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ईरान युद्ध का भारत पर असर: LPG की आपूर्ति को लेकर पीएम ने की उच्च स्तरीय बैठक, हरदीप पुरी और जयशंकर हुए शामिल

Tue, 10 Mar 2026 03:58 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Nirmal Kant Updated Tue, 10 Mar 2026 03:58 PM IST
सार

पश्चिम एशिया में जंग से तेजी से माहौल बदल रहा है। इसका असर अब दुनिया के देशों पर दिखने लगा है। देशों को ईंधन की आपूर्ति की चिंता सताने लगी है। ऐसे में इसके असर की आशंका को देखते हुए पीएम मोदी ने उच्च स्तरीय बैठक की है, जिसमें प्राकृतिक गैस मंत्री और विदेश मंत्री शामिल हुए। पढ़िए रिपोर्ट-

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PM Modi Meets Hardeep Puri and S Jaishankar Over LPG Concerns Amid west asia crisis
रसोई गैस की आपूर्ति पर युद्ध का साया - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में रसोई गैस की संभावित कमी से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई। सूत्रों ने यह जानकारी दी। 
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सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के असर देश के उपभोक्ताओं को बचाने के लिए रणनीतिक योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। मौजूदा संकट की वजह होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना बताया जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल की सैन्य कार्रवाई व ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह समुद्री मार्ग बंद हो गया है। यह मार्ग भारत की उर्जा सुरक्षा के लिए बहुत अहम है, क्योंकि देश अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 62 फीसदी आयात करता है। 
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भारत में एलपीजी की कितनी खपत होती है?
भारत में हर साल करीब 31.3 मिलिटन टन एलपीजी की खपत होती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एलपीजी वितरण को दो हिस्सों में बांटा है। घरेलू क्षेत्र यानी घरों में इस्तेमाल होनी वाली गैस कुल खपत का 87 फीसदी है। वहीं, होटल, रेस्तरां और उद्योग जैसे व्यावसायिक क्षेत्र 13 फीसदी गैस का इस्तेमाल करते हैं। 
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होटल, रेस्तरां और उद्योगों पर असर
सरकार ने आम लोगों और घरों को ध्यान में रखे हुए घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी है। इसकी वजह बाजार कीमत पर मिलने वाले वाणिज्यिक सिलेंडर पर निर्भर होटल, रेस्तरां और उद्योगों को भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस कमी का असर मुंबई और बंगलूरू जैसे बड़े शहरों में भी दिखने लगा है। इस पर इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने भी चिंता जताई है। 

संकट से निपटने के लिए क्या तैयारी?
संकट से निपटने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने कई आपात कदम उठाए हैं। रिफाइनरी को निर्देश दिया गया है कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम करके एलपीजी का उत्पादन ज्यादा से ज्यादा बढ़ाएं। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस सिलेंडर की दोबार बुकिंग का समय 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी को रोका जा सके। 


गैस वितरण तय करेगी समिति
घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा, आयातित एलपीजी को अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे गैर-घरेलू क्षेत्रों की जरूरतों के लिए भी भेजा जा रहा है। इस स्थिति को संभालने के लिए तेल बाजार की कंपनियों के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक समिति बनाई गई है। यह समिति होटल, रेस्तरां और अन्य उद्योगों की मांगों की समीक्षा करेगी और जरूरत, प्राथमिकता और उपलब्धता के आधार पर गैस का वितरण तय करेगी।

एचपीसीएल ने क्या कहा?
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने एक बयान में कहा कि भू-राजनीतिक स्थिति के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है। लेकिन उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस अवधि में गैर-जरूरी वाणिज्यिक आपूर्ति के बारे में अंतिम फैसला यही समिति लेगी। 




 
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