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सुप्रीम कोर्ट: मणिपुर में बार-बार इंटरनेट बैन का मामला पहुंचा शीर्ष अदालत; दी गई हैं यह दलीलें

Tue, 06 Jun 2023 11:01 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 06 Jun 2023 11:01 PM IST
सार

याचिका के मुताबिक, इंटरनेट पर प्रतिबंध से राज्य के निवासियों ने भय, चिंता, लाचारी और हताशा का अनुभव किया। वे अपने प्रियजनों या कार्यालय के सहयोगियों के साथ संवाद करने में असमर्थ हैं।

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Plea in Supreme Court against internet ban in Manipur
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मणिपुर के दो निवासियों ने एक महीने पहले शुरू हुई जातीय हिंसा के कारण बार-बार इंटरनेट पर प्रतिबंध के खिलाफ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। चोंगथम विक्टर सिंह और मेयेंगबम जेम्स ने अपनी याचिका में कहा है रि इंटरनेट पर प्रतिबंध भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सांविधानिक अधिकार का उल्लंघन है। प्रतिबंध से उनके परिवारों पर आर्थिक, मानवीय, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है।

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याचिका के मुताबिक, इंटरनेट पर प्रतिबंध से राज्य के निवासियों ने भय, चिंता, लाचारी और हताशा का अनुभव किया। वे अपने प्रियजनों या कार्यालय के सहयोगियों के साथ संवाद करने में असमर्थ हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि अफवाह फैलाने और गलत सूचना के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से इंटरनेट का लगातार निलंबन दूरसंचार निलंबन नियम 2017 द्वारा निर्धारित नियमों के मुताबिक नहीं है। 
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गौरतलब है कि मणिपुर सरकार ने मंगलवार को इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध 10 जून तक बढ़ा दिया है। गृह विभाग के आयुक्त एच ज्ञान प्रकाश द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि ब्रॉडबैंड सहित मोबाइल डेटा सेवाओं का निलंबन 10 जून की दोपहर तीन बजे तक बढ़ा दिया गया है। राज्य में यह प्रतिबंध तीन मई को लगाया गया था।
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गौरतलब है कि मणिपुर में जातीय हिंसा में करीब 100 लोगों की जान गई है और 310 अन्य घायल हो गए। इतना ही नहीं, कुल 37,450 लोग वर्तमान में 272 राहत शिविरों में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। राज्य में मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद 3 मई को पहली बार झड़पें हुईं थीं। इसके बाद जब ये हिंसा शांत नहीं हुई तो राज्य में शांति बहाल करने के लिए सेना और असम राइफल्स के करीब 10,000 जवानों को तैनात किया गया है।

मेइती मणिपुर की आबादी का लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। जनजातीय नागा और कुकी जनसंख्या का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में निवास करते हैं।

Plea in Supreme Court against internet ban in Manipur
लोगों ने निकाला कैंडल मार्च। - फोटो : अमर उजाला

लोगों ने निकाला कैंडल मार्च 
हिंसाग्रस्त मणिपुर में शांति और भाईचारे की बहाली के लिए मंगलवार को रात 8 बजे से 9 बजे तक हजारों लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। इसे पीस शॉलिडेरिटी मार्च कहा गया, जिसमें हजारों लोग हाथों में कैंडल लेकर सड़कों पर निकले और मानव श्रृंखला बनाई।
 
जानकारी के मुताबिक राज्य में शांति और भाईचारे के लिए मंगलवार रात 8 बजे से 9 बजे तक हजारों महिलाओं के साथ हर उम्र के लोगों ने कैंडल मार्च में हिस्सा लिया। सूत्रों के मुताबिक इसका आयोजन महिला संगठनों ने किया था। इसे पीस सॉलिडेरिटी मार्च कहा गया। मणिपुरी महिलाएं और युवाने अपने हाथों में मोमबत्तियों के साथ मानव श्रृंखला बनाई। इस दौरान वे लगातार नारे लगा रहे थे, हम अपनी भूमि में शांति और अखंडता में विश्वास करते हैं।

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