सिंधु समझौताः पीएम मोदी बोले- 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते'
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पाकिस्तान के साथ 56 साल पुरानी सिंधु जल संधि पर नए सिरे से विचार के लिए आयोजित समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहते हुए रुख साफ कर दिया कि रक्त और पानी एक साथ नहीं बह सकता। संदेश साफ है कि भारत के हिस्से से पाकिस्तान जा रहे पानी को रोकने के प्रयास तेज किए जाएं। सिंधु जल समझौते पर पहली बार कड़ा कदम अख्तियार करने के संकेत देते हुए भारत ने पाक के खिलाफ जल युद्ध छेड़ने का संकेत दिया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव एस. जयशंकर, जल संसाधन सचिव शशि शेखर और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस बैठक में पीएम ने जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सिंधु जल समझौते के तहत भारत को मिलने वाले पानी के उपयोग की कार्ययोजना तैयार करें।
जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि समझौता तोड़े बिना भी भारत अपने हिस्से का पानी ले सकता है। बैठक में यह भी कहा गया कि अब सिंधु जल आयोग की बैठक ‘सिर्फ आतंक मुक्त माहौल में ही हो सकती है।’ आयोग की अब तक 112 बैठकें हो चुकी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने बैठक में इच्छा व्यक्त की कि भारत अपने हिस्से के पूरे पानी का उपयोग करने का रास्ता तलाशे। हालांकि भारत अपनी ओर से वैधानिक रूप से समझौते का कोई उल्लंघन नहीं करेगा, लेकिन सद्भाव और विश्वास के माहौल में पाकिस्तान को दिया जा रहा अपने (भारत) हिस्से का पानी भी नहीं देगा।
पिछले 56 साल से जारी है समझौता
करीब डेढ़ घंटे तक चली इस समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री ने समझौते के तकनीकी, व्यावहारिकता, भारत और पाकिस्तान के परिप्रेक्ष्य में जल प्रवाह तथा इसके विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बैठक में भारत ने वेस्टर्न नदियों (सिंधु, चिनाब और झेलम) के अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग करने का निर्णय किया है।
छह हेक्टेयर सिंचाई, 8 हजार मेगावाट बिजली का बंदोबस्त
प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई मीटिंग में जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शशि शेखर ने एक प्रजेंटेशन दिया, जिसमें कहा गया कि बिना समझौते को तोड़े बिना हम जो अपने हिस्से का ज्यादा पानी पाकिस्तान को दे रहे हैं, उसको रोका जा सकता है। बैठक में यह भी कहा गया कि 3.6 मिलियन एकड़ फुट जल भंडारण पर भारत का हक है। इससे 6 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। यह पानी हम पाकिस्तान को ज्यादा दे रहे थे।
यही नहीं इस पानी से 18000 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। पाकिस्तान के नियंत्रण वाली तीन नदियों- सिंधु, चिनाब और झेलम की क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करने का फैसला करने के अलावा बैठक में 1987 की तुलबुल परियोजना के ‘एकतरफा स्थगन’ की समीक्षा पर भी सहमति बनी। यह परियोजना सन 2007 से लंबित है।