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पाकिस्तान को भारत से डर नहीं लगता, 4 साल में 1962 बार कर चुका है युद्ध विराम उल्लंघन
Fri, 15 Feb 2019 07:19 PM IST
Nilesh Kumar
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nilesh Kumar
Updated Fri, 15 Feb 2019 07:19 PM IST
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युद्ध विराम उल्लंघन
केंद्र सरकार भले ही यह दावा करती रहे कि आतंकी घटनाओं को लेकर पाकिस्तान को हमेशा करारा जवाब दिया जाता रहा है। सर्जीकल स्टाइक भी हो गई। एनडीए-भाजपा सरकार के कई नेता आए दिन ये बयान जारी करते रहते हैं कि आतंकियों को मुंह तोड़ जवाब दिया जा रहा है।दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान को भारत से डर लगने लगा है।जवाब है नहीं। पिछले चार साल के दौरान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर पाकिस्तान द्वारा युद्ध विराम नीति का 484 फीसदी उल्लंघन किया गया है। 2015 में युद्ध विराम उल्लंघन के 405 मामले सामने आए थे तो वहीं नवंबर-2018 तक पाकिस्तान 1962 बार यह उल्लंघन कर चुका है।
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इसलिए पाकिस्तान को भारत का कोई डर नहीं...देखें युद्ध विराम उल्लंघन...
साल नियंत्रण रेखा अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर कुल मामले
2015 152 253 405
2016 228 221 449
2017 860 111 971
2018 (नवंबर) 1454 508 1962
(गृह मंत्रालय द्वारा जारी आकड़े)
नोट: इसके अलावा पिछले साल नवंबर तक जम्मू-कश्मीर बॉर्डर पर घुसपैठ के 302 प्रयास हुए हैं।
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अगर आतंकी ज्यादा मरे हैं तो जवान भी अधिक शहीद हुए हैं
गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी ज्यादा मारे जा रहे हैं।यहीं से यह बात पता चलती है कि जवानों के शहीद होने का ग्राफ भी तेजी से ऊपर जा रहा है। साल 2014 में 110 आतंकी मारे गए थे, 2018 में 257 आतंकियों को मारा गया।2014 से 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों में शहीद होने वाले जवानों की संख्या में 93 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2014 के दौरान जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों में सुरक्षा बलों के 47 जवान शहीद हो गए थे।
अगर 2018 में यह आंकडा देखें तो स्थिति डराने वाली होती है।पिछले साल आतंकी हमलों में 91 जवान शहीद हुए हैं।इतना ही नहीं, चार सालों में जम्मू-कश्मीर में 1315 लोगों को भी आतंकी हमलों की वजह से जान गंवानी पड़ी है।2014 से 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में कुल 1708 आतंकी हमले हुए हैं।यानी हर माह 28 आतंकी हमलों को अंजाम दिया गया है।सबसे ज्यादा हमले 2018 में हुए हैं।आतंकियों ने 614 हमले किए हैं।
पाकिस्तान को किसी का डर नहीं है: रक्षा विशेषज्ञ
पाकिस्तान की हरकतों पर अभी तक लगाम नहीं लग सकी है, इस बाबत रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर संदीप थापर कहते हैं कि पड़ोसी राष्ट्र को किसी का डर नहीं है।वजह, जब पहले हमले हुए तो भारत सरकार ने बड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया था, लेकिन बाद में कुछ नहीं हुआ।हम नहीं कहते कि हमले का जवाब हमला ही होता है। कुछ दूसरे ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे पाकिस्तान आतंक के रास्ते से पीछे हटने के लिए मजबूर हो।
जैसे, पहले कहा गया था कि पाकिस्तान को जा रहे पानी का रास्ता डायवर्ट कर सकते हैं।बाद में ऐसा कुछ नहीं हुआ।कुछ दूसरे प्रतिबंध भी लगा दी जाएं तो पाकिस्तान को सबक मिल सकता है।जनता में आज गुस्सा है, लेकिन सर्जीकल स्ट्राइक हर बार नहीं हो सकती।सरकार अपने स्तर पर कोई न कोई रणनीति बना रही है।
गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी ज्यादा मारे जा रहे हैं।यहीं से यह बात पता चलती है कि जवानों के शहीद होने का ग्राफ भी तेजी से ऊपर जा रहा है। साल 2014 में 110 आतंकी मारे गए थे, 2018 में 257 आतंकियों को मारा गया।2014 से 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों में शहीद होने वाले जवानों की संख्या में 93 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2014 के दौरान जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों में सुरक्षा बलों के 47 जवान शहीद हो गए थे।
अगर 2018 में यह आंकडा देखें तो स्थिति डराने वाली होती है।पिछले साल आतंकी हमलों में 91 जवान शहीद हुए हैं।इतना ही नहीं, चार सालों में जम्मू-कश्मीर में 1315 लोगों को भी आतंकी हमलों की वजह से जान गंवानी पड़ी है।2014 से 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में कुल 1708 आतंकी हमले हुए हैं।यानी हर माह 28 आतंकी हमलों को अंजाम दिया गया है।सबसे ज्यादा हमले 2018 में हुए हैं।आतंकियों ने 614 हमले किए हैं।
पाकिस्तान को किसी का डर नहीं है: रक्षा विशेषज्ञ
पाकिस्तान की हरकतों पर अभी तक लगाम नहीं लग सकी है, इस बाबत रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर संदीप थापर कहते हैं कि पड़ोसी राष्ट्र को किसी का डर नहीं है।वजह, जब पहले हमले हुए तो भारत सरकार ने बड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया था, लेकिन बाद में कुछ नहीं हुआ।हम नहीं कहते कि हमले का जवाब हमला ही होता है। कुछ दूसरे ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे पाकिस्तान आतंक के रास्ते से पीछे हटने के लिए मजबूर हो।
जैसे, पहले कहा गया था कि पाकिस्तान को जा रहे पानी का रास्ता डायवर्ट कर सकते हैं।बाद में ऐसा कुछ नहीं हुआ।कुछ दूसरे प्रतिबंध भी लगा दी जाएं तो पाकिस्तान को सबक मिल सकता है।जनता में आज गुस्सा है, लेकिन सर्जीकल स्ट्राइक हर बार नहीं हो सकती।सरकार अपने स्तर पर कोई न कोई रणनीति बना रही है।