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Raghav Chadha: निलंबन खत्म होने पर सभापति ने नैतिकता का पाठ पढ़ाया; आभार जताते हुए AAP सांसद ने कही यह बात
Mon, 04 Dec 2023 08:22 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 04 Dec 2023 08:22 PM IST
सार
मॉनसून सत्र के दौरान संसद में अशोभनीय आचरण के लिए राज्यसभा से निलंबित आम आदमी पार्टी (AAP) सांसद राघव चड्ढा शीतकालीन सत्र के पहले दिन कार्यवाही में शामिल होने पहुंचे। सभापति जगदीप धनखड़ ने इस मौके पर नैतिकता का पाठ पढ़ाया।
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राज्यसभा से निलंबन रद्द, सदन में आप सांसद के लौटने पर सभापति ने नैतिकता की अहमियत बताई
- फोटो : social media
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विस्तार
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा का निलंबन समाप्त हो गया है। शीतकालीन सत्र की शुरुआत होने से पहले राज्यसभा के सभापति ने राघव को सदन की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दे दी। निलंबन मामले का जिक्र करते हुए सभापति धनखड़ ने सार्वजनिक जीवन में नैतिकता के महत्व को रेखांकित किया
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को सार्वजनिक जीवन में नैतिकता की अहमियत बताते हुए कहा, दूसरे लोग आचरण का अनुकरण करते हैं ऐसे में व्यवहार काफी अहम होते हैं। बता दें कि आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्य राघव चड्ढा को राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने मीडिया के सामने भ्रामक तथ्य पेश करने का दोषी पाया था। हालांकि, सोमवार को एक प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद उनका निलंबन समाप्त हो गया। सभापति ने राघव को सदन की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दे दी।
सभापति ने कहा, "उच्च सदन के सदस्यों को ऐसा आचरण दिखाना होगा जिसका दूसर लोग स्पष्ट अनुकरण करें।" उन्होंने कहा कि सांसदों के आचरण के परिप्रेक्ष्य में ही उन्होंने अपील की थी। सभापति ने कहा, सभी लोगों को राघव चड्ढा के संबंध में राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए।"
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बता दें कि समिति ने चड्ढा को प्रस्तावित चयन पैनल में सदस्यों की सहमति के बिना उनके नाम जोड़ने का भी दोषी ठहराया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरफ से जीवीएल नरसिम्हा राव ने राघव के निलंबन को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया। ध्वनि मत से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि मॉनसून सत्र के बाद अब तक का निलंबन चड्ढा के लिए "पर्याप्त सजा" है।
अपनी टिप्पणी में सभापति धनखड़ ने कहा, मुझे उस युवक (राघव चड्ढा) को देखने का अवसर मिला। पश्चाताप होना चाहिए था, चिंतन होना चाहिए था, यह वह दिन था जब एक बहुत विस्तृत रिपोर्ट में उसे दोनों मामलों में दोषी ठहराया गया था। उनका निलंबन समाप्त नहीं हुआ है, सजा आज तक ही सीमित थी। उन्होंने कहा, यह एक ऐसा मामला था जहां सदन के एक सदस्य को दोषी ठहराया गया और दंडित किया गया।
सभापति धनखड़ ने कहा, मैं सभी सांसदों से उम्मीदों पर खरे उतरने का आग्रह करूंगा। उन्होंने कहा, एक सांसद के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नैतिकता बेहद अहम है। उन्होंने सदस्यों से करीब 24 साल पहले (1999 में) राज्यसभा में पेश की गई पहली आचार समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों को पढ़ने की अपील भी की। सभापति ने कहा, हमारे लिए एक आचार संहिता निर्धारित की गई थी। इसमें दो महत्वपूर्ण तत्व हैं। सदस्यों को ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे संसद की बदनामी हो और उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हो।
धनखड़ ने सदस्यों से सार्वजनिक जीवन में नैतिकता, गरिमा, शालीनता और मूल्यों के उच्च मानकों को बनाए रखने की उम्मीद को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सभापति के रूप में वह विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट की पुरजोर अनुशंसा करते हैं।
बता दें कि विशेषाधिकार हनन के आरोप में चड्ढा को विगत 11 अगस्त को संसद के मानसून सत्र के दौरान निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद आप नेता ने निलंबन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सोमवार को सदन में वापस आने की अनुमति मिलने के बाद चड्ढा ने सुप्रीम कोर्ट और राज्यसभा के सभापति को धन्यवाद दिया।
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राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को सार्वजनिक जीवन में नैतिकता की अहमियत बताते हुए कहा, दूसरे लोग आचरण का अनुकरण करते हैं ऐसे में व्यवहार काफी अहम होते हैं। बता दें कि आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्य राघव चड्ढा को राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने मीडिया के सामने भ्रामक तथ्य पेश करने का दोषी पाया था। हालांकि, सोमवार को एक प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद उनका निलंबन समाप्त हो गया। सभापति ने राघव को सदन की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दे दी।
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सभापति ने कहा, "उच्च सदन के सदस्यों को ऐसा आचरण दिखाना होगा जिसका दूसर लोग स्पष्ट अनुकरण करें।" उन्होंने कहा कि सांसदों के आचरण के परिप्रेक्ष्य में ही उन्होंने अपील की थी। सभापति ने कहा, सभी लोगों को राघव चड्ढा के संबंध में राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए।"
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बता दें कि समिति ने चड्ढा को प्रस्तावित चयन पैनल में सदस्यों की सहमति के बिना उनके नाम जोड़ने का भी दोषी ठहराया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरफ से जीवीएल नरसिम्हा राव ने राघव के निलंबन को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया। ध्वनि मत से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि मॉनसून सत्र के बाद अब तक का निलंबन चड्ढा के लिए "पर्याप्त सजा" है।
अपनी टिप्पणी में सभापति धनखड़ ने कहा, मुझे उस युवक (राघव चड्ढा) को देखने का अवसर मिला। पश्चाताप होना चाहिए था, चिंतन होना चाहिए था, यह वह दिन था जब एक बहुत विस्तृत रिपोर्ट में उसे दोनों मामलों में दोषी ठहराया गया था। उनका निलंबन समाप्त नहीं हुआ है, सजा आज तक ही सीमित थी। उन्होंने कहा, यह एक ऐसा मामला था जहां सदन के एक सदस्य को दोषी ठहराया गया और दंडित किया गया।
सभापति धनखड़ ने कहा, मैं सभी सांसदों से उम्मीदों पर खरे उतरने का आग्रह करूंगा। उन्होंने कहा, एक सांसद के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नैतिकता बेहद अहम है। उन्होंने सदस्यों से करीब 24 साल पहले (1999 में) राज्यसभा में पेश की गई पहली आचार समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों को पढ़ने की अपील भी की। सभापति ने कहा, हमारे लिए एक आचार संहिता निर्धारित की गई थी। इसमें दो महत्वपूर्ण तत्व हैं। सदस्यों को ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे संसद की बदनामी हो और उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हो।
धनखड़ ने सदस्यों से सार्वजनिक जीवन में नैतिकता, गरिमा, शालीनता और मूल्यों के उच्च मानकों को बनाए रखने की उम्मीद को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सभापति के रूप में वह विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट की पुरजोर अनुशंसा करते हैं।
बता दें कि विशेषाधिकार हनन के आरोप में चड्ढा को विगत 11 अगस्त को संसद के मानसून सत्र के दौरान निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद आप नेता ने निलंबन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सोमवार को सदन में वापस आने की अनुमति मिलने के बाद चड्ढा ने सुप्रीम कोर्ट और राज्यसभा के सभापति को धन्यवाद दिया।