सोचिए! संसद की कैंटीन में महिला सांसद को खाना खाने के बाद कितना दर्द हुआ
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देश की नौकरशाही और पीडब्ल्यूडी की इंजीनियरिंग दोनों कमाल की हैं। इस बात को महाराष्ट्र की एक महिला सांसद के दर्द से समझा जा सकता है। मामला कुछ ऐसा था कि उन्होंने संसद की वीवीआईपी (सांसद) कैंटीन हाल में खाना खाया। खाना स्वादिष्ट था, पसंद आया। हाथ-मुंह धोने वॉश बेसिन की तरफ गई तो सारे मिजाज की हवा निकल गई। वॉश बेसिन की ओर हाथ ले जाते वक्त उन्हें एक सांसद जी लघुशंका करते दिखाई दिए। इसमें सांसद जी का भी कोई दोष नहीं है, क्योंकि इंजीनियरों ने हॉल में लगे वॉश बेसिन से ही सटाकर आम लघुशंका समाधान का इंतजाम कर रखा है।
स्वाभाविक था महिला सांसद का भड़कना
सांसद महोदया फनफनाती हुई आईं और कैंटीन मैनेजर पर ही बिफर पड़ी। उन्होंने कैंटीन में हाथ धोने के स्थान पर लघुशंका समाधान का इंतजाम किए जाने पर घोर आपत्ति जताई। सांसद महोदया ने खाने में जितना स्वाद लिया था, अब उतनी ही कोफ्त से भरी दिखाई दे रहीं थीं। उनका गुस्सा भी जायज है, लेकिन कैंटीन के प्रबंधक भी लाचार दिखे। क्या कर सकते थे? वेटर से लेकर इंस्पेक्टर तक ने बेबसी के हाथ जोड़कर अपनी जान छुड़ा ली। कैंटीन का स्टाफ मानता तो है कि यह बदइंतजामी है, लेकिन उसके पास इसे ठीक करने का कोई रास्ता भी नहीं है। बताते हैं कि पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों से इसकी शिकायत करे तो कौन? वह आगे नई समस्या खड़ी कर देंगे, लिहाजा सब चुप हैं।
एक बार टूट चुका है लघुशंका समाधान का प्रबंध
संसद की मुख्य वीवीआईपी कैंटीन में वॉश बेसिन के पास पहले एक बार लघुशंका समाधान का प्रबंध हुआ था। इस पर कैंटीन के ही एक पुराने वेटर ने गुस्सा जाहिर किया था। उसने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर के सामने इसे बनाने पर सवाल उठा दिया था। वेटर का कहना था कि कैंटीन में खाना खाने के लिए बने हॉल से लगाकर वॉश बेसिन के पास इस तरह से इसे बनाया जाना ठीक नहीं है। सांसद आपत्ति करेंगे। बताते हैं तब उसे तोड़ दिया गया था। इसके बाद फिर इस तरह की संरचना को बिना विभाजित किए और निजता का ख्याल रखे बिना बना दिया गया।
दो महीने पहले ही सज-धज कर तैयार हुई कैंटीन
संसद में सांसदों की वीवीआईपी कैंटीन काफी पुरानी है। इसमें इंदिरा गांधी, लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी को भोजन, नाश्ता देने वाला स्टाफ अभी भी है। बताते हैं देश में लोकसभा चुनाव 2019 चल रहा था उसी दौरान इसे रंग-रोगन करके सजाया जा रहा था। मकसद था नई सरकार और लोकसभा सांसदों की अच्छी आव भगत हो सके। नये पर्दे भी लगे। पुरानी टाइलें हटाकर वुड फ्लोरिंग की गई साथ ही छोटे-मोटे कई और उपाय किए गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होते-होते कैंटीन तैयार हो गई।
कुर्सी जो कर रही सांसदों को परेशान
यह भी देखिए। योजनाकारों का नमूना। संसद भवन के एनेक्सी में बेकार पड़ी भारी-भरकम कुर्सी को लाकर वीवीआईपी कैंटीन में सजा दिया गया। इसकी डिजाइन ऐसी है कि रोज कोई न कोई सांसद आपत्ति कर रहा है। किसी न किसी का कुर्ता इसमें फंस जाता है, इतना ही नहीं बूढ़े सांसद को इसे खिसकाकर बैठने में भी परेशानी होती है। पर्दे इस तरह के लगे हैं कि सूरज की पूरी रोशनी कैंटीन को रोशन कर देती है। वुडेन फ्लोरिंग ने कैंटीन के बीचो-बीच फूलकर मेहराब सा आकार बना लिया है। वहां पैर पड़ते ही तीन-चार इंच नीचे धसना तय है। कैंटीन के पास बर्तन धोने का भी कोई इंतजाम नहीं है। यह बात अलग है कि कागजों में इसकी जरूरत कई साल से बताई जा रही है।