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'महाराष्ट्र में सूखे का एलान करें': शरद पवार ने मुख्यमंत्री फडणवीस को लिखा पत्र; किसानों के लिए क्या मांग की?
Fri, 18 Sep 2026 02:05 PM IST
निर्मल कांत
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 18 Sep 2026 02:05 PM IST
सार
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सूखा घोषित करने और किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर और खेत मजदूर परिवारों को 25 हजार रुपये देने की मांग की है। उन्होंने कर्ज माफी और फसल बीमा का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दिया। फडणवीस को पत्र में उन्होंने क्या लिखा, पढ़िए रिपोर्ट।
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शरद पवार
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
विस्तार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सूखे की घोषणा करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जिन तहसीलों में हालात बेहद खराब हैं, वहां सूखा घोषित किया जाए। फसल खराब होने से परेशान किसानों को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की आर्थिक मदद दी जाए।
पत्र में शरद पवार ने क्या-क्या लिखा?
शरद पवार ने बुधवार को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में राज्य में कम बारिश का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के 36 में से 31 जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। कम बारिश से खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। इनमें सोयाबीन, कपास और दालों की फसल शामिल है। बुवाई का क्षेत्र भी काफी घट गया है। इसके साथ ही पीने के पानी और चारे की भी भारी कमी हो गई है।
उन्होंने मांग की कि सरकारी औपचारिकताओं का इंतजार किए बिना सूखा घोषित किया जाए। प्रभावित इलाकों में तुरंत राहत पहुंचाई जाए। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर देने की मांग की। उन्होंने खेत मजदूर परिवारों को भी 25 हजार रुपये प्रति परिवार विशेष मदद देने की मांग की। उन्होंने तुरंत कर्ज माफी योजना लागू करने की मांग की। साथ ही किसानों को नया फसल कर्ज उपलब्ध कराने को कहा।
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कर्ज चुकाने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि की मांग
पवार ने नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की भी मांग की। उन्होंने इसे 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने 2025-26 में फसल कर्ज लिया था, लेकिन इस साल कर्ज नहीं चुका पाए, उन्हें भी कर्ज माफी योजना में शामिल किया जाए।
पवार ने एक रुपये वाली फसल बीमा योजना को पिछली तारीख से लागू करने की भी मांग की। उन्होंने इसमें पहले बाहर रखे गए नुकसान के कारणों को भी शामिल करने को कहा। उन्होंने पिछले साल बेमौसम बारिश से हुए फसल नुकसान के लिए घोषित 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद भी तुरंत देने की मांग की।
रोजगार गारटी योजना के तहत सूखा प्रभावित इलाकों के लिए क्या मांग की?
पवार ने सूखे जैसे हालात वाले इलाकों में रोजगार गारंटी योजना के तहत विशेष काम शुरू करने की मांग की। इनमें खेती और पानी बचाने से जुड़े काम शामिल हों। उन्होंने बागों को बचाने के लिए टैंकरों की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने पीने के पानी की कमी वाले गांवों का तुरंत सर्वे कराने की मांग की। जहां जरूरत हो, वहां सरकारी टैंकर भेजने को कहा।
पवार ने चारा शिविर लगाने की भी मांग की। पशुओं के लिए पीने का पानी और पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध बिजली कटौती वाले इलाकों में खराब बिजली ट्रांसफॉर्मरों की समय पर मरम्मत करना है कराने को कहा।
उन्होंने ऊर्जा विभाग से भी विशेष अभियान चलाने की मांग की। इसका उद्देश्य ज्यादा बिजली कटौती वाले इलाकों में खराब बिजली ट्रांसफॉर्मर्स की समय पर मरम्मत करना है। पवार ने राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाने की भी मांग की। इन नियंत्रण कक्षों से रोजाना बारिश, फसलों और पशुओं की स्थिति पर नजर रखी जाए। पानी की कमी और चारे की उपलब्धता की भी रोज निगरानी की जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सूखे से प्रभावित तहसीलों में छात्रों की शैक्षणिक फीस माफ करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सिर्फ परीक्षा फीस माफ करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्से कम बारिश के कारण गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। किसान भारी परेशानी में हैं। पवार ने कहा कि राज्य के 36 में से 31 जिलों में औसत से काफी कम बारिश हुई है।
महाराष्ट्र में कितनी बारिश हुई?
उन्होंने बताया कि 1 जून से 15 सितंबर के बीच राज्य में 648 मिलीमीटर बारिश हुई। उनके मुताबिक, यह औसत से 19 प्रतिशत कम है। उन्होंने कहा कि मुंबई, रायगढ़, पालघर और विदर्भ सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं। कुछ जिलों में पिछले तीन महीनों में सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
पवार ने बताया कि जून से अगस्त के बीच मराठवाड़ा में सामान्य से 69 प्रतिशत कम बारिश हुई। इसके बाद विदर्भ में 61 प्रतिशत और कोंकण में 33 प्रतिशत कम बारिश हुई। पश्चिमी और उत्तरी महाराष्ट्र के कुछ जिलों में भी बारिश में 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
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पत्र में शरद पवार ने क्या-क्या लिखा?
शरद पवार ने बुधवार को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में राज्य में कम बारिश का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के 36 में से 31 जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। कम बारिश से खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। इनमें सोयाबीन, कपास और दालों की फसल शामिल है। बुवाई का क्षेत्र भी काफी घट गया है। इसके साथ ही पीने के पानी और चारे की भी भारी कमी हो गई है।
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उन्होंने मांग की कि सरकारी औपचारिकताओं का इंतजार किए बिना सूखा घोषित किया जाए। प्रभावित इलाकों में तुरंत राहत पहुंचाई जाए। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर देने की मांग की। उन्होंने खेत मजदूर परिवारों को भी 25 हजार रुपये प्रति परिवार विशेष मदद देने की मांग की। उन्होंने तुरंत कर्ज माफी योजना लागू करने की मांग की। साथ ही किसानों को नया फसल कर्ज उपलब्ध कराने को कहा।
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कर्ज चुकाने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि की मांग
पवार ने नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की भी मांग की। उन्होंने इसे 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने 2025-26 में फसल कर्ज लिया था, लेकिन इस साल कर्ज नहीं चुका पाए, उन्हें भी कर्ज माफी योजना में शामिल किया जाए।
पवार ने एक रुपये वाली फसल बीमा योजना को पिछली तारीख से लागू करने की भी मांग की। उन्होंने इसमें पहले बाहर रखे गए नुकसान के कारणों को भी शामिल करने को कहा। उन्होंने पिछले साल बेमौसम बारिश से हुए फसल नुकसान के लिए घोषित 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद भी तुरंत देने की मांग की।
रोजगार गारटी योजना के तहत सूखा प्रभावित इलाकों के लिए क्या मांग की?
पवार ने सूखे जैसे हालात वाले इलाकों में रोजगार गारंटी योजना के तहत विशेष काम शुरू करने की मांग की। इनमें खेती और पानी बचाने से जुड़े काम शामिल हों। उन्होंने बागों को बचाने के लिए टैंकरों की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने पीने के पानी की कमी वाले गांवों का तुरंत सर्वे कराने की मांग की। जहां जरूरत हो, वहां सरकारी टैंकर भेजने को कहा।
पवार ने चारा शिविर लगाने की भी मांग की। पशुओं के लिए पीने का पानी और पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध बिजली कटौती वाले इलाकों में खराब बिजली ट्रांसफॉर्मरों की समय पर मरम्मत करना है कराने को कहा।
उन्होंने ऊर्जा विभाग से भी विशेष अभियान चलाने की मांग की। इसका उद्देश्य ज्यादा बिजली कटौती वाले इलाकों में खराब बिजली ट्रांसफॉर्मर्स की समय पर मरम्मत करना है। पवार ने राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाने की भी मांग की। इन नियंत्रण कक्षों से रोजाना बारिश, फसलों और पशुओं की स्थिति पर नजर रखी जाए। पानी की कमी और चारे की उपलब्धता की भी रोज निगरानी की जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सूखे से प्रभावित तहसीलों में छात्रों की शैक्षणिक फीस माफ करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सिर्फ परीक्षा फीस माफ करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्से कम बारिश के कारण गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। किसान भारी परेशानी में हैं। पवार ने कहा कि राज्य के 36 में से 31 जिलों में औसत से काफी कम बारिश हुई है।
महाराष्ट्र में कितनी बारिश हुई?
उन्होंने बताया कि 1 जून से 15 सितंबर के बीच राज्य में 648 मिलीमीटर बारिश हुई। उनके मुताबिक, यह औसत से 19 प्रतिशत कम है। उन्होंने कहा कि मुंबई, रायगढ़, पालघर और विदर्भ सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं। कुछ जिलों में पिछले तीन महीनों में सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
पवार ने बताया कि जून से अगस्त के बीच मराठवाड़ा में सामान्य से 69 प्रतिशत कम बारिश हुई। इसके बाद विदर्भ में 61 प्रतिशत और कोंकण में 33 प्रतिशत कम बारिश हुई। पश्चिमी और उत्तरी महाराष्ट्र के कुछ जिलों में भी बारिश में 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।