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पाक ने ट्रंप को खुश करने के लिए लगाया हाफिज पर अंकुश

Mon, 20 Feb 2017 04:31 AM IST
एजेंसी/ इस्लामाबाद/ नई दिल्ली
एजेंसी/ इस्लामाबाद/ नई दिल्ली Updated Mon, 20 Feb 2017 04:31 AM IST
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Pakistani curbs on Hafiz to appease Trump

पाकिस्तान ने अमेरिका को खुश करने के लिए ही जमात-उद-दावा के प्रमुख और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को आतंकी मानते हुए अपनी एंटी टेरेरिस्ट एक्ट (एटीए) सूची और एक्जिट कंट्रोल सूची (ईसीएल) में डाला है। इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स का कहना है कि हालांकि मुंबई हमले के बाद सईद को कई बार नजरबंद किया जा चुका है लेकिन लाहौर हाईकोर्ट उस पर लगे सभी आतंकी गतिविधियों के आरोपों से उसे बरी कर चुका है। 

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न्यूयॉर्क टाइम्स को 2013 में दिए एक इंटरव्यू में अमेरिका के खिलाफ आग उगलते हुए सईद ने कहा था, ‘मैं एक आम इंसान की तरह कहीं जाता हूं। मेरी किस्मत खुदा के हाथों में है, न कि अमेरिका के हाथों में।’ न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सईद को न सिर्फ अपने समर्थकों से सुरक्षा मिली हुई है बल्कि पाकिस्तान सरकार भी लाहौर में उसके निवास को सुरक्षा प्रदान करते हुए किले में तब्दील कर चुकी है जहां उसका दफ्तर और मस्जिद भी है।  
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नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टेढ़ी नजर पिछले कई दिनों से भारत और अमेरिका विरोधी इस आतंकी पर थी। ऐसी खबरें मिल रही थीं कि पाकिस्तान को भी अमेरिका उन देशों की सूची में शामिल कर सकता है जिन पर ट्रंप ने वीजा प्रतिबंध लगा दिया है।
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ट्रंप सात देशों पर आव्रजन प्रतिबंध लगाने के लिए एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर भी कर चुके हैं और बार-बार कह रहे हैं कि आतंकवाद में शामिल देशों के खिलाफ वह सख्त कार्रवाई करेंगे। इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका के इसी कोप से बचने और ट्रंप को खुश करने के लिए पाकिस्तान ने हाफिज सईद को एटीए की सूची में डालने का फैसला किया है। 

अमेरिका ने मुंबई हमले के बाद 2012 में घोषणा की थी कि सईद का पता बताने वाले को एक करोड़ डॉलर (तकरीबन 60 करोड़ रुपये) का इनाम दिया जाएगा। हालांकि जमात प्रमुख इसके बाद कई टीवी चैनलों पर आया और इनाम की घोषणा को अमेरिका का मूर्खतापूर्ण कदम बताया। हाफिज सईद को लगातार समर्थन और संरक्षण देते रहने से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग पड़ जाने का भी खौफ सताने लगा था। 

'पाकिस्तान मान चुका है कि सईद आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहा है'

Pakistani curbs on Hafiz to appease Trump

इस्लामाबाद में पिछले साल आयोजित सार्क सम्मेलन का सबसे पहले भारत ने और फिर सभी देशों ने बहिष्कार कर दिया था। इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स का मानना है कि पाकिस्तान इतना तो जरूर मानता है कि सईद के तार किसी न किसी रूप में आतंकवाद से जुड़े रहे हैं इसलिए इसने सईद को एटीए की सूची में डाल दिया है। हालांकि उसे चौथी अनुसूची में डालने का मतलब है कि मुंबई हमले के बाद सईद को लगातार संरक्षण देने के बाद पाकिस्तान मान चुका है कि वह आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहा है। 

इससे पहले 19 जुलाई को लाहौर से इस्लामाबाद तक कश्मीर के समर्थन में और भारत विरोधी रैली में पाकिस्तान सरकार ने हाफिज सईद का समर्थन किया था। ऐसी भी खबरें हैं कि भारतीय सेना द्वारा आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान सरकार ने सईद और हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाउद्दीन को लाहौर के सेना शिविर में शरण दी थी। 

क्या है चौथी अनुसूची 
एंटी-टेरेरिज्म एक्ट 1997 सरकार को अधिकार देता है कि वह किसी व्यक्ति को ‘प्रतिबंधित’ कर सकता है। एटीए के अनुच्छेद 11ईई के मुताबिक, चौथी अनुसूची में किसी ऐसे व्यक्ति को शामिल किया जा सकता है जो किसी ऐसे संगठन का कार्यकर्ता, अधिकारी या सहयोगी है जिस पर निगरानी रखी जा रहा है, जो संगठन आतंकवादी या वर्ग संघर्ष की गतिविधियों में शामिल है। चौथी अनुसूची में डाले गए व्यक्ति को निर्धारित दायरे से बाहर कहीं आने-जाने पर पाबंदी रहती है और वह पुलिस की इजाजत के बगैर कहीं नहीं जा सकता है। 

यदि 21 साल से कम उम्र के ऐसे किसी व्यक्ति या महिला को स्कूल, कॉलेज तथा अन्य किसी संस्थान से शिक्षा दी जा रही है तो भी वह स्थायी या अस्थायी रूप से नजरबंद रहेगा और वहां नहीं जा सकता है। ऐसे व्यक्तियों को थियेटर, सिनेमा, मेला, एम्युजमेंट पार्क, होटल, क्लब, रेस्तरां, चाय की दुकान या हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, रेडियो-टेलीविजन  जैसे सार्वजनिक स्थलों जाने पर मनाही होती है।

'हाफिज के आतंकी सूची में शामिल होने से भारत चैन की सांस नहीं ले सकता'

Pakistani curbs on Hafiz to appease Trump
पाकिस्तान की ओर से जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद को आतंकी सूची में शामिल करने के बाद भी भारत चैन की सांस नहीं ले सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रक्षा विशेषज्ञों ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत को पाक के इस कदम से संतुष्ट नहीं होना चाहिए और यह बड़ी उपलब्धि नहीं है।

रक्षा विशेषज्ञ कोमोडोर (रिटायर्ड) उदय भास्कर ने कहा, ‘मैं नहीं सोचता हूं कि पाकिस्तान सरकार में अभी भी आतंकवाद और ऐसे संगठनों से निपटने के लिए राजनीतिक दृढ़ता है। विशेषकर हाफिज सईद के संदर्भ में भी यह बात लागू होती है। इसकी बहुत बढ़ा चढ़ाकर व्याख्या करने की जरूरत नहीं है। देखना है कि आगे क्या होता है। ’ इसी प्रकार की राय व्यक्त करते हुए रक्षा विशेषज्ञ कमर आगा ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के इस कदम को बहुत गंभीरता से नहीं लेना चाहिए क्योंकि ऐसे प्रतिबंध सिर्फ नाम के लिए होते हैं। 

आगा ने कहा कि पाकिस्तान ने ऐसा सिर्फ अमेरिका के डर के कारण किया है। हमें इन चीजों को बहुत गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी पाकिस्तान ने जब भी ऐसे लोगों पर प्रतिबंध लगाया है वह मीडिया में अपनी बात रखते रहे हैं। ऐसे में यह सिर्फ नाम के लिए है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में पंजाब प्रांत की सरकार ने शनिवार को हाफिज सईद और उसके चार सहयोगियों का नाम आतंकवाद निरोधक अधिनियम की ‘चौथी सूची’ में शामिल किया था।
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