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एनएसजी पर पलटा पाकिस्तान, की समझौते की पेशकश
एजेंसी/ इस्लामाबाद
Updated Wed, 17 Aug 2016 02:43 AM IST
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पाकिस्तान ने भारत को परमाणु परीक्षण संधि की पेशकश है
- फोटो : file photo
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एक हफ्ते के अंदर दूसरी बार पाकिस्तान ने मंगलवार को भी भारत से परमाणु परीक्षण संधि के लिए द्विपक्षीय समझौते की पेशकश की है। इसमें कहा गया है कि इससे परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) में एक सकारात्मक संदेश जाएगा और दोनों देश इसकी सदस्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने परमाणु हथियारों का परीक्षण नहीं करने की संधि का प्रस्ताव 12 अगस्त को भेजा था। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने मंगलवार को कहा कि 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद पाकिस्तान ने भारत को एक साथ संपूर्ण परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) पर हस्ताक्षर करने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन उस समय भारत की ओर से कोई माकूल जवाब नहीं आया था।
उन्होंने कहा, ‘वैश्विक परिप्रेक्ष्य के साथ-साथ इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के व्यापक हितों को देखते हुए पाकिस्तान ने दोनों देशों के द्विपक्षीय समझौते की संभावना महसूस की है। यह संधि दक्षिण एशिया में संयम और जवाबदेही को बढ़ावा देगी और सीटीबीटी के उद्देश्यों को दोनों देशों का समर्थन मिलेगा। यदि इस पर सहमति बन जाए तो सीटीबीटी में दोनों देशों का शामिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सकता है।’
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पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने परमाणु हथियारों का परीक्षण नहीं करने की संधि का प्रस्ताव 12 अगस्त को भेजा था। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने मंगलवार को कहा कि 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद पाकिस्तान ने भारत को एक साथ संपूर्ण परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) पर हस्ताक्षर करने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन उस समय भारत की ओर से कोई माकूल जवाब नहीं आया था।
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उन्होंने कहा, ‘वैश्विक परिप्रेक्ष्य के साथ-साथ इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के व्यापक हितों को देखते हुए पाकिस्तान ने दोनों देशों के द्विपक्षीय समझौते की संभावना महसूस की है। यह संधि दक्षिण एशिया में संयम और जवाबदेही को बढ़ावा देगी और सीटीबीटी के उद्देश्यों को दोनों देशों का समर्थन मिलेगा। यदि इस पर सहमति बन जाए तो सीटीबीटी में दोनों देशों का शामिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सकता है।’
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