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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिग में सुधार पर वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष ने की पीएम मोदी से बात, दी बधाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 02 Nov 2018 09:44 PM IST
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PM Modi, Jim Yong Kim
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विश्व बैंक द्वारा बुधवार को जारी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत की रैंकिंग में पिछले दो साल में 50 से ज्यादा स्थानों का सुधार हुआ है। इसके बाद अब विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आज टेलीफोन पर बात की है। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी को बधाई भी दी है। उन्होंने कहा कि 1.25 अरब से अधिक लोगों के देश ने 4 वर्षों की छोटी अवधि में 65 रैंकों की वृद्धि हासिल की है।
वहीं वर्ल्ड बैंक के अधिकारियों ने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के समय भारत की रैंकिंग 142 थी। पीएम ने आने वाले वर्षों में भारत को शीर्ष 50 देशों की खास सूची में शामिल करने का लक्ष्य रखा है।
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वर्ल्ड बैंक के डेवलपमेंट इकनॉमिक्स के वरिष्ठ निदेशक और मुख्य कार्यवाहक अर्थशास्त्री शांता देवराजन ने कहा कि इस रैंकिंग में भारत को शीर्ष 50 में लाना सरकार के लिए कड़ी चुनौती है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक और अन्य सुधारों के कारण आने वाले वर्षों में भारत अपनी रैंकिंग में सुधार कर सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत वर्ल्ड बैंक के बेहतर प्रदर्शन करने वालों की सूची में भी शीर्ष 10 में शामिल है। वह इस सूची में दो साल से शीर्ष 10 में जगह बनाने में कामयाब रहा है, जो दुर्लभ संयोग है। शांता ने सुधार उपक्रमों के हित में व्यक्तिगत रूप से रुचि लेने और ईज ऑफ डूइंड बिजनेस की राह आसान करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की।
वहीं, वर्ल्ड बैंक के ग्लोबल इंडिकेटर्स ग्रुप की सीनियर मैनेजर रीता रामाल्हो ने कहा कि इस रैंकिंग में दो साल में 131 से 77वें स्थान पर पहुंचना भारत के लिए शानदार सुधार है। उन्होंने कहा कि भारत को शीर्ष 50 में लाना कठिन चुनौती है।
उल्लेखनीय है कि विश्व बैंक हर साल आसान कारोबार वाले देशों की सूची जारी करता है। इसमें कुल 190 देश होते हैं। इस रैंकिंग में देशों को कई पैमाने पर आंका जाता है। भारत ने वर्ष 2003 से अब तक 37 बड़े सुधार लागू किए हैं। बीते वर्ष इस रिपोर्ट में दिल्ली और मुंबई को शामिल किया गया था। रिपोर्ट में किसी कारोबार को शुरू करना, कंस्ट्रक्शन परमिट, क्रेडिट मिलना, छोटे निवेशकों की सुरक्षा, टैक्स देना, विदेशों में ट्रेड, अनुबंध लागू करना और दिवालिया शोधन प्रक्रिया को आधार बनाया जाता है।
बता दें कि विशेषज्ञों का मानना है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिग में सुधार होने से देश की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने के साथ विदेशी निवेश बढ़ने से शेयर बाजार में भी तेजी आएगी। जिससे निवेशकों को इन्वेस्टमेंट पर मोटे रिटर्न मिलेंगे। इसके साथ ही विदेशी निवेश बढ़ने से देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
अरुण जेटली बोले- सरकार बनी थी तो हम 142वें स्थान पर थे, अब 77वें पायदान पर
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में हुए सुधार पर बोलते हुए कहा कि जब सरकार बनी थी तब हम ईज ऑफ बिसनेस रैंकिंग में 142वें स्थान पर थे, अब 77वें स्थान पर हैं। 4 साल में हमारी रैंकिंग में इतना सुधार हुआ है, जो पहले कभी नहीं हुआ।
जेटली ने आगे कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आए थे, तो उन्होंने इस इंडेक्स में 50वें पायदान पर आने की बात कही थी और हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीआईपीपी ने बारीकी से काम किया, उसने हर योग्यता पर काम किया। इसी वजह से भारत की रैंकिंग इतनी ज्यादा सुधरी है।
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Prime Minister Narendra Modi received a telephone call today from Jim Yong Kim, the President of the World Bank. Jim Yong Kim congratulated Prime Minister for India’s historic rise in the Ease of Doing Business rankings. (File pics) pic.twitter.com/5HmB87QNRZ
— ANI (@ANI) November 2, 2018
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वहीं वर्ल्ड बैंक के अधिकारियों ने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के समय भारत की रैंकिंग 142 थी। पीएम ने आने वाले वर्षों में भारत को शीर्ष 50 देशों की खास सूची में शामिल करने का लक्ष्य रखा है।
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वर्ल्ड बैंक के डेवलपमेंट इकनॉमिक्स के वरिष्ठ निदेशक और मुख्य कार्यवाहक अर्थशास्त्री शांता देवराजन ने कहा कि इस रैंकिंग में भारत को शीर्ष 50 में लाना सरकार के लिए कड़ी चुनौती है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक और अन्य सुधारों के कारण आने वाले वर्षों में भारत अपनी रैंकिंग में सुधार कर सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत वर्ल्ड बैंक के बेहतर प्रदर्शन करने वालों की सूची में भी शीर्ष 10 में शामिल है। वह इस सूची में दो साल से शीर्ष 10 में जगह बनाने में कामयाब रहा है, जो दुर्लभ संयोग है। शांता ने सुधार उपक्रमों के हित में व्यक्तिगत रूप से रुचि लेने और ईज ऑफ डूइंड बिजनेस की राह आसान करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की।
वहीं, वर्ल्ड बैंक के ग्लोबल इंडिकेटर्स ग्रुप की सीनियर मैनेजर रीता रामाल्हो ने कहा कि इस रैंकिंग में दो साल में 131 से 77वें स्थान पर पहुंचना भारत के लिए शानदार सुधार है। उन्होंने कहा कि भारत को शीर्ष 50 में लाना कठिन चुनौती है।
उल्लेखनीय है कि विश्व बैंक हर साल आसान कारोबार वाले देशों की सूची जारी करता है। इसमें कुल 190 देश होते हैं। इस रैंकिंग में देशों को कई पैमाने पर आंका जाता है। भारत ने वर्ष 2003 से अब तक 37 बड़े सुधार लागू किए हैं। बीते वर्ष इस रिपोर्ट में दिल्ली और मुंबई को शामिल किया गया था। रिपोर्ट में किसी कारोबार को शुरू करना, कंस्ट्रक्शन परमिट, क्रेडिट मिलना, छोटे निवेशकों की सुरक्षा, टैक्स देना, विदेशों में ट्रेड, अनुबंध लागू करना और दिवालिया शोधन प्रक्रिया को आधार बनाया जाता है।
बता दें कि विशेषज्ञों का मानना है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिग में सुधार होने से देश की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने के साथ विदेशी निवेश बढ़ने से शेयर बाजार में भी तेजी आएगी। जिससे निवेशकों को इन्वेस्टमेंट पर मोटे रिटर्न मिलेंगे। इसके साथ ही विदेशी निवेश बढ़ने से देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
अरुण जेटली बोले- सरकार बनी थी तो हम 142वें स्थान पर थे, अब 77वें पायदान पर
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में हुए सुधार पर बोलते हुए कहा कि जब सरकार बनी थी तब हम ईज ऑफ बिसनेस रैंकिंग में 142वें स्थान पर थे, अब 77वें स्थान पर हैं। 4 साल में हमारी रैंकिंग में इतना सुधार हुआ है, जो पहले कभी नहीं हुआ।
जेटली ने आगे कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आए थे, तो उन्होंने इस इंडेक्स में 50वें पायदान पर आने की बात कही थी और हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीआईपीपी ने बारीकी से काम किया, उसने हर योग्यता पर काम किया। इसी वजह से भारत की रैंकिंग इतनी ज्यादा सुधरी है।