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Monsoon Session: देशभर में 3.25 लाख से ज्यादा बाल यौन शोषण मामलों का निपटारा, केंद्र सरकार ने जारी किया डाटा

Fri, 01 Aug 2025 04:40 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 01 Aug 2025 04:40 PM IST
सार

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि देश की 746 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों ने अब तक 3.25 लाख से अधिक बाल यौन शोषण और बलात्कार के मामलों का निपटारा किया है। इनमें 405 अदालतें विशेष रूप से पोक्सो मामलों के लिए हैं। उत्तर प्रदेश ने सबसे अधिक 90,000 मामलों को निपटाया गया।

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महिला और बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि फास्ट ट्रैक से कितने मामले निपटाए गए। - फोटो : ANI

विस्तार

देश में बच्चों के यौन शोषण और रेप जैसे गंभीर मामलों में तेज़ न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों ने अब तक 3.25 लाख से ज़्यादा मामलों का निपटारा किया है। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने शुक्रवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। इस उपलब्धि को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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मंत्रालय के अनुसार, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 746 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें (FTSCs) काम कर रही हैं। इनमें से 405 अदालतें सिर्फ पॉक्सो कानून (POCSO Act) से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही हैं। इन अदालतों ने 30 अप्रैल 2025 तक 3.25 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है। इसका उद्देश्य बच्चों को जल्द से जल्द न्याय दिलाना है।
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उत्तर प्रदेश सबसे आगे, मध्यप्रदेश भी सूची में
राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां करीब 90,000 मामलों का निपटारा किया गया है। इसके बाद मध्यप्रदेश में 31,000 और केरल में 25,000 से ज़्यादा मामलों का निपटारा हुआ है। यह आंकड़े महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सवित्री ठाकुर ने लोकसभा में दिए।
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महिलाओं की सुरक्षा के लिए और भी कदम
सवित्री ठाकुर ने बताया कि देशभर में 14,658 महिला सहायता डेस्क (WHD) स्थापित की गई हैं, जिनमें से 13,743 महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा संचालित की जा रही हैं। यह पुलिस स्टेशन को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने का प्रयास है। इसके अलावा 'सक्षम आंगनवाड़ी' योजना के तहत 2 लाख आंगनवाड़ियों को उन्नत किया जा रहा है, ताकि पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाई जा सके। मंत्रालय ने यह भी बताया कि देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS-112) लागू किया गया है। इसके ज़रिए अब तक 43 करोड़ से ज़्यादा कॉल्स रिसीव हो चुकी हैं। इसके अलावा महिला हेल्पलाइन नंबर 181 को भी ERSS से जोड़ा गया है और अब तक 2.10 करोड़ कॉल्स के ज़रिए 84.43 लाख महिलाओं की मदद की गई है।


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रेलवे स्थायी समिति ने की सिफारिश
संसद की रेलवे स्थायी समिति ने वरिष्ठ नागरिकों को रेल यात्रा में फिर से रियायत देने की सिफारिश की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि समिति ने कम से कम स्लीपर और थर्ड एसी क्लास में रियायतों की समीक्षा और पुनर्स्थापन पर विचार करने की सलाह दी है।

सीनियर सिटिजन्स को फिर मिल सकती है रेलवे में छूट
रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे सभी यात्रियों को सस्ती सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। साल 2023-24 में यात्री किराये पर 60,466 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई, जो औसतन 45 प्रतिशत की रियायत के बराबर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विकलांगजन, मरीजों और छात्रों की कई श्रेणियों को अतिरिक्त रियायतें दी जा रही हैं। वरिष्ठ नागरिकों को फिर से छूट देने पर विचार चल रहा है, खासकर स्लीपर और थर्ड एसी क्लास में।
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