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पश्चिम बंगाल में 14 मई को एक ही चरण में होंगे पंचायत चुनाव
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Updated Fri, 27 Apr 2018 04:28 AM IST
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राज्य में पंचायत चुनावों के लिए अगले महीने की 14 मई को एक चरण में ही मतदान होगा। वोटों की गिनती 17 मई को होगी। राज्य चुनाव आयोग की ओर से जारी अधिसूचना में इसका जानकारी दी गई। इससे पहले राज्य सरकार ने आयोग से रमजान का महीना शुरू होने से पहले ही चुनाव की प्रक्रिया पूरा करने को कहा था। सरकार ने 14 मई को एक ही चरण में मतदान कराने और 16 मई को वोटों की गिनती कराने का सुझाव दिया था।
आखिर मामूली संशोधन के साथ आयोग ने सरकार की सलाह ही मान ली है। पहले तीन चरणों में एक, तीन व पांच मई को मतदान होना था और आठ मई को वोटों की गिनती होनी थी। अब एक ही चरण में मतदान के फैसले के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
ध्यान रहे कि विपक्षी राजनीतिक दलों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को अपने फैसले में मतदान की पूर्व घोषित तारीखों को रद्द करते हुए राज्य चुनाव आयोग को नई तारीखों का एलान करने को कहा था। उसके बाद नई तारीख तय करने के लिए सरकार व आयोग के बीच कई दफा बैठक हुई।
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लेकिन तारीखों पर सहमति नहीं बन पा रही थी। इसकी वजह यह थी कि सरकार एक ही दिन मतदान कराने पर अड़ी थी। सरकार की दलील थी कि चुनावी प्रक्रिया रमजान का महीना शुरू होने से पहले ही खत्म करनी होगी। लेकिन आयोग तीन नहीं तो कम से कम दो चरणों में मतदान कराने के पक्ष में था।
सरकार ने बृहस्पतिवार को आयोग को एक चरण में ही चुनाव कराने प्रस्ताव भेजा था। आखिर में आयोग ने सरकार की बात मान ली। लेकिन अब सुरक्षा को लेकर सवाल खडे़ होने लगे हैं। राज्य में पुलिस के जवानों की तादाद 58 हजार है जबकि मतदान केंद्रों की तादाद 58, 467 है।
हाईकोर्ट ने आयोग को संबंधित पक्षों से बातचीत कर मतदान के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। लेकिन अब एक ही मतदान की स्थिति में तमाम मतदान केंद्रों पर सुरक्षा मुहैया करा पाना संभव होगा या नहीं, यह सवालों के घेरे में है।
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आखिर मामूली संशोधन के साथ आयोग ने सरकार की सलाह ही मान ली है। पहले तीन चरणों में एक, तीन व पांच मई को मतदान होना था और आठ मई को वोटों की गिनती होनी थी। अब एक ही चरण में मतदान के फैसले के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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ध्यान रहे कि विपक्षी राजनीतिक दलों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को अपने फैसले में मतदान की पूर्व घोषित तारीखों को रद्द करते हुए राज्य चुनाव आयोग को नई तारीखों का एलान करने को कहा था। उसके बाद नई तारीख तय करने के लिए सरकार व आयोग के बीच कई दफा बैठक हुई।
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लेकिन तारीखों पर सहमति नहीं बन पा रही थी। इसकी वजह यह थी कि सरकार एक ही दिन मतदान कराने पर अड़ी थी। सरकार की दलील थी कि चुनावी प्रक्रिया रमजान का महीना शुरू होने से पहले ही खत्म करनी होगी। लेकिन आयोग तीन नहीं तो कम से कम दो चरणों में मतदान कराने के पक्ष में था।
सरकार ने बृहस्पतिवार को आयोग को एक चरण में ही चुनाव कराने प्रस्ताव भेजा था। आखिर में आयोग ने सरकार की बात मान ली। लेकिन अब सुरक्षा को लेकर सवाल खडे़ होने लगे हैं। राज्य में पुलिस के जवानों की तादाद 58 हजार है जबकि मतदान केंद्रों की तादाद 58, 467 है।
हाईकोर्ट ने आयोग को संबंधित पक्षों से बातचीत कर मतदान के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। लेकिन अब एक ही मतदान की स्थिति में तमाम मतदान केंद्रों पर सुरक्षा मुहैया करा पाना संभव होगा या नहीं, यह सवालों के घेरे में है।