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बाबा साहब पुरंदरे का अभिनंदन: पीएम बोले- शिवाजी का 'हिंदवी स्वराज्य' सुशासन का श्रेष्ठ उदाहरण
Fri, 13 Aug 2021 05:38 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 13 Aug 2021 05:38 PM IST
सार
प्रसिद्ध इतिहासकार व लेखक बाबा साहब पुरंदरे का पुणे में सार्वजनिक अभिनंदन किया गया। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी का 11 मिनट का वीडियो संदेश चलाया गया। इसमें उन्होंने शिवाजी व बाबा पुरंदरे को लेकर विचार रखे।
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बाबा साहब पुरंदरे व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
- फोटो : twitter
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि अगर छत्रपति शिवाजी महाराज नहीं होते तो भारत के मौजूदा स्वरूप क्या होता, इसकी कल्पना करना मुश्किल है। शिवाजी का 'हिंदवी स्वराज्य' सुशासन का श्रेष्ठ उदाहरण है।
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पीएम मोदी ने यह भी कहा कि शिवाजी महाराज द्वारा समुद्री शक्ति के प्रभावी उपयोग और वाटरशेड प्रबंधन सहित विभिन्न मोर्चों पर किए गए कार्य अभी भी अनुकरणीय हैं। अपने वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने यह टिप्पणी की। यह वीडियो प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक बाबा साहब पुरंदरे के पुणे में सार्वजनिक अभिनंदन कार्यक्रम के दौरान चलाया गया।
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शिवाजी महाराज पर अपने कार्यों के लिए विशिष्ट पहचान बना चुके पुरंदरे ने 29 जुलाई को अपना 100वां जन्मदिन मनाया। पद्म विभूषण से सम्मानित पुरंदरे को 'शिव शाहीर' के नाम से जाना जाता है। पुरंदरे ने ऐतिहासिक नाटक 'जाणता राजा' (1985) को लिखा और निर्देशित किया है। इसे 200 से अधिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया था और पांच भाषाओं में अनुवाद और मंचित किया गया था।
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भारत का मौजूदा भूगोल शिवाजी की देन
संदेश में पीएम ने कहा कि भारत का वर्तमान भूगोल छत्रपति शिवाजी महाराज के वीरतापूर्ण कार्यों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज भारत के इतिहास में 'शिखर पुरुष' (सर्वोच्च पुरुष) हैं। हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य का सवाल होता कि छत्रपति शिवाजी महाराज न होते तो क्या होता? कल्पना करना मुश्किल होता है। भारत का वर्तमान स्वरूप, छत्रपति शिवाजी महाराज के बिना इसकी वर्तमान भव्यता। उनका 'हिंदवी स्वराज्य' सुशासन का बेहतरीन उदाहरण था। यह वंचितों के लिए न्याय और अन्याय के खिलाफ लड़ाई के बारे में था। शिवाजी महाराज का प्रबंधन, समुद्री शक्तियों का उनका प्रभावी उपयोग, नौसेना की उपयोगिता, प्रभावी वाटरशेड प्रबंधन और ऐसे कई कार्य हैं। अभी भी अनुकरणीय हैं।
पुरंदरे को 100 वर्ष के होने पर बधाई देते हुए मोदी ने कहा कि प्राचीन काल में ऋषियों ने 'शतायु' (100 वर्ष) बनने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था, 'जीवेत शरद: शतम, बुध्यं शरद: शतम, रोहम शरद: शतम'।