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पट्टिका विवाद: विश्व भारती ने कहा- यह एक अस्थायी ढांचा, स्थायी संरचना में शामिल किया जाएगा यूनेस्को का टेक्स्ट

Wed, 25 Oct 2023 07:06 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 25 Oct 2023 07:06 PM IST
सार

Plaque row: केंद्रीय विश्वविद्यालय के विशाल परिसर में कई स्थानों पर लगाई गई पट्टिका पर विश्वविद्यालय के पदेन कुलाधिपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती के नाम हैं, लेकिन इसमें विश्वविद्यालय की स्थापना करने वाले गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का कोई जिक्र नहीं है।

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Plaque row: Visva Bharati says it was temporary structure, texts from UNESCO incorporated in permanent one
Shanti Niketan plaques - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

विश्वभारती विश्वविद्यालय ने हाल ही में शांति निकेतन को यूनेस्को धरोहर स्थल के रूप में वर्णित करने वाली तीन पट्टिकाएं स्थापित कीं। तबसे इनको लेकर खूब विवाद हो रहा है। इस बीच, विश्वविद्यालय ने कहा कि यह महज एक अस्थायी ढांचा है। गौरतलब है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के विशाल परिसर में कई स्थानों पर लगाई गई पट्टिका पर विश्वविद्यालय के पदेन कुलाधिपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती के नाम हैं, लेकिन इसमें विश्वविद्यालय की स्थापना करने वाले गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का कोई जिक्र नहीं है।

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इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य जवाहर सरकार ने पहले कहा था कि यूनेस्को ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे शांतिनिकेतन को विश्व धरोहर स्थल घोषित कर रवींद्रनाथ टैगोर और उनकी अनूठी विरासत का सम्मान कर रहे हैं। लेकिन, एक कुलपति और उनके बॉस को लगता है कि यूनेस्को उन्हें सम्मानित कर रहा है। आश्रमवासियों के एक वर्ग और वामपंथी छात्र कार्यकर्ताओं ने भी इस कदम का विरोध किया था।

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विश्व भारती की प्रवक्ता महुआ बंदोपाध्याय ने कहा, 'यह पूरी तरह से अस्थायी ढांचा है, जिसे धरोहर स्थल के सीमांकन के लिए बनाया गया है।' उन्होंने कहा, 'आईएसआई और यूनेस्को कुछ टेक्स्ट मुहैया कराएंगे, जो प्राप्त होने के बाद तैयार किए जाएंगे।' 

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विश्वविद्यालय के एक शिक्षक ने कहा कि 17 सितंबर को शांति निकेतन को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल से सम्मानित किए जाने के बाद केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थान के परिसर में ऐसी तीन पट्टिकाएं लगाई गई थीं। यूनेस्को ने शांति निकेतन की स्थापना के लिए 'प्रसिद्ध कवि और दार्शनिक रवींद्रनाथ टैगोर' को श्रेय दिया, जो '20 वीं शताब्दी की शुरुआत में प्रचलित 'ब्रिटिश औपनिवेशिक वास्तुकला और यूरोपीय आधुनिकता' से विशिष्ट रूप से अलग है।

विश्वविद्यालय के एक शिक्षक ने कहा कि 17 सितंबर को शांति निकेतन को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल से सम्मानित किए जाने के बाद केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थान के परिसर में ऐसी तीन पट्टिकाएं लगाई गई थीं। यूनेस्को ने शांति निकेतन की स्थापना के लिए 'प्रसिद्ध कवि और दार्शनिक रवींद्रनाथ टैगोर' को श्रेय दिया, जो '20 वीं शताब्दी की शुरुआत में प्रचलित 'ब्रिटिश औपनिवेशिक वास्तुकला और यूरोपीय आधुनिकता' से विशिष्ट रूप से अलग है।

विश्व भारती विश्वविद्यालय संकाय संघ (वीबीयूएफए) ने प्रधानमंत्री और कुलाधिपति नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल सी वी आनंद बोस को ईमेल भेजकर इसे (टैगोर के नाम का जिक्र न करके) 'गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान' बताया है। ईमेल में कहा गया है, 'यह आपका ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित करने के लिए है कि कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती ने शांति निकेतन में विरासत स्थल पर कई पट्टिकाएं लगाई हैं, जिन पर 'यूनेस्को हेरिटेज साइट' लिखा है, जिसके तहत कुलाधिपति के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुलपति के रूप में बिद्युत चक्रवर्ती के नाम का जिक्र किया गया है। यह देखकर हम हैरान हैं कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के नाम का कोई जिक्र नहीं है जो विश्व भारती के संस्थापक हैं।
 

यह ई-मेल प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को भी भेजा गया है। इसमें कुलपति के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने इससे पहले कहा था, 'जवाहर सरकार जैसे लोग राज्यसभा सदस्य के रूप में उतारे जाने के बाद पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया पर इस तरह के मुद्दे उठा रहे हैं ताकि अनावश्यक रूप से विवाद पैदा किया जा सके।'

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