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पनामा पेपर्स: आईपीएल के पूर्व चेयरमैन से जुड़ी संपत्ति सीज
एजेंसी / नई दिल्ली
Updated Sun, 10 Dec 2017 05:47 AM IST
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पनामा पेपर्स
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पनामा पेपर्स मामले में शनिवार को कारोबारी और आईपीएल के पूर्व चेयरमैन चिरायु अमीन की एक कंपनी पर छापेमारी की। फेमा कानून के तहत कंपनी के 10.35 करोड़ रुपये मूल्य का म्युचुअल फंड जब्त किया गया है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने बताया कि इसने विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन कानून (फेमा) की धारा 37 ए के तहत अमीन और उनके परिवार द्वारा नियंत्रित व्हाइटफील्ड केमटेक प्राइवेट लिमिटेड के म्युचुअल फंड जब्त किए हैं। एजेंसी के बयान के मुताबिक, पनामा पेपर्स मामले में अमीन और उनके परिजनों के नाम उछले थे और कहा गया था कि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड की कंपनी में उनकी हिस्सेदारी है।
पढ़ें- पनामा पेपर्स का खुलासा करने वालीं पत्रकार की बम धमाके में मौत
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केंद्रीय जांच एजेंसी ने बताया कि इसने विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन कानून (फेमा) की धारा 37 ए के तहत अमीन और उनके परिवार द्वारा नियंत्रित व्हाइटफील्ड केमटेक प्राइवेट लिमिटेड के म्युचुअल फंड जब्त किए हैं। एजेंसी के बयान के मुताबिक, पनामा पेपर्स मामले में अमीन और उनके परिजनों के नाम उछले थे और कहा गया था कि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड की कंपनी में उनकी हिस्सेदारी है।
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ईडी आयकर विभाग के साथ मिलकर पनामा पेपर्स मामले में भारतीय नामों की जांच कर रही है
चिरायु अमीन
जांच में पाया गया कि अमीन और उनके परिजनों ने अपनी कंपनी व्हाइटफील्ड केमटेक प्राइवेट लिमिटेड के जरिये कैंपडेन हिल, ब्रिटेन में 3-बीएचके अपार्टमेंट खरीदने के लिए 16 लाख डॉलर (10 करोड़ रुपये से अधिक) का निवेश किया। ब्रिटेन में यह संपत्ति खरीदने के लिए कंपनी ने विदेशी प्रत्यक्ष के रूप में सिंगापुर की अपनी सहायक कंपनी को 24 लाख डॉलर (लगभग 16 करोड़ रुपये) ट्रांसफर किए थे।
ईडी ने कहा कि इस राशि को इसके बाद यह रकम यूएई की सहायक कंपनियों से होते हुए ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड पहुंची जहां से 16 लाख डॉलर प्रापर्टी खरीदने के लिए चुकाए गए। फेमा की धारा 37ए के मुताबिक यदि कानून का उल्लंघन करते हुए देश से बाहर विदेशी प्रतिभूति, विनिमय या अचल संपत्ति खरीदी जाती है तो देश में उतने ही मूल्य की संपत्ति जब्त की जा सकती है। लिहाजा कंपनी के 10.35 करोड़ रुपये के म्युचुअल फंड को जब्त कर लिया गया। ईडी आयकर विभाग के साथ मिलकर पनामा पेपर्स मामले में भारतीय नामों की जांच कर रही है।
ईडी ने कहा कि इस राशि को इसके बाद यह रकम यूएई की सहायक कंपनियों से होते हुए ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड पहुंची जहां से 16 लाख डॉलर प्रापर्टी खरीदने के लिए चुकाए गए। फेमा की धारा 37ए के मुताबिक यदि कानून का उल्लंघन करते हुए देश से बाहर विदेशी प्रतिभूति, विनिमय या अचल संपत्ति खरीदी जाती है तो देश में उतने ही मूल्य की संपत्ति जब्त की जा सकती है। लिहाजा कंपनी के 10.35 करोड़ रुपये के म्युचुअल फंड को जब्त कर लिया गया। ईडी आयकर विभाग के साथ मिलकर पनामा पेपर्स मामले में भारतीय नामों की जांच कर रही है।