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संसद सत्र: 'जन औषधि केंद्रों से दवाइयां खरीदकर मरीजों ने बचाए 28000 करोड़', स्वास्थ्य मंत्री ने दी जान
Fri, 02 Aug 2024 03:20 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 02 Aug 2024 03:20 PM IST
सार
संसद में प्रश्नकाल के दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि जनऔषधि केंद्रों पर कीमतों में कमी के कारम मरीज अबतक 28,000 करोड़ रुपये बचाने में सफल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि इलाज के लिए सस्ती दवाएं और विश्वसनीय प्रत्यारोपण (अमृत) योजना के तहत मरीज 24,273 करोड़ रुपये बचा सकते हैं।
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- फोटो : एएनआई
विस्तार
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत कम कीमतों पर बेची जाने वाली दवाओं और चिकित्सा उपकरणों से लोगों को अब तक 28,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत करने में मदद मिली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रील जेपी नड्डा ने लोकसभा में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देशभर में जन औधषि केंद्रों के माध्यम से 1,965 दवाएं और 235 चिकित्सा उपकरण बेचे जाते हैं। यह केंद्रों पर 52 से 80 फीसदी कम कमत पर उपलब्ध हैं।
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संसद में प्रश्नकाल के दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि जनऔषधि केंद्रों पर कीमतों में कमी के कारम मरीज अबतक 28,000 करोड़ रुपये बचाने में सफल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि इलाज के लिए सस्ती दवाएं और विश्वसनीय प्रत्यारोपण (अमृत) योजना के तहत मरीज 24,273 करोड़ रुपये बचा सकते हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना फार्माक्यूटिकल्स विभाग द्वारा जन औषधि केंद्र नामक दुकानों में गरीबों और वंचितों को कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई एक योजना है। इस योजना का एकमात्र उद्देश्य कम कीमतों पर दवाएं उपलब्ध करके प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य देखभाल बजट को कम करना है।
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जेपी नड्डा ने बताया कि अगस्त 2022 से कुल 3,029 ट्रांसजेंडर को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत शामिल किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि ट्रांसजेंडर को राष्ट्रीय स्वस्थ्य बीमा योजना का लाभ देने के लिए राष्ट्री. स्वास्थ्य प्राधिकरण और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के बीच एक समझैता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। जेपी नड्डा ने बताया कि लाभार्थियों को स्वास्थ्य लाभ पैकेज 2022 के अनुसार कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं।
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देश के हर कोने में पहुंचाएंगे विश्वस्तरीय इलाज
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य देश के हर कोने में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक देश को 17 नए एम्स की सौगात दी है।
नड्डा ने कहा, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को लेकर हमारा विजन है कि देश के दूर-दराज के लोगों को इलाज के लिए दिल्ली न आना पड़े। दिल्ली एम्स में जैसी चिकित्सा सेवा की जाती है, वह देश के हर कोने में लोगों को मिले। पीएम मोदी ने दुनिया के सबसे बेहतरीन तृतीयक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के साथ देश के हर क्षेत्र में 17 से ज्यादा एम्स खोलने की कोशिश की है। इसे दुनिया की सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के साथ बनाया जाएगा। 1950 के दशक में देश में पहला एम्स बनाया गया, लेकिन एम्स को पहचान 1960 व 1970 के दशक में मिली। इस तरह के संस्थान एक दिन में नहीं बनते। प्रत्येक एम्स की इमारत की कीमत ही करीब 2000 करोड़ रुपये तक है। एम्स खोलना आसान नहीं है। इसके मानक जिला अस्पतालों से काफी अलग हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टर निजी प्रैक्टिस भी करते हैं। लेकिन, एम्स के डॉक्टर चौबीसों घंटे कैंपस में मरीजों की सेवा करते हैं। इसके अलावा एम्स में प्रति मरीज खर्च की राशि भी बहुत अलग होती है।
आईसीएमआर और एनआईवी को मिला कोवैक्सीन का श्रेय
नड्डा ने बताया कि भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन के पेटेंट आवेदन में आईसीएमआर और एनआईवी का सह-आविष्कारक के रूप में उल्लेख नहीं किया था। हालांकि, सरकार की तरफ से आपत्ति उठाए जाने के बाद आवेदन को सही कर दिया गया। तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने पूछा था कि पेटेंट आवेदन में आईसीएमआर व एनआईवी का नाम नहीं बताने पर सरकार ने कंपनी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई की है।