का भाजपा शासित 19 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ दर्शन पूजन आस्था से जुड़ा मसला है। वहीं राहुल गांधी केन्द्र सरकार द्वारा जनता के बीच में अपना इस्तकबाल खो चुकने को लेकर आवाज बुलंद करेंगे। राजनीतिक गलियारे में इन दोनों ही कार्यक्रमों को कर्नाटक विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
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प्रधानमंत्री 27-28 अप्रैल को चीन के वुहान शहर में होंगे। वहां वह संघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं। वहां से लौटने के बाद प्रधानमंत्री 29 अप्रैल केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर वहां दर्शन पूजन के लिए जाएंगे। वहां जाने से पहले प्रधानमंत्री ने बुधवार 25 अप्रैल को अपने कार्यालय से केदार नाथ धाम के पुननिर्माण कार्यों का जायजा लिया।
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प्रधानमंत्री के साथ 18 राज्यों के मुख्यमंत्री भी 29 अप्रैल को उत्तराखंड में होंगे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत इसके बाबत काफी उत्साहित हैं और सूत्र बताते हैं कि तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। केदारनाथ धाम का दर्शन करने के बाद प्रधानमंत्री कर्नाटक के चुनाव प्रचार अभियान को धार देंगे। वह एक दिन के अंतराल पर 12 मई को होने वाले मतदान से ठीक पहले तक कर्नाटक में हर रोज करीब दो जनसभाओं को संबोधित करेंगे।
कांग्रेस को दिखाएंगे आईना
कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जनता के बीच में बढ़ रही लोकप्रियता से घबराए हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी हर रोज मंदिर में दर्शन करते थे और इसके बाद राज्य में चुनाव प्रचार के लिए निकलते थे। राहुल ने यह सिलसिला कर्नाटक में जारी रखा और मंदिरों मठों में लगातार पूजा अर्चना करने जा रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी के नेताओं के अनुसार गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे ने भाजपा के माथे पर बल ला दिया है। इसलिए कर्नाट में चुनाव मतदान की तारीख नजदीक देखकर प्रधानमंत्री 19 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ केदारनाथ जा रहे हैं। ताकि भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण के लक्ष्य को साथ सके।
राहुल ने भी कसी कमर
rahul gandhi shimla
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी छह बार कर्नाटक का दौरा कर चुके हैं। वह एक बार राज्य के सभी 30 जिलों का लक्ष्य करके चुनाव प्रचार कर चुके हैं। प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कल वह पहली बार कर्नाटक में होंगे। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में दलित उत्पीडन को केन्द्र में रखकर संविधान बचाओं कार्यक्रम में केन्द्र सरकार को घेर चुके हैं।
इसके बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष 29 अप्रैल को जन आक्रोश रैली को संबोधित करने जा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष की इस जनसभा को लेकर पार्टी के नेता काफी उत्साहित हैं। उन्हें उम्मीद है कि रामलीला मैदान में उमड़ने वाली भीड़ पूरे देश में केन्द्र सरकार के खिलाफ बड़ा संदेश देगी। इसके लिए आस-पास के राज्यों के नेता सक्रिय हो गए हैं।
कांग्रेस के लिए इम्तहान की घड़ी
कांग्रेस पार्टी के लिए इम्तहान की घड़ी शुरू हो गई है। पार्टी के तमाम बड़े नेता कर्नाटक के लगातार दौरे पर हैं। कर्नाटक में पांच साल शासन करने के बाद भी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार के खिलाफ सरकार विरोधी लहर की क्षीण स्थिति देखकर पार्टी के रणनीतिकार खुश हैं, लेकिन इसके बावजूद अनजाना सा भय उन्हें घेरे है। वह भय अपने ही नेताओं से जुड़ा है। पार्टी के एक महासचिव बुधवार 25 अप्रैल को भी पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दिए गए वक्तव्य पर उन्हें कोस रहे थे।
बताते हैं आगे से इस तरह की कोई चूक न होने के लिए राहुल गांधी ने अपने नेताओं को ताकीद किया है। इससे पहले दलित उत्पीडन के क्रम में राजघाट पर एक दिन के उपवास के दौरान भी कांग्रेस नेताओं छोला-भटूरा खाकर पार्टी की किरकिरी कराई थी। गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान मणिशंकर अय्यर के बयानों ने पार्टी को काफी छकाया था। इन सभी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष काफी सख्त मूड में बताए जा रहे हैं।
इसके बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष 29 अप्रैल को जन आक्रोश रैली को संबोधित करने जा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष की इस जनसभा को लेकर पार्टी के नेता काफी उत्साहित हैं। उन्हें उम्मीद है कि रामलीला मैदान में उमड़ने वाली भीड़ पूरे देश में केन्द्र सरकार के खिलाफ बड़ा संदेश देगी। इसके लिए आस-पास के राज्यों के नेता सक्रिय हो गए हैं।
कांग्रेस के लिए इम्तहान की घड़ी
कांग्रेस पार्टी के लिए इम्तहान की घड़ी शुरू हो गई है। पार्टी के तमाम बड़े नेता कर्नाटक के लगातार दौरे पर हैं। कर्नाटक में पांच साल शासन करने के बाद भी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार के खिलाफ सरकार विरोधी लहर की क्षीण स्थिति देखकर पार्टी के रणनीतिकार खुश हैं, लेकिन इसके बावजूद अनजाना सा भय उन्हें घेरे है। वह भय अपने ही नेताओं से जुड़ा है। पार्टी के एक महासचिव बुधवार 25 अप्रैल को भी पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दिए गए वक्तव्य पर उन्हें कोस रहे थे।
बताते हैं आगे से इस तरह की कोई चूक न होने के लिए राहुल गांधी ने अपने नेताओं को ताकीद किया है। इससे पहले दलित उत्पीडन के क्रम में राजघाट पर एक दिन के उपवास के दौरान भी कांग्रेस नेताओं छोला-भटूरा खाकर पार्टी की किरकिरी कराई थी। गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान मणिशंकर अय्यर के बयानों ने पार्टी को काफी छकाया था। इन सभी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष काफी सख्त मूड में बताए जा रहे हैं।