Parliament: 'दोगुनी हो गई किसानों की आय', लोकसभा में सरकार के जवाब पर हंगामा; विपक्ष ने पूछे तीखे सवाल
लोकसभा में किसानों की आय को लेकर सरकार और विपक्ष में तीखी बहस हुई। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि किसानों की आय दोगुनी हुई है, जबकि विपक्ष ने इसे गलत बताया। सरकार की तरफ से एमएसपी, सब्सिडी और योजनाओं का हवाला दिया गया। उनका कहना था कि इन सभी प्रयासों का सीधा फायदा किसानों को मिला है।
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लोकसभा में मंगलवार को किसानों की आय को लेकर गर्म बहस हुई, जिसने संसद का माहौल पूरी तरह हिला दिया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार के प्रयासों से किसानों की आय दोगुनी हो गई है और कई क्षेत्रों में यह तीन से चार गुना तक बढ़ी है। प्रश्नकाल के दौरान मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने खेती के क्षेत्र में कई कदम उठाए हैं। इसमें फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देना, उर्वरक (खाद) पर सब्सिडी देना और उत्पादन बढ़ाने के लिए नई योजनाएं लागू करना शामिल है।
उनका कहना था कि इन सभी प्रयासों का सीधा फायदा किसानों को मिला है। चौहान के इस बयान के बाद विपक्ष ने इसका जोरदार विरोध किया और कहा कि किसानों की हालत अभी भी चुनौतियों भरी है और सरकार अपने वादों को पूरा नहीं कर पाई है। अपने जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हमेशा किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कृषि उत्पादन में 44 प्रतिशत की वृद्धि- चौहान
उन्होंने बताया कि एनडीए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एसएसपी) पर रिकॉर्ड खरीदी की है और पीएम‑आशा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, भावांतर भुगतान और मार्केट इंटरवेंशन स्कीम जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय को मजबूत सुरक्षा कवच दिया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीते वर्षों में कृषि उत्पादन में लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और किसानों की उत्पादकता तथा आमदनी बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया।
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पिछली सरकारों पर भी साधा निशाना
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पिछली सरकारें एमएसपी लागू करने में सिर्फ बहाने बनाती रही, जबकि नरेंद्र मोदी की सरकार ने लागत पर 50 प्रतिशत लाभ को ध्यान में रखकर एमएसपी लागू किया और वास्तविक खरीदी सुनिश्चित की। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल एमएसपी घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे वास्तविक खरीदी में बदलना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकार गेहूं, धान, दलहन, तिलहन और फल-सब्जियों की कीमतें बनाए रखने के लिए सक्रिय हस्तक्षेप करती है। पीएम‑आशा योजना के तहत कीमत अंतर भुगतान और अन्य माध्यमों से किसानों को संरक्षण दिया जाता है।
महाराष्ट्र की प्राकृतिक आपदाओं का दिया हवाला
इसके साथ ही महाराष्ट्र में हाल की प्राकृतिक आपदाओं का हवाला देते हुए चौहान ने बताया कि केवल पांच दिनों में 14,000 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में भेजे गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बीमा कवरेज और मुआवज़ा मिलता है, चाहे नुकसान किसी भी किसान की फसल का हो। शिवराज सिंह चौहान ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के जरिए जल्दी खराब होने वाले फल और सब्ज़ियों के लिए मॉडल रेट तय करने और अंतर राशि किसानों के खातों में जमा कराने की व्यवस्था की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परिवहन लागत भी वहन करती है ताकि किसान दूर की मंडियों में बेहतर दाम पा सके।
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किसानों ने लगभग 36,055 करोड़ रुपये का प्रीमियम जमा किया- चौहान
कृषि मंत्री ने बताया कि फसल बीमा योजना में सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग और ग्राम स्तर पर चार-चार फसल कटिंग प्रयोग किए जाते हैं, जिससे बीमा दावों का भुगतान निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार पर होता है। एनडीए सरकार के कार्यकाल में किसानों ने लगभग 36,055 करोड़ रुपये का प्रीमियम जमा किया, जबकि 1,92,477 करोड़ रुपये की बीमा राशि किसानों के खातों में पहुंचाई गई। शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि ये केवल कागजी योजनाएं नहीं हैं बल्कि जमीन पर लागू ठोस कदम हैं। पीएम मोदी की सरकार हर संकट में किसान के साथ खड़ी है और किसानों को उनके पसीने का पूरा मूल्य दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
टीएमसी सांसद ने जताया विरोध
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद सौगत रॉय ने कड़ा विरोध जताते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरा नहीं कर पाई है। दूसरी ओर वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी इस मुद्दे पर लगातार सवाल पूछे।
सहकारिता मंत्री ने क्या कहा?
इसके साथ ही सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल ने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि सरकार सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में इस क्षेत्र के विकास के लिए 5 लाख करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। सरकार के जवाब और विपक्ष के विरोध के बीच सदन में थोड़ी बहस की स्थिति बन गई, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सांसदों से शांत रहने और छोटे सवाल व संक्षिप्त जवाब देने की अपील की।
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