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यूपी-उत्तराखंड में जबरन धर्म परिवर्तन कानूनों को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं
Thu, 03 Dec 2020 10:07 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 03 Dec 2020 10:07 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
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विवाह के लिए धर्म परिवर्तन से संबंधित उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में गुरुवार को दो जनहित याचिकाए दायर की गईं। पहली याचिका विशाल ठाकरे, अभय सिंह यादव और प्रणवेश ने दायर की है। इसमें इन कानूनों को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध करते हुये कहा गया है कि ये संविधान के बुनियादी ढांचे को प्रभावित करते हैं।
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इस याचिका में कहा गया है कि विवाह की खातिर धर्म परिवर्तन से संबंधित इन कानूनों को चुनौती देते हुए 'लव जिहाद' शब्दावली का इस्तेमाल किया गया है। याचिका में कहा गया है कि इन दोनों राज्यों के ये कानून लोक नीति और समाज के खिलाफ हैं। याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020 विशेष विवाह कानून, 1954 के प्रावधानों के खिलाफ है।
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इस याचिका में कहा गया है कि यह समाज के उस वर्ग के मन में भय पैदा करेगा जो लव जिहाद का हिस्सा नहीं है और जिन्हें आसानी से झूठे मामले में फंसाया जा सकता है। याचिका में दलील दी गई है कि यह अध्यादेश समाज के गलत तत्वों के हाथों का एक हथियार बन सकता है। याचिका में अदालत से इस अध्यादेश को प्रभावी नहीं करने व इसे वापस लेने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
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दूसरी याचिका अधिवक्ता नीरज शुक्ला ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020 के खिलाफ दायर की है। यूपी सरकार ने 24 नवंबर को विवाह की खातिर जबरन या झूठ बोलने के धर्म परिवर्तन के मामलों से निपटने के लिए इसे मंजूर किया था, जिसके तहत दोषी को 10 साल तक की कैद हो सकती है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 28 नवंबर को इस अध्यादेश को मंजूरी दी थी।
इस अध्यादेश के तहत महिला का सिर्फ विवाह के लिए ही धर्म परिवर्तन के मामले में विवाह को शून्य घोषित कर दिया जाएगा और जो विवाह के बाद धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं उन्हें इसके लिए जिलाधिकारी के यहां आवेदन करना होगा। एक अधिवक्ता ने बताया कि उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता कानून 2018 में लागू किया गया है। इसका उद्देश्य जबरन, अनावश्यक रूप से प्रभावित करके, धमकी देकर या प्रलोभन अथवा छल से धर्म परिवर्तन पर प्रतिबंध लगाकर धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करना है।
बता दें कि हाल के सप्ताहों में भाजपा शासित राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्यप्रदेश ने विवाह की आड़ में हिंदू युवतियों का धर्म परिवर्तन कराने के कथित प्रयासों पर अंकुश लगाने के लिए कानून बनाने की मंशा जाहिर की थी। पार्टी नेता इस तरह की गतिविधि को अक्सर लव जिहाद बताते हैं।