जिस गरुड़चट्टी में पीएम मोदी कर रहे ध्यान, 34 साल पहले भी यहां कर चुके हैं तपस्या
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लोकसभा चुनाव 2019 के सातवें और अंतिम चरण का प्रचार थमने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदरनाथ यात्रा पर हैं। शनिवार को बाबा केदार की पूजा-अर्चना के बाद वे सतरंगी छाता और छड़ी लेकर पैदल ही गरुड़चट्टी के लिए रवाना हो गए। इस दौरान उनके साथ सुरक्षा कर्मी मौजूद थे। बता दें, गरुड़चट्टी पीएम मोदी की तपस्थली कही जाती है, खुद प्रधानमंत्री भी इस बारे में कई बार जिक्र कर चुके हैं।
16 जून 2013 की भीषण आपदा के बाद से वीरान पड़ी गरुड़चट्टी एक बार फिर सुर्खियों में है। रामबाड़ा से केदारनाथ तक बने पैदल मार्ग से इसे जोड़ा गया है। दरअसल, इससे पहले साल 2010 में आपदा के दौरान यह मार्ग ध्वस्त हो गया था। ऐसे में रामबाड़ा से दूसरी पहाड़ी पर लिनचोली होते हुए केदारनाथ तक नया पैदल मार्ग बनाया गया।
#WATCH Prime Minister Narendra Modi on his way to a holy cave near Kedarnath Shrine, Uttarakhand pic.twitter.com/cYxhsc720E
— ANI (@ANI) May 18, 2019
बुजुर्ग तीर्थपुरोहित श्रीनिवास पोस्ती का कहना है कि केदारनाथ यात्रा में गरुड़चट्टी का विशेष धार्मिक महत्व है। यह स्थान आध्यात्म व ध्यान साधना के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मन की शांति के लिए दशकों से सैकड़ों साधु-संत यहां पहुंचते रहे हैं।
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई अवसर पर इस बात का उल्लेख कर चुके हैं कि वे वर्ष 1985 से 1990 के पांच साल के दौरान गरुड़चट्टी में एक संन्यासी की तरह रहे थे। तब वे रोज यहां से केदारनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन और जलाभिषेक करते थे। बीते वर्ष 3 मई और 20 अक्तूबर को भी केदारनाथ पहुंचने पर पीएम मोदी ने यहां बिताए दिनों को याद किया था।
उन्होंने इस स्थान तक पहुंच मार्ग बनाने के साथ इसे विकसित करने के लिए अधिकारियों से कहा था। मुख्य सचिव उत्पल कुमार के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा लोनिवि की मदद से मार्ग बनाने को सर्वे किया गया था।