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PM मोदी की जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात तय करेगी भविष्य के रिश्ते

Mon, 04 Sep 2017 12:26 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Mon, 04 Sep 2017 12:26 PM IST
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pm modi, jinping and putin meeting will decide future relation of india
ब्रिक्स सम्मेलन 2016

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात आगे की रिश्ते की दिशा तय करेगी। क्षेत्रीय और अर्थ व्यवस्था के लिहाज से भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका(ब्रिक्स) के इस फोरम को रूस लगातार मजबूत स्वरूप देना चाह रहा है। लेकिन इसमें चीन और भारत के बीच की दूरी तथा चीन और पाकिस्तान के बीच करीबी लगातार आड़े आ रही है।

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इतना ही नहीं चीन से रूस के करीबी रिश्ते का लाभ पाकिस्तान को मिलना शुरू हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों ही शिखर नेताओं से द्विपक्षीय चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अपनी चिंताओं को जाहिर कर सकते हैं।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ यह मुलाकात पांच सितंबर (मंगलवार)को होने की संभावना है। इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित बनाने, सीमा पर भारत और चीन के सुरक्षा बलों के बीच टकराव की संभावना काफी अहम मुद्दा होगा। भारत इस दौरान चीन के राष्ट्रपति को सीमा के विवादित क्षेत्र में उनके समाधान होने तक यथा स्थिति बनाए रखने तथा सीमा विवाद का कारगर हल निकालने की सहमति की याद दिला सकता है। 
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पढ़ें: जानिए क्या है BRICS और क्यों है इसकी अहमियत?

इसके अलावा सीमा रक्षा प्रबंधन समझौता पर दोनों देशों के कारगर पहल उठाने पर चर्चा हो सकती है। ताकि लद्दाख, अरुणांचल के तवांग और सिक्किम में डोकलाम गतिरोध जैसी घटनाएं न होने पाएं। माना जा रहा है दोनों शिखर नेता ब्रिक्स की बैठक से इतर द्विपक्षीय चर्चा के दौरान क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय और आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा कर सकते  हैं।


रूस के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय और आपसी हितों पर चर्चा होगी। रूस भारत का विश्वसनीय सामरिक साझीदार देश है। पिछले कुछ वर्षों से रूस और पाकिस्तान के बीच मधुर संबंध की शुरुआत हो रही है। पाकिस्तान रूस से एमआई-17 समेत कुछ अन्य रक्षा साजो सामान चाहता है। 

यह भारत के लिए लगातार चिंता का सबब है। इसके अलावा रूस और भारत के बीच अभी भी द्विपक्षीय व्यापार मजबूत स्थिति नहीं ले पा रहा है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान रूस के राष्ट्रपति से अपनी चिंताओं का साझा कर सकते हैं। एनएसजी में भारत के लिए सहयोग मांग सकते हैं।

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