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करतारपुर कॉरिडोर पर पाकिस्तान का दोहरा चरित्र उजागर, जमीन पर कर रखा है कब्जा
Sat, 16 Mar 2019 03:22 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Sat, 16 Mar 2019 03:22 AM IST
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Kartarpur sahib (File)
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करतारपुर साहिब पर पाकिस्तान की कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क नजर आ रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जिस गर्मजोशी से करतारपुर साहिब को भारतीय श्रद्धालुओं के लिए खोलने का एलान किया था, उनके प्रतिनिधियों ने बैठक में बिल्कुल उलट रुख दिखाया। बृहस्पतिवार को अटारी बार्डर पर हुई इस बैठक की अगुवाई करने वाले गृहमंत्रालय के संयुक्त सचिव ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान का कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया है।
गृह मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक करतारपुर साहिब के लिए महाराजा रंजीत सिंह और उस समय के जमींदारों ने 100 एकड़ जमीन दान में दी थी। यह संपत्ति गुरुद्वारे की है, जबकि पाकिस्तान सरकार इसे अपने लिए इस्तेमाल कर रहा है। बैठक में भारत ने यह जमीन खाली करने की मांग की थी जिस पर पाकिस्तान के अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। मंत्रालय के मुताबिक पाकिस्तान का रुख अलग से कॉरिडोर बनाने के खिलाफ है। भारत ने इस कॉरिडोर के लिए जमीन और 190 करोड़ रुपये का आवंटन भी कर दिया है, लेकिन पाकिस्तान का रुख गंभीर विवाद खड़ा करने वाला है।
करतारपुर धार्मिक स्थल समझौता सूची में नहीं
गृह मंत्रालय ने बताया कि भारत-पाक के बीच 1974 में एक समझौता हुआ था, जिसमें भारत में सात और पाकिस्तान में 13 धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया। इसके तहत दोनों देश श्रद्धालुओं के सुचारु आवाजाही और दर्शन के लिए सुविधाएं देंगे। इसे अफसरशाही अड़चनों से दूर रखा गया है। शुरुआत में पाकिस्तान ने करतारपुर साहिब को इस सूची में शामिल नहीं किया। उसके बाद से भारत लगातार इसकी मांग कर रहा है। बृहस्पतिवार की बैठक में भारत ने फिर यह मसला उठाया। पाकिस्तान करतारपुर को सिर्फ दो साल के लिए इस सूची में डालने को तैयार है।
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धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश, नहीं मानीं भारत की मांगें
- भारत ने कहा कि हर दिन 5000 यात्री करतारपुर साहिब के दर्शन करें और बैसाखी, गुरुपूर्णिमा वाले खास दिन 15000 यात्री रोजाना दर्शन करें। पाकिस्तान ने बैठक में इसे अस्वीकार कर दिया। उसने कहा है कि रोजाना सिर्फ 500 श्रद्धालु दर्शन करेंगे। यह संख्या भारत के हिसाब से बेहद कम है।
- भारत ने मांग की थी कि सभी भारतीय नागरिकों और ओसीआई कार्ड धारकों को करतारपुर साहिब के दर्शन करने दिया जाए, लेकिन पाकिस्तान ने कहा कि केवल सिख ही वहां दर्शन कर पाएंगे। पाकिस्तान यहां पर धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने दुनिया को बताया कि वह श्रद्धालुओं को वीजा मुक्त प्रवेश देगा, लेकिन अब वह मोटी फीस के साथ परमिट देने की बात कर रहा है। वह हर रोज यह कॉरिडोर खोले जाने के खिलाफ है। हफ्ते में दो या तीन दिन की खोलने के पक्ष में है।
- भारत ने कहा, कोई व्यक्ति दर्शन के लिए वाहन से जाना चाहे या पैदल उसकी इच्छा के अनुसार जाने दिया जाय। पाकिस्तान यहां भी अड़ियल रख अपनाते हुए कहा कि सीमा के पार कोई पैदल दर्शन करने नहीं जा सकता ह। श्रद्धालु केवल गाड़ी से ही जा सकता है।
- पाकिस्तान से कहा कि कोई परिवार या समूह जितनी संख्या में करतारपुर के दर्शन के लिए जाना चाहे उसे अनुमति दे, लेकिन पाकिस्तान ने यहां भी भांजी मार दी और कहा कि भारत से एक बार में केवल 15 श्रद्धालुओं का जत्था ही दर्शन के लिए जा सकता है।
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गृह मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक करतारपुर साहिब के लिए महाराजा रंजीत सिंह और उस समय के जमींदारों ने 100 एकड़ जमीन दान में दी थी। यह संपत्ति गुरुद्वारे की है, जबकि पाकिस्तान सरकार इसे अपने लिए इस्तेमाल कर रहा है। बैठक में भारत ने यह जमीन खाली करने की मांग की थी जिस पर पाकिस्तान के अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। मंत्रालय के मुताबिक पाकिस्तान का रुख अलग से कॉरिडोर बनाने के खिलाफ है। भारत ने इस कॉरिडोर के लिए जमीन और 190 करोड़ रुपये का आवंटन भी कर दिया है, लेकिन पाकिस्तान का रुख गंभीर विवाद खड़ा करने वाला है।
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करतारपुर धार्मिक स्थल समझौता सूची में नहीं
गृह मंत्रालय ने बताया कि भारत-पाक के बीच 1974 में एक समझौता हुआ था, जिसमें भारत में सात और पाकिस्तान में 13 धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया। इसके तहत दोनों देश श्रद्धालुओं के सुचारु आवाजाही और दर्शन के लिए सुविधाएं देंगे। इसे अफसरशाही अड़चनों से दूर रखा गया है। शुरुआत में पाकिस्तान ने करतारपुर साहिब को इस सूची में शामिल नहीं किया। उसके बाद से भारत लगातार इसकी मांग कर रहा है। बृहस्पतिवार की बैठक में भारत ने फिर यह मसला उठाया। पाकिस्तान करतारपुर को सिर्फ दो साल के लिए इस सूची में डालने को तैयार है।
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धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश, नहीं मानीं भारत की मांगें
- भारत ने कहा कि हर दिन 5000 यात्री करतारपुर साहिब के दर्शन करें और बैसाखी, गुरुपूर्णिमा वाले खास दिन 15000 यात्री रोजाना दर्शन करें। पाकिस्तान ने बैठक में इसे अस्वीकार कर दिया। उसने कहा है कि रोजाना सिर्फ 500 श्रद्धालु दर्शन करेंगे। यह संख्या भारत के हिसाब से बेहद कम है।
- भारत ने मांग की थी कि सभी भारतीय नागरिकों और ओसीआई कार्ड धारकों को करतारपुर साहिब के दर्शन करने दिया जाए, लेकिन पाकिस्तान ने कहा कि केवल सिख ही वहां दर्शन कर पाएंगे। पाकिस्तान यहां पर धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने दुनिया को बताया कि वह श्रद्धालुओं को वीजा मुक्त प्रवेश देगा, लेकिन अब वह मोटी फीस के साथ परमिट देने की बात कर रहा है। वह हर रोज यह कॉरिडोर खोले जाने के खिलाफ है। हफ्ते में दो या तीन दिन की खोलने के पक्ष में है।
- भारत ने कहा, कोई व्यक्ति दर्शन के लिए वाहन से जाना चाहे या पैदल उसकी इच्छा के अनुसार जाने दिया जाय। पाकिस्तान यहां भी अड़ियल रख अपनाते हुए कहा कि सीमा के पार कोई पैदल दर्शन करने नहीं जा सकता ह। श्रद्धालु केवल गाड़ी से ही जा सकता है।
- पाकिस्तान से कहा कि कोई परिवार या समूह जितनी संख्या में करतारपुर के दर्शन के लिए जाना चाहे उसे अनुमति दे, लेकिन पाकिस्तान ने यहां भी भांजी मार दी और कहा कि भारत से एक बार में केवल 15 श्रद्धालुओं का जत्था ही दर्शन के लिए जा सकता है।