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CCI: प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाया तो वैश्विक कमाई के अनुपात में जुर्माना, गूगल को चेतावनी

Tue, 04 Apr 2023 05:54 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Tue, 04 Apr 2023 05:54 AM IST
सार

लोकसभा में बीते हफ्ते बुधवार और राज्यसभा में सोमवार को पारित इस विधेयक से दुनिया के दूसरे देशों से संचालित ऐसी टेक कंपनियों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी, जो भारत में भी बड़ा कारोबार कर रही हैं।
 

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Penalties proportionate to global earnings if competition is harmed
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अपने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम से हासिल एकाधिकार के दुरुपयोग के मामले में गूगल पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने 1337.76 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, बीते बुधवार राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) ने इसे बरकरार रखा।

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किसी को यह जुर्माना अधिक लगे तो जरा इसकी तुलना यूरोपीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा ऐसे ही मामले में गूगल पर लगाए 412..5 करोड़ यूरो (36.8 हजार करोड़ रुपये) के जुर्माने से करके देखें। 
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इसी फर्क को ध्यान में रखते हुए भारत ने भी अब प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक 2023 के जरिए कई सुधार किए हैं। इनमें सबसे अहम है कि अब सीसीआई भारत में कानून तोड़ने की दोषी किसी वैश्विक कंपनी पर उसके वैश्विक टर्नओवर के आधार पर जुर्माना लगा सकेगा।  
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लोकसभा में बीते हफ्ते बुधवार और राज्यसभा में सोमवार को पारित इस विधेयक से दुनिया के दूसरे देशों से संचालित ऐसी टेक कंपनियों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी, जो भारत में भी बड़ा कारोबार कर रही हैं।

यूरोप में पहले से है प्रावधान
बड़ी टेक कंपनियों पर एकाधिकार और नागरिकों का निजी डाटा जमा कर इनके व्यावसायिक दुरुपयोग का आरोप अक्सर लगता रहा है। यूरोपीय संघ ऐसे ही तीन मामले में गूगल पर सितंबर 2022 तक करीब 825 करोड़ यूरो (73.73 हजार करोड़ रुपये) का जुर्माना लगा चुका है।

दरअसल, यूरोप में ऐसे मामलों में जुर्माने की गणना के लिए कंपनी के वैश्विक कारोबार को आधार बनाया जाता है। इसके तहत कुल वैश्विक सालाना कमाई का 10% तक जुर्माना वसूला जा सकता है। वहीं, अभी तक भारत में ऐसे मामलों में दोषी पाई गई कंपनी पर उसके देश में संबंधित कारोबार से हुई सालाना कमाई के अनुपात में ही जुर्माना लगता रहा है।

ये बदलाव भी आएंगे...विकसित देशों से जुर्माने का फर्क मिटेगा
-तुलनात्मक रूप से सही... सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों की भारत में काम कर रही विदेशी कंपनियों का वैश्विक टर्नओवर अधिक होता है, जबकि इसमें भारतीय हिस्सेदारी कम हो सकती है।
-लेकिन, भारत में मौजूदगी उन्हें वैश्विक स्तर पर बढ़त बनाने में मदद करती है। इसी वजह से नए कानून में वैश्विक टर्नओवर को जुर्माने का आधार बनाना औचित्यपूर्ण माना जा रहा है। इससे विकसित देशों के मुकाबले जुर्माना राशि में फर्क भी खत्म हो सकेगा।

-विलय-अधिग्रहण कम समय में...अभी प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 के तहत विलय व अधिग्रहण प्रभावी होने के लिए सीसीआई को नोटिस देने या सीसीआई का आदेश आने के बाद 210 दिन की समय सीमा है। नये कानून में यह 150 दिन है।

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