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बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी से पाक पीएम इमरान खान ने खूब लड़ी कूटनीति की कुश्ती

Sun, 16 Jun 2019 04:17 PM IST
Gaurav Pandey शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Sun, 16 Jun 2019 04:17 PM IST
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Pakistan PM Imran Khan wrestled diplomatically with PM Narendra Modi in Bishkek
सांकेतिक तस्वीर

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), बिश्केक की शिखर बैठक कूटनीति का अखाड़ा बन गई। भारत और पाकिस्तान ने कूटनीतिक दांव खूब चले। कूटनीतिक गलियारे के सूत्र बताते हैं कि अंतिम समय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री इमरान खान पर दबाव बनाए रखा, लेकिन चलते-चलते प्रधानमंत्री इमरान खान भी अपने देश में साख बचाने के लिए कूटनीतिक इंतजाम कर गए। 

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इसका पटाक्षेप पहले पाकिस्तान की मीडिया ने और बाद में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने किया। कुरैशी ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके प्रधानमंत्री इमरान खान ने न केवल हाथ मिलाया, लोकसभा चुनाव में सफलता पर बधाई दी बल्कि बातचीत का प्रस्ताव भी पेश किया।
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शाह महमूद कुरैशी के इस बयान के बाद भारतीय विदेश मंत्री को सफाई के चरण में थोड़ी मेहनत करनी पड़ी। भारतीय विदेश मंत्रालय करीब पखवाड़ा भर पहले से इस मामले में किसी तरह की भेंट, मुलाकात, द्विपक्षीय बातचीत की संभावना को खारिज करने की कूटनीतिक लाइन लेकर चल रहा था। इसलिए विदेश मंत्रालय को दोनों प्रधानमंत्रियों के हाथ मिलाने के घटनाक्रम पर छोटी सी खीज के साथ सामने आने पड़ा। 
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कूटनीति के पुराने जानकार मानते हैं कि इतने भर से ही इमरान खान को इस्लामाबाद में काफी राहत मिल गई है। इमरान खान दुनिया के देशों को संदेश देने की लगातार कोशिश कर रहे हैं कि पाकिस्तान भारत से शांतिवार्ता का इच्छुक है, लेकिन भारत न केवल पाकिस्तान को नीचा दिखा रहा है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार अड़ियल रुख दिखा रहे हैं।

खूब चली कूटनीति की कुश्ती

एससीओ की बैठक से पहले पाकिस्तान ने भारत के प्रधानमंत्री से बिश्केक में द्विपक्षीय वार्ता की इच्छा जताई। प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुद पत्र लिखा। इससे पहले भारत ने प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान को आने का न्योता नहीं भेजा, केवल बिम्सटेक के सदस्य देश के शिखर नेता आमंत्रित किए गए। 

एससीओ से ठीक एक सप्ताह पहले भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके और वहां के वर्तमान विदेश सचिव सोहेल महमूद भारत की निजी यात्रा पर आए। कूटनीति के जानकारों का कहना है कि एक विदेश सचिव का इस तरह से आना चौंकाता है। 

इसके बाद भारत ने प्रधानमंत्री के बिश्केक जाने के लिए पाकिस्तान के हवाई मार्ग की इजाजत मांगी। इजाजत मिल भी गई, लेकिन प्रधानमंत्री ने मध्य एशिया से होकर बिश्केक जाने के लंबे रास्ते को चुना। प्रधानमंत्री के वार्ता, भेंट मुलाकात कार्यक्रम में कहीं पाकिस्तान का नामोनिशान नहीं था। 

यह एक कूटनीतिक संदेश था कि भारत सीमा पार का आतंकवाद और पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता दोनों एक साथ सहन नहीं कर सकता। प्रधानमंत्री मोदी ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया और दमदारी से अपनी बात रखी। इस दौरान पाकिस्तान लगातार शांति वार्ता प्रक्रिया या बातचीत शुरू करने का संदेश देता रहा।

अंत में आई हाथ मिलाने की खबर

यह कूटनीति में होता है। जहां राजनीति के सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं, वहां कूटनीति की खिड़की से ताजी हवा आने की उम्मीद बनी रहती है। बिश्केक में हाथ मिलाने खबर आना भी इसी का हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री इमरान खान इसी खिड़की का इस्तेमाल का करके एक दूसरे को बधाई देते रहे हैं। 

विदेश मंत्रालय के अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि सब कुछ एक साथ खत्म नहीं किया जा सकता। मंत्रालय अपना काम करता रहता है। राजनीति भी चलती रहती है। मंत्रालय में कभी पाकिस्तान डेस्क पर काफी सक्रिय रहे सूत्र की मानें तो कई बार जो दिखाई दे रहा है, वह होता नहीं है। होता कुछ और है। 

सूत्र का कहना है कि भारत हमेशा शांति, स्थायित्व और समृद्ध पाकिस्तान चाहता है। इसमें पाकिस्तान से ज्यादा भारत का हित है। वहां की स्थायी सरकार के साथ न केवल बातचीत हो सकेगी, बल्कि सबकुछ ठीकठाक चल सकेगा। इसलिए संवाद का रास्ता कभी पूरी तरह से बंद नहीं किया जा सकता।

आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम पर होगी बात

राजनयिक सूत्रों का कहना कि पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता और आतंकवाद दोनों एक साथ नहीं चल सकती। हमारे इस रुख से पाकिस्तान को कई बार अवगत कराया जा चुका है। इस लिए जब पाकिस्तान अपनी जमीन से चल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, दोनों देशों के बीच में शांतिपूर्ण, प्रगाढ़ रिश्तों की प्रक्रिया थोड़ी मुश्किल है। सूत्रों का कहना है कि यह गेंद पाकिस्तान के पाले में है।

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