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संसद: सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी विधेयक लोकसभा से पास, सरोगेसी, आईवीएफ उद्योग पर कसेगा कानूनी शिकंजा

Wed, 01 Dec 2021 09:11 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 01 Dec 2021 09:11 PM IST
सार

बिल पेश करते हुए स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रजनन उपचार ने देश में बड़े उद्योग का रूप ले लिया है। देश में काफी ऐसे क्लीनिक चल रहे हैं, जो कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) सहित सहायक प्रजनन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।

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Parliament: Assisted Reproductive Technology Bill passed by Lok Sabha will tighten legal screws on surrogacy IVF industry Latest News Update
संसद - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) उद्योग में महिलाओं को शोषण से बचाने और मनमानी पर लगाम लगाने के लिए बुधवार को लोकसभा में सहायता प्राप्त प्रौद्योगिकी विनियमन बिल पारित कर दिया गया। बिल में एआरटी सेवा से जुड़े सभी पक्षों को कानून के दायरे में लाने, हर एआरटी क्लिनिक और ‘एग-स्पर्म बैंक’ का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान है। नियमों के उल्लंघन पर पांच से बारह साल तक की जेल और पांच लाख से 25 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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बिल पेश करते हुए स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रजनन उपचार ने देश में बड़े उद्योग का रूप ले लिया है। देश में काफी ऐसे क्लीनिक चल रहे हैं, जो कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) सहित सहायक प्रजनन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। यह विधेयक इन्हीं के नियमन के लिये लाया गया है। ऐसी तकनीक में इंजेक्शन देना पड़ता ह, जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा भ्रूण हस्तांतरण और भ्रूण बैंकिंग के लिये भी व्यवस्था बनाने की जरूरत थी। बिल का उद्देश्य इस सेवा को कानून के दायरे में लाना है।
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बिल के प्रस्ताव
इसमें कहा गया है कि देश में एआरटी का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। कृत्रिम गर्भाधान सहित सहायक प्रजनन तकनीक ने बांझपन के शिकार तमाम लोगों में नई उम्मीदें जगा दी हैं, लेकिन इससे जुड़े कई कानूनी, नैतिक और सामाजिक मुद्दे भी सामने आए हैं। भारत में अब जननकोश दान करना, अंतर गर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई), आईवीएफ, आईसीएसआई, पीजीडी और सरोगेसी जैसी लगभग सभी तरह की एआरटी सेवाएं मुहैया कराए जा रहे हैं। हालांकि इसका कोई मानकीकरण नहीं हो पाया था। ऐसे में इस बिल के जरिये संबंधित महिलाओं एवं बच्चों को संरक्षण प्रदान करना है।
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कांग्रेस ने उठाए सवाल
चर्चा के दौरान कांग्रेस के कार्ति चिदंबरम ने कहा कि इसमें एकल पुरुषों, समलैंगिकों, विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं को कृत्रिम तरीके से बच्चा पैदा करने की इजाजत नहीं दी गई है। यह इन वर्गों के साथ अन्याय है और संविधान की मूल भावनाओं के खिलाफ है।

बिल के मुख्य प्रावधान

  • एक महिला एक बार ही ले सकेगी सरोगेसी का सहारा
  • तलाकशुदा, समलैंगिक, अविवाहित और विधवा को नहीं मिलेगी सरोगेसी की सुविधा
  • शादी के पांच साल बाद ही कृत्रिम गर्भाधान का इस्तेमाल
  • 21 वर्ष से अधिक उम्र के बाद ही सरोगेसी की इजाजत
  • एआरटी सेवा में सभी पक्षों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
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