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'अयोध्या विवाद: नाउम्मीद थे हाशिम अंसारी'

Sat, 23 Jul 2016 05:31 PM IST
समीरात्मज मिश्र/ बीबीसी
समीरात्मज मिश्र/ बीबीसी Updated Sat, 23 Jul 2016 05:31 PM IST
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हाशिम अंसारी रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद के मुकदमे के पैरोकार - फोटो : BBC

अयोध्या के टेढ़ी बाजार की छोटी सी गली के एक छोटे से घर में एक छोटे कद का इतना बड़ा इंसान रहता था, ये हाशिम अंसारी की मौत की खबर पाकर उमड़ी भीड़ को देखकर पता चला। हाशिम अंसारी यूं तो उस रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद के मुकदमे के पैरोकार थे जिसके चलते देश भर में कई सांप्रदायिक दंगे हो चुके हैं, लेकिन यहां तो हिंदू भी उतना ही गमगीन था जितना कि मुसलमान।

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हाशिम अंसारी पिछले 65 साल से बाबरी मस्जिद पर मुसलमानों के हक की लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन उनकी कोशिश थी कि ये मसला आपसी मेल-जोल से सुलझे। अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञानदास के साथ वो इसके लिए प्रयासरत भी थे। अब उनकी मौत के बाद लोगों में यही सवाल था कि क्या बातचीत के जरिए इस मसले के हल होने की उम्मीद है?
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हाशिम अंसारी के बेटे मोहम्मद इकबाल तो ऐसा ही सोचते हैं। वो कहते हैं कि नई पीढ़ी की सोच हमसे कुछ अलग हो सकती है, लेकिन चाहते सभी लोग यही हैं कि ये मसला शांति से हल हो। किसी तरह का खून-खराबा न हो। हम लोग अपनी पूरी कोशिश करते रहेंगे।

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हाशिम अंसारी मुकदमे की पैरवी की विरासत बेटे इकबाल के ही नाम कर गए

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हाशिम अंसारी के जनाने में इकट्ठ्रा हुए लोग - फोटो : BBC

हाशिम अंसारी मुकदमे की पैरवी की विरासत बेटे इकबाल के ही नाम कर गए हैं। उनके जनाजे में शामिल होने के लिए आए उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी का कहना था कि उन्हें इस मसले के आपसी बातचीत से सुलझने की उम्मीद नहीं है क्योंकि अयोध्या के हिंदू और मुसलमान ऐसा चाहते हैं, लेकिन बाहरी लोग नहीं चाहते।

और यही बाहरी लोग आज ज्यादा प्रभावी और ताकतवर हैं। जफरयाब जिलानी ने ये रहस्योद्घाटन भी किया कि उम्मीद तो हाशिम अंसारी को भी नहीं थी लेकिन वो ऐसा किसी से कहते नहीं थे। लेकिन अयोध्या में ये बात आम है कि हाशिम अंसारी अयोध्या के संतों के साथ इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे। 

अयोध्या के संतों से उनकी दोस्ती के चर्चे भी आम थे। यही वजह है कि जिस शख्स ने 65 साल मस्जिद की लड़ाई लड़ी उसकी मौत की खबर सुनने के बाद सबसे पहले पहुंचने वालों में राम जन्मभूमि मंदिर के पुजारी महंत सत्येंद्र दास और हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास थे।

महंत ज्ञानदास इस मौके पर काफी भावुक हो गए

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महंत ज्ञानदास - फोटो : BBC

महंत ज्ञानदास इस मौके पर काफी भावुक हो गए और बोले कि हाशिम अंसारी अपने बेटे इकबाल को उन्हें सौंप कर गए हैं। अजीब विरोधाभास है। हाशिम अंसारी ने बाबरी मस्जिद का मुकदमा लड़ने की अपनी जिम्मेदारी बेटे इकबाल को सौंपी और इकबाल की जिम्मेदारी कानूनी तौर पर अपने विरोधी महंत ज्ञानदास को।

अयोध्या के आम लोगों का कहना है कि इस मसले के समाधान का रास्ता भी ऐसे ही रिश्तों से होकर जाता है। ये पेचीदा भले लग रहा हो लेकिन है सच्चा।

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