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Uniform Civil Code: समान नागरिक संहिता पर दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट भेजने की मांग

Sat, 15 Jan 2022 10:21 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sat, 15 Jan 2022 10:21 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट में समान नागरिक संहिता को लेकर लंबित याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए ट्रांसफर याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

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Pleas seek transfer of cases on Uniform Civil Code from Delhi High Court to Supreme Court
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग के साथ तीन याचिकाएं दाखिल की गई हैं। ये ट्रांसफर याचिकाएं अमबर जैदी, निघत अब्बास और दानिश इकबाल ने दाखिल की हैं। तीनों लोगों की यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने की मांग करने वाली अलग-अलग याचिकाएं दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित हैं। 

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याचिकाओं में कहा गया है कि यद्यपि हाईकोर्ट ने यूसीसी पर जनहित याचिकाओं को लेकर 20 मार्च 2020 को कुछ केंद्रीय मंत्रालयों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन इसके बाद कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ये याचिकाएं बहुत अहम संवैधानिक मुद्दे से संबंधित हैं, ऐसे में बेहतर होगा कि अंतिम घोषणा के लिए इन्हें सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया जाए।
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भाजपा नेता ने की थी न्यायिक आयोग का गठन करने की मांग
इससे पहले भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर देश में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन करने की मांग उठाई थी। उपाध्याय ने इस पत्र में यह भी कहा था कि कुछ लोग यूनिफॉर्म सिविल कोड या 'समान नागरिक संहिता' का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसका मसौदा सार्वजनिक नहीं है।
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केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में कही है यह बात
केंद्र ने हाल में दिल्ली हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर कर बताया था कि विधि आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद यूसीसी बनाने के मामले पर हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कर इसकी पड़ताल की जाएगी। बता दें कि सितंबर 2019 में एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गोवा को ‘समान नागरिक संहिता’ लागू करने के मामले में एक बेहतरीन उदाहरण करार दिया था।

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