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नेहरू को 'अय्याश' बताने वाली फिल्म को लेकर भिड़े निहलानी और गजेंद्र चौहान
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 21 Sep 2016 11:31 AM IST
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पहलाज निहलानी-गजेंद्र चौहान
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एक फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड के चीफ पहलाज निहलानी और फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) के हेड गजेंद्र चौहान आमने-सामने आ गए हैं। अंग्रेजी अखबार 'इकनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता दंगों पर बनी इस फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को अय्याश बताया गया और जनसंघ संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तारीफ की गई है। इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने मंजूरी देने से मना कर दिया है।
16 अगस्त 1946 को शुरू हुए कोलकाता दंगों के विषय लेकर यह फिल्म मिलन भौमिक ने बनाई है। 'दंगा' नाम की इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने यह कहते हुए मंजूरी देने से मना कर दिया कि इसमें तथ्यों का अभाव है और इससे देश में कानून व्यवस्था के लिए मुश्किल हो सकती है। सेंसर बोर्ड का आशंका है कि अगर इस फिल्म को मंजूरी दी जाती है तो इससे हिंसा भी हो सकती है।
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16 अगस्त 1946 को शुरू हुए कोलकाता दंगों के विषय लेकर यह फिल्म मिलन भौमिक ने बनाई है। 'दंगा' नाम की इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने यह कहते हुए मंजूरी देने से मना कर दिया कि इसमें तथ्यों का अभाव है और इससे देश में कानून व्यवस्था के लिए मुश्किल हो सकती है। सेंसर बोर्ड का आशंका है कि अगर इस फिल्म को मंजूरी दी जाती है तो इससे हिंसा भी हो सकती है।
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'श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा मेरे भीतर प्रवेश कर गई'
गजेंद्र चौहान
गजेंद्र चौहान का कहना है कि बिना इतिहासकारों से सलाह-मशविरा किए बिना सेंसर बोर्ड का यह तय करना कि हत्याएं नहीं हुईं, गलत है। गजेंद्र चौहान ने इस फिल्म में अभिनय किया है। उनका कहना है कि उन्होंने इस मामले पर रिसर्च की और इसके बाद ही फिल्म से जुड़ने का फैसला किया। चौहान का कहना है, 'मैंने खूब शोध किया और फिल्म के किरदार में खुद को फिट करने के लिए खूब मेहनत की। इस फिल्म में अभिनय करते हुए मुझे लगा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा मेरे भीतर प्रवेश कर गई है।'