संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर पर मोदी देंगे दुनिया को संदेश, आतंकवाद के सवाल पर निशाने पर होगा पाक
- भाषण में आतंकवाद के सवाल पर निशाने पर होगा पाक
- आम सभा से पहले कश्मीर से हटेंगे कई तरह के प्रतिबंध
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र आम सभा में 27 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर पर दुनिया को संदेश देंगे। यह पहला मौका हो जब पीएम मोदी कश्मीर मामले में पहली बार सार्वजनिक तौर पर दुनिया को संदेश देंगे। उनके निशाने पर मुख्य रूप से पाकिस्तान होगा। उधर, पीएम के संबोधन से पहले सरकार कश्मीर में हालात सामान्य करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाएगी। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद भारत ने अब तक पाकिस्तान के हमले का सिर्फ कूटनीतिक जवाब ही दिया है। सार्वजनिक मंच पर भारत ने अपनी ओर से इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है।
सूत्रों के मुताबिक पीएम आम सभा में कश्मीर के मामले में दुनिया को सीधा संदेश देंगे। द्विपक्षीय वार्ताओं और संयुक्त राष्ट्र में बंद कमरे में हुई बैठक में भारत ने जम्मू-कश्मीर में लिए गए निर्णय को आंतरिक मामला बताया था। अब पाकिस्तान के कूटनीतिक मुहिम में अलग-थलग पड़ने के बाद पीएम इस मामले में दुनिया को सार्वजनिक रूप से संदेश देंगे। हालांकि उनके भाषण का मुख्य एजेंडा सीमा पार आतंकवाद होगा। वह इसी बहाने पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करेेंगे। इसके अलावा इस दौरान पीएम गरीबी खत्म करने, पर्यावरण की रक्षा करने जैसे विषयों पर भारत का पक्ष रखेंगे।
कश्मीर पर अहम निर्णय संभव
पीएम के संबोधन से पहले जम्मू-कश्मीर को ले कर सरकार कई अहम फैसले कर सकती है। ऐसे फैसलों के जरिये सरकार संदेश देगी कि राज्य में हालात सामान्य हैं। इस कड़ी में 26 सितंबर तक राज्य में लगाई गई सभी पाबंदियां खत्म करने के साथ हिरासत में रखे गए सियासी दलों के नेताओं के संदर्भ में बड़ा फैसला संभव है। नेताओं को रिहा करने पर सरकार लगातार मंथन कर रही है हालांकि अलगाववादियों के प्रति नरमी नहीं बरतने पर सरकार में व्यापक सहमति है।
कूटनीतिक हलचल होगी तेज
पाकिस्तानी पीएम इमरान खान भी इसी दिन आम सभा को संबोधित करेंगे। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र में कूटनीतिक हलचल तेज होगी। भारत का मानना है कि इमरान अपने भाषण में निश्चित रूप से कश्मीर का जिक्र करेंगे और उनका भाषण पीएम मोदी के भाषण के बाद होगा। ऐसे में इमरान की कोशिशों को पलीता लगाने की योजना पर अभी से विचार विमर्श हो रहा है। दूसरे देशों में स्थित भारतीय दूतावास और उच्चायोग लगातार कूटनीतिक संपर्क साध कर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिशों में जुटे हैं।