संसद डायरी: संसदीय पैनल ने खदानों के चालू होने में देरी पर जताई चिंता, केंद्र सरकार से की अपील
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समिति ने कहा कि खदानों में काम शुरू करने की रेगुलेशन क्लीयरेंस की प्रक्रिया बहुत लंबी है। जिससे खदान की नीलामी से लेकर खदान में काम शुरू करने के बीच लंबा वक्त लगता है। सरकार को इसमें दखल देने की जरूरत है। ये सुझाव कोयला, खदान और स्टील मामलों की संसदीय समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में दिए हैं। कहा गया है कि खदानों के संचालन में देरी पर पेनल्टी लगनी चाहिए और उत्पादन में तेजी लाने के उपायों पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि समिति ने ये भी माना कि साल 2015 से 2023 के बीच नीतियों में कई सुधार किए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2015 से अब तक 486 खनिज ब्लॉक की नीलामी हुई है, जिनमें से 462 की नीलामी राज्यों ने और 24 की केंद्र सरकार ने की है।
राज्यसभा में उठा रेलवे क्रॉसिंग पर जाम की समस्या का मुद्दा
झामुमो की सांसद महुआ माझी ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को लेकर चिंता जाहिर की। इस योजना का उद्देश्य गर्भावस्था के खतरों और गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की मौतों की संख्या को कम करना है। झामुमो सांसद ने कहा कि कई राज्यों को इस योजना के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टर और अन्य सुविधाएं मिली हैं, लेकिन झारखंड जैसे राज्य अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। सांसद ने केंद्र से योजना के तहत संसाधनों के समान वितरण की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मातृत्व की सुरक्षा किसी राज्य या पार्टी की चिंता नहीं है ब्लकि यह संविधान के तहत मिला सामाजिक न्याय का सवाल है।
पीएम और मुख्यमंत्रियों को हटाने वाले विधेयकों पर संसदीय समिति को समय बढ़ा
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने से जुड़े विधेयकों की जांच कर रही संसदीय समिति को अपनी रिपोर्ट देने के लिए और समय मिल गया है। गुरुवार को लोकसभा में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने लोकसभा में प्रस्ताव रखा कि समिति को बजट सत्र 2026 के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक रिपोर्ट सौंपने की अनुमति दी जाए। यह प्रस्ताव ध्वनिमत से पास हो गया। आमतौर पर बजट सत्र अप्रैल के पहले सप्ताह में समाप्त होता है। समिति का मौजूदा कार्यकाल जल्द खत्म होने वाला था, जबकि अब तक उसकी सिर्फ एक ही बैठक हो पाई है।
यह संयुक्त समिति संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही है। इस महीने की शुरुआत में समिति ने उन राजनीतिक दलों को भी आमंत्रित करने का फैसला किया था, जिन्होंने अब तक बैठकों का बहिष्कार किया है। कई विपक्षी दलों का कहना है कि ये विधेयक दोष सिद्ध होने तक निर्दोष माने जाने के कानूनी सिद्धांत के खिलाफ हैं। उनका आरोप है कि गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के बाद अगर एक महीने के भीतर जमानत नहीं मिलती, तो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को अपने आप पद से हटा दिया जाएगा, जो गलत है।