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'स्वच्छ ऊर्जा भविष्य का रास्ता': पीएम मोदी बोले- भारत की ताकत बनी रिन्यूएबल एनर्जी, सौर ऊर्जा पर कही ये बात
Mon, 02 Nov 2026 06:23 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Mon, 02 Nov 2026 06:23 PM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 का उद्घाटन करते हुए स्वच्छ ऊर्जा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा सीधे आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। भारत अपनी बिजली क्षमता का 50% से अधिक गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर चुका है और 500 GW क्षमता का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026' का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत है। देश अगले 10-11 वर्षों में लगभग 500 GW की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने के लिए तैयार है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'यह एक सुखद संयोग है कि इस शिखर सम्मेलन के साथ ही इंटरनेशनल सोलर अलायंस की नौवीं सभा भी आयोजित हो रही है। ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथे सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधि भी यहां मौजूद हैं। इसका मतलब है कि इस साल के आयोजन का दायरा काफी व्यापक है। साथियों, पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व संकटों का सामना किया है। कोविड-19 महामारी से लेकर पश्चिम एशिया के संकट तक, दुनिया को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। पश्चिम एशिया का संकट अभी भी जारी है। हालांकि, 140 करोड़ भारतीयों को इस बात पर गर्व है कि हमने अब तक इस संकट को बहुत प्रभावी ढंग से संभाला है।'
पीएम मोदी ने आगे कहा, 'अगर भारत ने पिछले एक दशक में स्वच्छ ऊर्जा में निवेश नहीं किया होता। इसके लिए नई प्रणालियां विकसित नहीं की होतीं, तो हमारा संकट दुनिया के बाकी हिस्सों के सामने आए संकट से कहीं अधिक गंभीर हो सकता था। इस वैश्विक संकट ने हर देश को एक स्पष्ट संदेश दिया है। ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। हम सभी जानते हैं कि ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में निहित है। अगर हम जीवाश्म ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर बने रहते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बार-बार रुकावटों का सामना करना पड़ेगा।
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बिजली क्षमता पर क्या बोले?
उन्होंने आगे कहा, 'हमारी स्थापित बिजली क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों पर आधारित है। भारत 500 GW के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में मजबूती से काम कर रहा है। हम पहले ही लगभग 300 GW का लक्ष्य हासिल कर चुके हैं। सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में भारत अब दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। अगले 10-11 वर्षों में, हम 500 GW की नई गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता जोड़ने का प्रयास करेंगे। यह एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है, लेकिन मुझे अपने देश की क्षमताओं पर पूरा भरोसा है। इसीलिए मैं कहता हूं, 'हम इसे करके दिखाएंगे।'
किसान को लेकर बताया अपना विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं, 'हालांकि हमने पहले ही लाखों सोलर पंप बांट दिए हैं, लेकिन हमें अभी और आगे जाना है। मेरा विजन यह है कि हमारे किसान। हमारे 'अन्नदाता'—'ऊर्जादाता' (ऊर्जा प्रदान करने वाले) भी बनें। किसानों को अपनी खाली जमीन पर, और साथ ही अपने खेतों की मेड़ों पर सोलर पैनल लगाने चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इसे ज्यादा से ज्यादा गांवों में लागू किया जाए।'
उन्होंने आगे कहा, 'सौर क्रांति का यह नया चरण केवल इसे अपनाने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि यह नवाचार (इनोवेशन) पर भी टिका है। इसलिए, मैं अपने स्टार्टअप्स, आईआईटी, इनोवेटर्स और उद्यमियों से आगे आने का आह्वान करता हूं। ऐसे मॉडल विकसित करें जो सौर ऊर्जा का उपयोग करके अधिक से अधिक परिवारों की जरूरतों को पूरा कर सकें। यह सुनिश्चित करते हुए कि यह हर मौसम में, 24/7 उपलब्ध रहे। हमें एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ना चाहिए जहां कोई परिवार अपनी छत पर लगे सोलर प्लांट से बनी बिजली का इस्तेमाल करके खाना पका सके। आयातित गैस पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए हमें 'क्लीन कुकिंग' (स्वच्छ खाना पकाने) के अभियान को बढ़ावा देने की जरूरत है।
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पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'यह एक सुखद संयोग है कि इस शिखर सम्मेलन के साथ ही इंटरनेशनल सोलर अलायंस की नौवीं सभा भी आयोजित हो रही है। ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथे सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधि भी यहां मौजूद हैं। इसका मतलब है कि इस साल के आयोजन का दायरा काफी व्यापक है। साथियों, पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व संकटों का सामना किया है। कोविड-19 महामारी से लेकर पश्चिम एशिया के संकट तक, दुनिया को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। पश्चिम एशिया का संकट अभी भी जारी है। हालांकि, 140 करोड़ भारतीयों को इस बात पर गर्व है कि हमने अब तक इस संकट को बहुत प्रभावी ढंग से संभाला है।'
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पीएम मोदी ने आगे कहा, 'अगर भारत ने पिछले एक दशक में स्वच्छ ऊर्जा में निवेश नहीं किया होता। इसके लिए नई प्रणालियां विकसित नहीं की होतीं, तो हमारा संकट दुनिया के बाकी हिस्सों के सामने आए संकट से कहीं अधिक गंभीर हो सकता था। इस वैश्विक संकट ने हर देश को एक स्पष्ट संदेश दिया है। ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। हम सभी जानते हैं कि ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में निहित है। अगर हम जीवाश्म ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर बने रहते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बार-बार रुकावटों का सामना करना पड़ेगा।
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बिजली क्षमता पर क्या बोले?
उन्होंने आगे कहा, 'हमारी स्थापित बिजली क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों पर आधारित है। भारत 500 GW के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में मजबूती से काम कर रहा है। हम पहले ही लगभग 300 GW का लक्ष्य हासिल कर चुके हैं। सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में भारत अब दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। अगले 10-11 वर्षों में, हम 500 GW की नई गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता जोड़ने का प्रयास करेंगे। यह एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है, लेकिन मुझे अपने देश की क्षमताओं पर पूरा भरोसा है। इसीलिए मैं कहता हूं, 'हम इसे करके दिखाएंगे।'
किसान को लेकर बताया अपना विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं, 'हालांकि हमने पहले ही लाखों सोलर पंप बांट दिए हैं, लेकिन हमें अभी और आगे जाना है। मेरा विजन यह है कि हमारे किसान। हमारे 'अन्नदाता'—'ऊर्जादाता' (ऊर्जा प्रदान करने वाले) भी बनें। किसानों को अपनी खाली जमीन पर, और साथ ही अपने खेतों की मेड़ों पर सोलर पैनल लगाने चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इसे ज्यादा से ज्यादा गांवों में लागू किया जाए।'
उन्होंने आगे कहा, 'सौर क्रांति का यह नया चरण केवल इसे अपनाने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि यह नवाचार (इनोवेशन) पर भी टिका है। इसलिए, मैं अपने स्टार्टअप्स, आईआईटी, इनोवेटर्स और उद्यमियों से आगे आने का आह्वान करता हूं। ऐसे मॉडल विकसित करें जो सौर ऊर्जा का उपयोग करके अधिक से अधिक परिवारों की जरूरतों को पूरा कर सकें। यह सुनिश्चित करते हुए कि यह हर मौसम में, 24/7 उपलब्ध रहे। हमें एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ना चाहिए जहां कोई परिवार अपनी छत पर लगे सोलर प्लांट से बनी बिजली का इस्तेमाल करके खाना पका सके। आयातित गैस पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए हमें 'क्लीन कुकिंग' (स्वच्छ खाना पकाने) के अभियान को बढ़ावा देने की जरूरत है।