प्रधानमंत्री मोदी का युवाओं आग्रह, जरूर पढ़ें तमिल शास्त्रीय ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’
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तमिल शास्त्रीय ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ को समृद्ध विचारों और उत्तम आदर्शों का कोष करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि देश भर के युवा इसे पढ़ेंगे और इससे प्रेरणा लेंगे। अंग्रेजी और तमिल भाषा में सिलसिलेवार ट्वीट कर प्रधानमंत्री ने कहा कि तिरुक्कुरल बहुत प्रेरक है। उन्होंने कहा, ‘यह समृद्ध विचारों, उत्तम आदर्शों और महान प्रेरणा का कोष है। महान संत तिरूवल्लुवर के शब्दों में उम्मीद और प्रकाश बिखेरने की क्षमता है।’
मोदी ने उम्मीद जताई कि देश भर के अधिक से अधिक युवा इसे पढ़ेंगे। उन्होंने तमिल भाषा में छपे कुछ आलेख भी साझा किए जिनमें प्रधानमंत्री द्वारा अपने संबोधनों में इस तमिल शास्त्रीय ग्रंथ का अनेक बार उल्लेख किया गया है। हाल ही में अपने लेह दौरे के दौरान जवानों को संबोधित करते हुए भी उन्होंने महान संत तिरूवल्लुवर को याद किया था। प्रधानमंत्री अक्सर अपने भाषणों में तिरुक्कुरल को उद्धृत करते है। तिरुक्कुरल सभी प्रकार के लोगों का मार्गदर्शन करता है।
गत तीन जुलाई को अपने लेह दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने तिरुक्कुरल को उद्धृत करते हुए कहा था कि भारतीय सेनाएं शौर्य, सम्मान, मर्यादापूर्ण व्यवहार की परंपरा का अनुसरण करती रही हैं। मोदी ने संत तिरूवल्लुवर की पंक्तियों ‘मरमानम मांड वडिच्चेलव् तेट्रम , येना नान्गे येमम पडईक्कु’ को उद्धृत किया था। उन्होंने कहा था, ‘शौर्य, सम्मान, मर्यादापूर्ण व्यवहार की परंपरा और विश्वसनीयता, ये चार गुण किसी भी देश की सेना का प्रतिबिंब होते हैं। भारतीय सेनाएं हमेशा से इसी मार्ग पर चली हैं।’
तिरुक्कुरल एक प्राचीन रचना है, जिसे मुक्तक काव्य में लिखा गया था। इसके रचयिता तिरुवल्लुवर थे। यह तमिल भाषा में लिखी गई एक प्रसिद्ध कृति है। तिरुक्कुरल के सूत्र या पद्य जीवन के हर पहलू को स्पर्श करते हैं। यह नीतिशास्त्र की महान रचना है।
The Tirukkural is extremely inspiring. It is a treasure of rich thoughts, noble ideals and great motivation.
— Narendra Modi (@narendramodi) July 16, 2020
The words of respected Thiruvalluvar have the power to spread hope and brightness.
I hope more youngsters across India read it! pic.twitter.com/Fxi8ROkp0t