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मानसून सत्र: महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लाने की तैयारी में केंद्र, किन मामलों पर हो सकता है हंगामा?
Sun, 05 Jul 2026 03:27 AM IST
Devesh Tripathi
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 05 Jul 2026 03:27 AM IST
सार
20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयक पेश करने और लंबित प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। प्रमुख एजेंडे में संविधान संशोधन, महिला आरक्षण, परिसीमन, एफसीआरए संशोधन और उच्च शिक्षा से जुड़े सुधार शामिल हैं। विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक के जरिए उच्च शिक्षा नियामक संस्थाओं के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी आगे बढ़ाया जाएगा।
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संसद का मानसून सत्र कब से होगा शुरू?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
विस्तार
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जो 13 अगस्त तक चलेगा। सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें 130वां संविधान संशोधन विधेयक, महिला आरक्षण लागू करने से जुड़ा विधेयक, परिसीमन विधेयक व विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन से संबंधित विधेयक शामिल हैं।
सरकार पहले से लंबित कई विधेयकों को भी पारित कराने की कोशिश करेगी। जबकि विपक्ष राजनीतिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है। इसके अलावा राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला भी विपक्ष जोर-शोर से उठा सकता है। प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक में यह प्रावधान शामिल है कि अगर किसी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को भ्रष्टाचार सहित कुछ गंभीर मामलों में गिरफ्तार किया जाता है और वह 30 दिन या उससे अधिक समय तक हिरासत में रहता है तो उसे खुद पद छोड़ना होगा।
वहीं, महिला आरक्षण विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव है। विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन कर रहा है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने का विरोध करता है। विपक्ष का तर्क है कि परिसीमन लागू होने से दक्षिण भारत के राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। पिछले सत्र में आरक्षण से जुड़ा परिसीमन विधेयक सरकार संसद से पास कराने में विफल रही थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर लिखा, 25 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल 19 बैठकें होंगी।
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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक दोबारा होगा पेश
संसद के मानसून सत्र में यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई को विलय करने वाला विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक (वीबीएसए) दोबारा पेश होगा। भाजपा सांसद डी. पुरंदेश्वरी की अध्यक्षता में संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति की 7 और 8 जुलाई को बैठक होनी है। इसमें विधेयक के जिन बिंदुओं पर विपक्ष को आपत्ति है, उस पर बदलाव पर बात होगी।
शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी संयुक्त समिति को उनकी आपत्तियों पर जवाब देंगे। लोकसभा से विधेयक पास होने के बाद राज्यसभा में रखा जाएगा। उम्मीद है इस साल यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई के विलय के बाद नियमित, मुक्त और दूरस्थ शिक्षा के अलावा ऑनलाइन शिक्षा के नियमों में भी बदलाव होगा। विधेयक पास होने के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों की मनमानी फीस का मुद्दा भी खत्म हो सकता है।
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सरकार पहले से लंबित कई विधेयकों को भी पारित कराने की कोशिश करेगी। जबकि विपक्ष राजनीतिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है। इसके अलावा राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला भी विपक्ष जोर-शोर से उठा सकता है। प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक में यह प्रावधान शामिल है कि अगर किसी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को भ्रष्टाचार सहित कुछ गंभीर मामलों में गिरफ्तार किया जाता है और वह 30 दिन या उससे अधिक समय तक हिरासत में रहता है तो उसे खुद पद छोड़ना होगा।
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वहीं, महिला आरक्षण विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव है। विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन कर रहा है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने का विरोध करता है। विपक्ष का तर्क है कि परिसीमन लागू होने से दक्षिण भारत के राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। पिछले सत्र में आरक्षण से जुड़ा परिसीमन विधेयक सरकार संसद से पास कराने में विफल रही थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर लिखा, 25 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल 19 बैठकें होंगी।
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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक दोबारा होगा पेश
संसद के मानसून सत्र में यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई को विलय करने वाला विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक (वीबीएसए) दोबारा पेश होगा। भाजपा सांसद डी. पुरंदेश्वरी की अध्यक्षता में संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति की 7 और 8 जुलाई को बैठक होनी है। इसमें विधेयक के जिन बिंदुओं पर विपक्ष को आपत्ति है, उस पर बदलाव पर बात होगी।
शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी संयुक्त समिति को उनकी आपत्तियों पर जवाब देंगे। लोकसभा से विधेयक पास होने के बाद राज्यसभा में रखा जाएगा। उम्मीद है इस साल यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई के विलय के बाद नियमित, मुक्त और दूरस्थ शिक्षा के अलावा ऑनलाइन शिक्षा के नियमों में भी बदलाव होगा। विधेयक पास होने के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों की मनमानी फीस का मुद्दा भी खत्म हो सकता है।