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चिंताजनक : लक्षण न दिक्कत, फिर भी निकले टीबी के मरीज; आबादी में सक्रिय मामले की खोज में खुलासा
Sat, 29 Jun 2024 04:38 AM IST
शिव शरण शुक्ला
परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 29 Jun 2024 04:38 AM IST
सार
अहमदाबाद स्थित आईसीएमआर के राष्ट्रीय व्यावसायिक स्वास्थ्य संस्थान के शोधकर्ताओं ने एसीएफ के माध्यम से आबादी के बीच जाकर 1,638 टीबी मरीजों की पहचान की। इनमें कोई लक्षण नहीं थे।
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टीबी
- फोटो : ani
विस्तार
आबादी क्षेत्रों में अस्पतालों से डेढ़ गुना टीबी संक्रमण से ग्रस्त मरीज पाए गए। इन्हें न कोई दिक्कत थी और न कोई लक्षण नजर आ रहे थे। भारतीय शोधकर्ताओं ने गुजरात में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) यानी सक्रिय मामले की खोज अभियान के तहत संक्रमण के वैज्ञानिक प्रभावों को जानने के लिए आबादी में जाकर टीबी की जांच में ये चौकाने वाले खुलासे हुए।
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अब केंद्र सरकार ने शोध के प्रभाव और बिना लक्षण वाले मरीजों में बीमारी की गंभीरता को देखते हुए सभी राज्यों से गुजरात की तर्ज पर आबादी के बीच जाकर लोगों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। जानकारी मिली है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से लिखा है कि अगर हमारी स्वास्थ्य टीमें अस्पतालों से बाहर निकल आबादी के बीच जाकर टीबी की जांच करती हैं तो ज्यादा बेहतर तरीके से टीबी के खिलाफ लड़ाई जीत सकते हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में भारत को 2025 तक टीबी से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया, जिसे अब तीसरे कार्यकाल के शुरुआती दिनों में आगे बढ़ाने का काम शुरू हुआ है।
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आबादी में बिना लक्षण वाले 1,600 मामले मिले
अहमदाबाद स्थित आईसीएमआर के राष्ट्रीय व्यावसायिक स्वास्थ्य संस्थान के शोधकर्ताओं ने एसीएफ के माध्यम से आबादी के बीच जाकर 1,638 टीबी मरीजों की पहचान की। इनमें कोई लक्षण नहीं थे। इसी दौरान निष्क्रिय केस फाइंडिंग यानी पीसीएफ से 80,957 मरीजों में संक्रमण का पता चला। पीसीएफ का मतलब उन रोगियों से है जिन्हें अपने लक्षणों के बारे में पता होता है या फिर अस्पताल में जाकर जांच में बीमारी पता चलती है।
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शोधकर्ताओं ने बताया कि हमारे विश्लेषण से पता चला कि पीसीएफ से पहचाने गए रोगियों की तुलना में एसीएफ से निदान किए गए रोगियों में सफल उपचार परिणामों की संभावना 1.4 गुना अधिक है।
80% कमी आने पर ही टीबी मुक्ति की घोषणा
टीबी से मृत्युदर 18 फीसदी घटी : राज्यों को दिए निर्देश में केंद्र सरकार ने कहा है कि 2015 से 2022 के बीच टीबी के नए मामलों में 16% की कमी आई है, जो वैश्विक स्तर पर लगभग दोगुनी (8.7%) है। इसी बीच टीबी से मरने वाले मामलों में 18% की कमी आई है।
एक अधिकारी ने बताया कि नए मामलों में 80% की कमी आने पर ही किसी जिले को टीबी मुक्त घोषित किया जा सकता है। अब तक 103 जिलों में यह कमी 20 से 80% के बीच दर्ज की गई। अकेले कर्नाटक में 40% और जम्मू और कश्मीर में 20% की कमी आई है।