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'कारगिल, पीओके और सर क्रीक देने की थी तैयारी': निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर आरोप, हवाना बैठक का दिया हवाला

Wed, 16 Sep 2026 01:42 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 16 Sep 2026 01:42 PM IST
सार

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन धमाकों के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार की पाकिस्तान नीति पर सवाल उठाते हुए उसकी तुलना 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से की है। दुबे ने आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह सरकार ने सैन्य कार्रवाई के बजाय अमेरिकी दबाव में पाकिस्तान से कूटनीतिक बातचीत को प्राथमिकता दी।

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Plans were afoot to cede Kargil PoK and Sir Creek bjp mp Nishikant Dubey accuses Congress cites Havana meeting
निशिकांत दुबे, सांसद, भाजपा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

झारखंड के गोड्डा सीट से भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे ने जुलाई 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार की पाकिस्तान नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने सीमा पार आतंकवाद का जवाब सैन्य कार्रवाई से देने के बजाय अमेरिकी दबाव के बीच कूटनीतिक बातचीत का रास्ता चुना। एक्स पर साझा किए गए अपने पोस्ट में दुबे ने 2006 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद की परिस्थितियों की तुलना 2025 के पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' से की। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दोनों घटनाओं के बाद अपनाए गए तौर-तरीकों को लेकर जनता के सामने जवाब रखने को कहा।

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हवाना बैठक को लेकर निशिकांत दुबे का दावा
निशिकांत दुबे ने 16 सितंबर 2006 को हवाना में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच हुई मुलाकात का हवाला दिया। उन्होंने इस बैठक को अमेरिका के दबाव में हुई कूटनीतिक पहल बताया। दुबे के मुताबिक, यह मुलाकात ऐसे समय हुई थी जब जुलाई 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों से देश में भारी आक्रोश था। इन धमाकों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों लोग घायल हुए थे और कई लोगों को गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचा था। दुबे का आरोप है कि हमलों के बाद देश में पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने सैन्य जवाब देने के बजाय बातचीत के जरिए तनाव कम करने का रास्ता चुना।
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सोनिया गांधी के नेतृत्व पर भी साधा निशाना
भाजपा सांसद ने अपने बयान में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उनका दावा है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की अगस्त 2006 की बैठक में पाकिस्तान के साथ बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया गया था। दुबे ने इसे उस समय की सरकार की कमजोर कूटनीतिक नीति के तौर पर पेश किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व अमेरिकी दबाव से प्रभावित था। हालांकि, उनके इस राजनीतिक दावे को उन्होंने अपने पोस्ट में तत्कालीन घटनाक्रम और सामने आए दस्तावेजों के संदर्भ में रखा है।
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विकीलीक्स के दस्तावेजों का भी किया जिक्र
निशिकांत दुबे ने अपने आरोपों के समर्थन में विकीलीक्स से सामने आए दस्तावेजों का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि इन दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि तत्कालीन यूपीए सरकार व्यापक कूटनीतिक समझौते के तहत कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और सर क्रीक जैसे मुद्दों पर रियायत देने की दिशा में आगे बढ़ रही थी। दुबे ने 22 सितंबर 2006 को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और दक्षिण एशियाई नेताओं के बीच हुई बैठकों से जुड़े रिकॉर्ड का भी हवाला दिया। उनके अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच हुई बातचीत तथा कूटनीतिक पहल की जानकारी अमेरिकी नेतृत्व तक पहुंचाई गई थी।

परमाणु समझौते को लेकर लगाया गंभीर आरोप
भाजपा सांसद ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते का जिक्र करते हुए भी तत्कालीन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि हवाना में हुई बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान के नेताओं ने अमेरिका जाकर राष्ट्रपति बुश को पूरी जानकारी दी थी। दुबे ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने परमाणु समझौते के दौरान देश की संप्रभुता से जुड़े हितों से समझौता किया और इसके बदले कारगिल तथा कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान को रियायत देने की तैयारी की। उन्होंने अपने पोस्ट में इसे देश की विदेश नीति से जुड़ा बेहद गंभीर मामला बताया।

2006 के मुंबई धमाकों से 2025 के पहलगाम हमले तक तुलना
निशिकांत दुबे ने अपने बयान का केंद्र 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद की गई कार्रवाई को बनाया। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाओं के बाद भारत की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान को लेकर अपनाई गई रणनीति की तुलना की जानी चाहिए। दुबे के मुताबिक, 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने सीमा पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया, जबकि 2006 के मुंबई धमाकों के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने पाकिस्तान के साथ बातचीत को प्राथमिकता दी थी।


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राहुल गांधी से मांगा जवाब
इसी तुलना के आधार पर निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सवाल किया कि वह 2006 और 2025 के घटनाक्रम में अंतर को देश की जनता के सामने कैसे समझाएंगे। उन्होंने राहुल गांधी से मुंबई ट्रेन धमाकों के बाद मनमोहन सिंह सरकार की पाकिस्तान नीति और पहलगाम हमले के बाद मौजूदा सरकार की कार्रवाई के बीच अंतर पर जवाब देने की मांग की। दुबे ने अपने पोस्ट में कहा कि राहुल गांधी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 2006 में मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान के साथ अपनाई गई कूटनीतिक नीति और 2025 में पहलगाम हमले के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए दिए गए जवाब में क्या अंतर था। भाजपा सांसद ने इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस की तत्कालीन और मौजूदा नीतियों की तुलना को राजनीतिक बहस का विषय बनाया है।

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