{"_id":"5e29b8ae8ebc3e7d65412416","slug":"pm-modi-to-lay-wreath-at-national-war-memorial-on-republic-day-for-the-first-time","type":"story","status":"publish","title_hn":"26 जनवरी पर बदलेगी श्रद्धांजलि की परंपरा, अमर जवान ज्योति की जगह वॉर मेमोरियल जाएंगे पीएम मोदी ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
26 जनवरी पर बदलेगी श्रद्धांजलि की परंपरा, अमर जवान ज्योति की जगह वॉर मेमोरियल जाएंगे पीएम मोदी
Thu, 23 Jan 2020 08:45 PM IST
अमित कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमित कुमार
Updated Thu, 23 Jan 2020 08:45 PM IST
विज्ञापन
national war memorial
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गणतंत्र दिवस पर जवानों को श्रद्धांजलि देने की परंपरा पहली बार बदलने जा रही है। इस बार 26 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमर जवान ज्योति की जगह नवनिर्मित नेशनल वॉर मेमोरियल पर जाकर जवानों को श्रद्धांजलि देंगे।
विज्ञापन
इंडिया गेट परिसर में बने इस स्मारक को पिछले साल 25 फरवरी को प्रधानमंत्री ने ही देश को समर्पित किया था। 1971 के भारत-पाक युद्ध के शहीदों की याद में अमर जवान ज्योति को इंडिया गेट पर 1972 में तैयार किया गया था। तीनों सेनाओं के प्रमुख राष्ट्रीय महत्व के प्रमुख अवसरों स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस पर अमर जवान ज्योति पर श्रद्धांजलि देते हैं।
विज्ञापन
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परेड की शुरुआत से पहले 26 जनवरी की सुबह नेशनल वॉर मेमोरियल आएंगे। इस दौरान तीनों सेना प्रमुखों और सीडीएस की उपस्थिति में वह पुष्प चक्र अर्पित करेंगे।'
विज्ञापन
सैन्य अधिकारी ने कहा, 'सिर्फ पीएम मोदी पुष्प चक्र अर्पित करेंगे।' यह भी पहली बार होगा जब गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ आफ आर्मी स्टाफ यानी सीडीएस भी हिस्सा लेंगे। पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने इसी साल एक जनवरी को सीडीएस का पदभार संभाला है।
यह स्मारक चीन से 1962 में हुए युद्ध, पाकिस्तान से 1947, 1965 और 1971 हुई जंग, श्रीलंका में शांति प्रयासों, शांति सेना और कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों की याद में तैयार किया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्मारक के उद्घाटन से पहले कहा था, 'इन अभियानों में भारत के 80 हजार से ज्यादा जवानों ने अपनी जान दीं। जबकि इंडिया गेट पर 13,516 ही नाम दर्ज हैं। अमर जवान ज्योति 1971 के युद्ध के बाद बनाया गया था। इसलिए दोनों का अपना महत्व है।'