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पाक उच्चायोग जासूसी मामला: करोल बाग के होटल में स्टिंग ऑपरेशन कर पकड़ा

Thu, 11 Jun 2020 03:56 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 11 Jun 2020 03:56 AM IST
सार

  • पाक की बोलती बंद करने के लिए ऐसा किया गया
  • रेलवे के एक और कर्मचारी से पूछताछ हुई

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Pakistan High Commission espionage arrest case: Detectives were caught after sting operation at Karol Bagh hotel
पाकिस्तानी उच्चायोग के दो अधिकारी और एक ड्राइवर जासूसी करते पकड़े गए। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को पता था कि अगर बिना सबूत के पाकिस्तानी जासूसों को पकड़ा गया तो पाकिस्तान शोर मचाएगा। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तानी जासूसों को सबूत के साथ पकड़ा था। करोल बाग के एक होटल में स्टिंग ऑपरेशन किया गया और जासूसों की मीटिंग की वीडियो और बातचीत को रिकॉर्ड किया गया। यही कारण था कि पाकिस्तान ने जासूसी कांड पर चुप्पी साध ली। 

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दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने रेलवे के एक और कर्मचारी से पूछताछ की है। पाकिस्तानी जासूस इस कर्मचारी से भी रेलवे और सेना के बारे में जानकारी लेने के लिए मिले थे। इस मामले में अब तक रेलवे के दो कर्मचारियों से पूछताछ हो चुकी है। जासूसी मामले में पकड़े गए आबिद, जावेद और ताहिर पाक उच्चायोग में तैनात जरूर थे, मगर वह पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम कर रहे थे। 
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ऐसे करते थे सेना की जानकारी जुटाने की कोशिश
आईएसआई इन तीनों को भारतीय सेना से जुड़े लोगों के नंबर देती थी। आबिद इन नंबरों पर फोन कर खुद को आर्मी में कार्यरत बताकर ट्रैप में लेता था और भारतीय सेना के बारे में खुफिया जानकारी लेने की कोशिश करता था। भारतीय सेना की इंटेलिजेंस यूनिट को इसकी भनक लग गई।
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इन तीनों पर नजर रखी गई और आर्मी इंटेलिजेंस के अफसर ने ही प्लान बनाकर इनसे करोल बाग के एक होटल में मीटिंग तय की थी। यहां पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने स्टिंग ऑपरेशन प्लान किया। मीटिंग के वीडियो से पता लगता है कि आबिद होटल में प्रवेश करता है और मीटिंग में दावा करता है कि 11 क्लर्क जुड़े हुए हैं और चार काम में लगे हुए हैं। 

साल 2013 से कर रहे काम
स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के अनुसार आईएसआई की गुप्त योजना के तहत ये वर्ष 2013 में दिल्ली स्थित वीजा सेक्शन में काम करने लगे थे। एक उच्चायोग का ड्राइवर बन गया था। आबिद और ताहिर खुद को भारतीय सेना का क्लर्क बताते थे और खुद की पोस्टिंग दिल्ली स्थित भारतीय आर्मी के पोस्ट ऑफिस सेंट्रल बोर्ड में बताकर भारतीय सेना में सेंध लगाने में जुटे थे।


आईएसआई इनको हर महीने मोटी रकम पहुंचाती थी। आईएसआई देश के सभी संवेदनशील बॉर्डर पर सेना की तैनाती और हथियारों की खेप से जुड़ी जानकारी इन जासूसों के जरिए हासिल करना चाहती थी। करोल बाग के होटल से पकड़े जाने के पहले स्टिंग में इन्होंने अपना परिचय भारतीय सेना में क्लर्क के तौर पर दिया था।

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