पीएम मोदी ने दिल्ली में प्रदूषण और गुजरात में तूफान पर की समीक्षा बैठक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार सुबह वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति और गुजरात चक्रवात की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में उपस्थित लोगों में प्रधान मंत्री के प्रधान सचिव और प्रधान मंत्री के प्रधान सलाहकार शामिल थे।
Prime Minister Narendra Modi reviewed the pollution situation in #Delhi and the Gujarat cyclone situation, today morning with senior officials. Principal Secretary to the Prime Minister and Principal Advisor to the PM were amongst those present in the meeting. (file pic) pic.twitter.com/kFZysuoDBi
— ANI (@ANI) November 5, 2019विज्ञापन
गौरतलब है कि गुजरात, महाराष्ट्र, दमन-दीव और दादर और नगर हवेली के कुछ स्थानों पर अत्यधिक भयंकर चक्रवाती तूफान 'महा' के कारण भारी बारिश होने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग ने इस बात की जानकारी दी। साथ ही मछुआरों को छह नवंबर तक मछली पकड़ने के लिए हुए कुल निलंबन का निरीक्षण करने को कहा गया है।
राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) ने सोमवार को गुजरात, महाराष्ट्र, दमन और दीव में चक्रवात ‘महा’ से बचाव के लिए की जा रही तैयारियों की समीक्षा की थी।
कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली समिति ने बचाव और राहत कार्यों की तैयारियों का जायजा लिया और आवश्यकतानुसार अधिकारियों को तत्काल सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। आईएमडी ने समिति को बताया था कि वर्तमान में पूर्व-मध्य अरब सागर पर मंडरा रहा यह चक्रवात उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और मंगलवार तक इसकी गति बढ़ने की संभावना है।
इसके बाद चक्रवात कमजोर होगा तथा छह नवंबर की रात और सात नवंबर की सुबह तक गुजरात और महाराष्ट्र तट को प्रभावित करेगा। कहा गया है कि 90-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं और 1.5 मीटर तक की ज्वारीय लहरों के साथ भारी वर्षा होने का अनुमान है।
दूसरी ओर दिल्ली के प्रदूषण को लेकर इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा था कि उन्होंने लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया है। अदालत ने कहा था कि दिल्ली की आबोहवा हर साल और दमघोंटू होती जा रही है और हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। हर साल यह हो रहा है और 10-15 दिनों से लगातार ऐसा हो रहा है। सभ्य राष्ट्रों में ऐसा नहीं होता है। जीने का अधिकार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।
प्रदूषण पर न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस अरुण मिश्रा और दीपक गुप्ता ने सुनवाई करते हुए कहा था कि इस तरीके से हम जी नहीं सकते। केंद्र और राज्य सरकार को कुछ करना होगा। ऐसा नहीं चलेगा। यह बहुत हो गया है। इस शहर में रहने के लिए कोई भी घर यहां तक कि कोई कमरा भी सुरक्षित नहीं है। यह अत्याचार है। हम अपनी जिंदगी के कई बहुमूल्य साल इसकी वजह से खो रहे हैं। स्थिति विकट है। केंद्र और दिल्ली सरकार क्या करना चाहते हैं? आप इस प्रदूषण को कम करने के लिए क्या करने का इरादा रखते हैं?