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भ्रष्टाचार, आतंकवाद के मामलों में लगातार सजा के लिए याचिका दायर, सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट राजी
Thu, 28 Nov 2019 03:07 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Thu, 28 Nov 2019 03:07 PM IST
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supreme court
- फोटो : PTI
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सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया जिसमें भ्रष्टाचार तथा आतंकवाद के विशेष कानूनों के तहत दोषी व्यक्ति को सुनाई गई कारावास की भिन्न सजाओं के लिए एक साथ कैद की बजाए एक के बाद एक सजा भुगतने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
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अमेरिका जैसे देशों में किसी भी अपराधी को अलग-अलग मामलों में मिली सजाए एक चलने की बजाए एक के बाद एक भुगतनी होती है।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की तीन सदस्यीय पीठ ने भाजपा नेता एवं अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की इस दलील को स्वीकार किया कि इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है क्योंकि शीर्ष अदालत ने इस साल मार्च में ही केंद्र को इस मामले में नोटिस जारी किया था।
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उपाध्याय ने कहा कि याचिका पर केंद्र का जवाब आ गया है और अब यह मामला सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार है, अत: इसे शीघ्र सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि मामले को चार हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
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याचिका में कहा गया है कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के एक प्रावधान के तहत दोषी व्यक्ति अलग-अलग अपराधों के लिए मिली सजा को एक साथ काट सकता है लेकिन यह प्रावधान नृशंस अपराधों के लिए लागू नहीं होना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 31 गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए), भ्रष्टाचार रोकथाम कानून (पीसीए), बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध कानून, धनशोधन निवारण कानून (पीएमएलए), विदेशी योगदान (विनिमय) कानून (एफसीआरए), काला धन एवं कर चोरी कानून और भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून जैसे विशेष अधिनियमों पर लागू नहीं होनी चाहिए।