कंधार हाईजैक: विमान को उतारने के लिए कैसे डराया था लाहौर ATC को, 24 साल बाद पायलट ने किया खुलासा; पढ़ें
कैप्टन शरण, उनके सह पायलट और फ्लाइट इंजीनियर ने पाकिस्तानी अधिकारियों के फैसले के खिलाफ विमान को लाहौर हवाई अड्डे पर उतारने का फैसला किया था और ऐसा करते समय उन्होंने रनवे को राजमार्ग समझ लिया था। अब इसी को लेकर एक नया खुलासा हुआ है।
विस्तार
इंडियन एयरलाइंस का विमान IC-814 नेपाल के काठमांडू से हाईजैक करने के 24 साल बाद इसके पायलट कैप्टन देवी शरण ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराने का नाटक करके लाहौर में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को डराने की एक गुप्त योजना बनाई थी।
अभी तक लोगों को पता थी यह कहानी
बता दें, अभी तक यह समझा जा रहा था कि कैप्टन शरण, उनके सह पायलट राजिंदर कुमार और फ्लाइट इंजीनियर एके जग्गिया ने पाकिस्तानी अधिकारियों के फैसले के खिलाफ विमान को लाहौर हवाई अड्डे पर उतारने का फैसला किया था और ऐसा करते समय उन्होंने रनवे को राजमार्ग समझ लिया था क्योंकि रनवे पर लाइटें बंद थीं। हालांकि, विमान राजमार्ग को छूने ही वाला था कि उन्हें इसका एहसास हो गया और तुरंत ऊपर की ओर खींच लिया।
फ्लाइट इंजीनियर एके जग्गिया ने साल 2003-04 में पत्रकारों को बताया था कि एटीसी ने उन्हें हवाई अड्डे पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। साथ ही रनवे तथा हवाई अड्डे की लाइटें बंद कर दी गई थीं। वहीं, विमान में ईंधन कम बचा हुआ था। ऐसे में रनवे का पता लगाने के लिए अंधेरे में टटोलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
जग्गिया ने आगे बताया था कि जब हम जगह ढूंढ रहे थे तो उस समय एक जगह दिखाई दी, जो आसमान से एक रनवे की तरह लग रहा था, लेकिन जब पास में पहुंचे तो वह एक राजमार्ग था। अहसास होते ही तुरंत विमान को ऊपर खींच लिया गया। बता दें, जग्गिया का निधन कुछ साल पहले हो गया था।
अब हुआ यह नया खुलासा
हालांकि, अब इस घटना को लेकर कुछ और ही बताया जा रहा है। 31 जुलाई से 5 अगस्त तक विमानन सुरक्षा संस्कृति सप्ताह को चिह्नित करने के लिए हाल ही में एक कार्यक्रम हुआ था। इस दौरान कैप्टन शरण मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। उन्होंने 24 साल पहले हुए हाईजैक को लेकर एक नई बात बताई।
उन्होंने कहा कि विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराने का नाटक किया गया था। यह जानबूझकर कदम उठाया गया था और केवल उन्हें ही इसकी जानकारी थी क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि उनके सह-पायलट को भी उनकी इस योजना के बारे में पता चले।
शरण ने इस मौके पर कहा कि कॉकपिट में मेरे पीछे दो आतंकवादी खड़े हुए थे और मैं अपने सह-पायलट या चालक दल से जो भी बात कर रहा था, वे सब कुछ समझ रहे थे। इसलिए मैंने कुछ चीजें अपने तक ही सीमित रखने का फैसला किया। उन्होंने आगे बताया कि जब लाहौर एटीसी ने विमान को उतारने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, तो मैंने विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने का नाटक करने की योजना बनाई ताकि उन पर रनवे की लाइटें चालू करने और हमें वहां उतरने की अनुमति देने का दबाव डाला जा सके।
कैप्टन शरण ने आगे कहा कि विमान में लगा ट्रांसपोंडर नामक उपकरण एटीसी को स्थान का विवरण देता है। उनके मुताबिक, इस डिवाइस की मदद से उन्हें लगा कि वह विमान को क्रैश लैंड कराने वाले हैं। उन्होंने कहा कि विश्वास करें, मेरी योजना काम कर गई और मुझे तुरंत एटीसी से सूचना मिली कि रनवे खुला है और हम सुरक्षित रूप से वहां उतर गए। शरण ने कहा कि मैंने इस योजना के बारे में कभी भी सहयोगियों को नहीं बताया।
क्या था कंधार हाईजैक?
इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 को 24 दिसंबर 1999 को शाम 4 बजे काठमांडू से उड़ान भरने के 40 मिनट बाद पांच आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था। लगभग 180 यात्रियों को ले जाने वाला विमान आठ दिनों तक बंधक रहा था। आतंकी फ्लाइट को अमृतसर, लाहौर और दुबई होते हुए कंधार, अफगानिस्तान ले गए। कंधार जाने से पहले प्लेन को दुबई में उतारा गया, यहां आतंकियों ने 27 बंधकों को छोड़ा। इनमें से एक रूपिन कात्याल भी थे, जिनकी आतंकियों ने हत्या कर दी थी।
आतंकियों ने सभी बंधकों की रिहाई के लिए भारत सरकार से जेलों में बंद 35 उग्रवादियों की रिहाई और 200 मिलियन डॉलर की मांग की थी. हालांकि, बाद में ये आतंकी केवल तीन कैदियों को रिहा करने पर ही तैयार हो गए थे। भारत सरकार की कोशिशों के बाद अफगानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट पर 31 दिसंबर साल 1999 में सभी यात्रियों को रिहा कर दिया गया।