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तीन तलाक पर बोले अरुण जेटली- संविधान के अनुरूप होना चाहिए पर्सनल लॉ
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Mon, 17 Oct 2016 03:52 AM IST
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तीन तलाक के मुद्दे पर देशभर में छिड़े बहस के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार की यह स्पष्ट राय है कि पर्सनल लॉ संविधान के अनुरूप होने चाहिए। साथ ही यह लैंगिक समानता और सम्मान के साथ जीने के अधिकार के हिसाब से होना चाहिए।
वित्त मंत्री ने 'तीन तलाक और सरकार का हलफनामा' शीर्षक से लिखे अपने फेसबुक पोस्ट में कहा है कि पूर्व की सरकार समान नागरिक संहिता पर कड़ा रुख अख्तियार करने से बचती रही। उसने कभी भी यह नहीं कहा कि पर्सनल लॉ मौलिक अधिकारों के अनुरूप होने चाहिए। जेटली ने कहा कि मौजूदा सरकार का इस मुद्दे पर रुख स्पष्ट है। जेटली ने कहा कि पर्सनल लॉ संविधान के अनुरूप होने चाहिए। इसके बाद यह देखा जाएगा कि तीन तलाक से समानता और सम्मान के जीने के अधिकार का उल्लंघन न हो। वित्त मंत्री ने कहा कि अन्य पर्सनल लॉ पर भी सरकार का रुख यही रहेगा।
जेटली ने कहा कि तीन तलाक की संवैधानिक वैधता और समान नागरिक संहिता पूरी तरह अलग हैं और सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ तीन तलाक की संवैधानिक वैधता का मामला है। सुप्रीम कोर्ट में 7 अक्तूबर को दिए हलफनामे में विधि मंत्रालय ने बहुविवाह और तीन तलाक को खत्म करने का अनुरोध किया था। मंत्रालय ने कहा था कि इस तरह की परंपरा को धर्म का अनिवार्य और अविभाज्य अंग नहीं माना जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि समय-समय पर सरकारें पर्सनल लॉ में संशोधन करती रही हैं। जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने हिंदू पर्सनल लॉ में व्यापक बदलाव किया था। मनमोहन सिंह की सरकार ने भी अविभाजित हिंदू परिवार में लैंगिक समानता से जुड़े पर्सनल लॉ में संशोधन किया था।
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वित्त मंत्री ने 'तीन तलाक और सरकार का हलफनामा' शीर्षक से लिखे अपने फेसबुक पोस्ट में कहा है कि पूर्व की सरकार समान नागरिक संहिता पर कड़ा रुख अख्तियार करने से बचती रही। उसने कभी भी यह नहीं कहा कि पर्सनल लॉ मौलिक अधिकारों के अनुरूप होने चाहिए। जेटली ने कहा कि मौजूदा सरकार का इस मुद्दे पर रुख स्पष्ट है। जेटली ने कहा कि पर्सनल लॉ संविधान के अनुरूप होने चाहिए। इसके बाद यह देखा जाएगा कि तीन तलाक से समानता और सम्मान के जीने के अधिकार का उल्लंघन न हो। वित्त मंत्री ने कहा कि अन्य पर्सनल लॉ पर भी सरकार का रुख यही रहेगा।
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जेटली ने कहा कि तीन तलाक की संवैधानिक वैधता और समान नागरिक संहिता पूरी तरह अलग हैं और सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ तीन तलाक की संवैधानिक वैधता का मामला है। सुप्रीम कोर्ट में 7 अक्तूबर को दिए हलफनामे में विधि मंत्रालय ने बहुविवाह और तीन तलाक को खत्म करने का अनुरोध किया था। मंत्रालय ने कहा था कि इस तरह की परंपरा को धर्म का अनिवार्य और अविभाज्य अंग नहीं माना जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि समय-समय पर सरकारें पर्सनल लॉ में संशोधन करती रही हैं। जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने हिंदू पर्सनल लॉ में व्यापक बदलाव किया था। मनमोहन सिंह की सरकार ने भी अविभाजित हिंदू परिवार में लैंगिक समानता से जुड़े पर्सनल लॉ में संशोधन किया था।
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