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पहलगाम आतंकी हमला: सिंधु जल संधि तोड़ने से ऑप सिंदूर तक, कैसे महीनेभर में घुटनों पर आए जिम्मेदार, अब आगे क्या?

Fri, 23 May 2025 08:23 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 23 May 2025 08:23 PM IST
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सार
पहलगाम आतंकी हमले के बाद से बीते एक महीने में क्या-क्या हुआ है? भारत ने किस तरह आतंकियों के गढ़ और पनाहगाह पाकिस्तान को अलग-अलग जरियों से निशाना बनाया है? इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर को कैसे अंजाम दिया गया? भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को किस तरह से उठाया है? भारत की राजनीति में इस दौरान क्या-क्या हुआ और अब आगे क्या होने जा रहा है? आइये जानते हैं...
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Pahalgam Terrorist Attacks from Indus Water Treaty to Operation Sindoor and more how India targets Pakistan
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज 23 मई है। यानी पहलगाम में आतंकी हमले को एक महीने का समय पूरा हो चुका है। 22 अप्रैल को हुई उस घटना के बाद से दक्षिण एशिया में दो पड़ोसी देशों के बीच के रिश्ते ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई समीकरण बदल चुके हैं। इस हमले के बाद भारत ने आतंकवाद को खत्म करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें पड़ोसी पाकिस्तान से पनपने वाले आतंकवाद पर सीधा वार करने से लेकर संदिग्ध जासूसों की धरपकड़ तक शामिल है। 


लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद दो चिंताएं महीने भर बाद भी बनी हुई हैं। पहली- एक महीने बाद भी इसे अंजाम देने वाले चार आतंकियों को अभी नहीं पकड़ा जा सका है। हालांकि, गुरुवार को खबरें आईं कि सेना का खोज अभियान अब दक्षिण और मध्य कश्मीर के घने जंगलों तक फैल चुका है। माना जा रहा है कि या तो ये आतंकी सप्लाई खत्म होने के बाद बाहर आ जाएंगे, या फिर ये सीमा पार कर पाकिस्तान भाग निकलने में कामयाब हो चुके हैं। दूसरी- आतंकी हमले के बाद से ही जम्मू-कश्मीर जाने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इससे स्थानीय दुकानदारों, पर्यटन से जुड़े व्यापारों और उद्योगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 

इन सबके बीच यह जानना अहम है कि आखिर पहलगाम आतंकी हमले के बाद से बीते एक महीने में क्या-क्या हुआ है? भारत ने किस तरह आतंकियों के गढ़ और पनाहगाह पाकिस्तान को अलग-अलग जरियों से निशाना बनाया है? इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर को कैसे अंजाम दिया गया? भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को किस तरह से उठाया है? भारत की राजनीति में इस दौरान क्या-क्या हुआ और अब आगे क्या होने जा रहा है? आइये जानते हैं...

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पहलगाम आतंकी हमले के एक महीने बाद क्या-क्या हुआ? 

23 अप्रैल-25 अप्रैल
  • भारत ने आतंकियों का पाकिस्तान कनेक्शन सामने आने के बाद राजनयिक रिश्तों को डाउनग्रेड किया। सिंधु जल समझौते को रद्द कर दिया। अटारी-वाघा बॉर्डर बंद कर दिया। पाकिस्तानी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया और पाकिस्तानी नागरिकों को दिए जाने वाले वीजा को भी रद्द कर दिया। 
  • भारतीय सेना ने पहलगाम में घटनास्थल के आसपास के क्षेत्रों की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन जारी रखा। पहलगाम में अस्थायी लॉकडाउन लगा दिया गया और आतंकियों की तलाश में हेलीकॉप्टर और ड्रोन्स की मदद ली जाने लगी। 
  • सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कमांडर को मार गिराया गया। इस बीच पाकिस्तान ने एलओसी पर सीजफायर का उल्लंघन शुरू कर दिया। देखते ही देखते भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। 



भारत ने भी इस बीच सैन्य तैयारियों पर जोर दिया और पाकिस्तान की तरफ से किसी हमले की आशंका के मद्देनजर ब्लैकआउट और नागरिक सुरक्षा से जुड़ी ड्रिल्स शुरू की गईं। 

6 मई-7 मई
6-7 मई की दरमियानी रात भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च कर दिया। इसके तहत भारत ने 22 मिनट के अंदर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दहशतगर्दों के नौ ठिकानों पर सटीक निशाना लगाया। इस ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। 

8-9 मई
पाकिस्तान की तरफ से हमले की आशंका को देखते हुए भारत ने अपनी रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर दिया। 8 मई की रात को पाकिस्तान ने ड्रोन्स के जत्थे, तोप के गोलों, रॉकेट्स और मिसाइलों के जरिए जम्मू-कश्मीर और पंजाब पर हमले की कोशिश की। भारत के एस-400, आकाशतीर और कई चरणों में फैले डिफेंस सिस्टम ने एक भी वार सफल नहीं होने दिया। 

9 मई को भारत ने पाकिस्तान के एचक्यू-9बी हवाई रक्षा प्रणाली को लाहौर में तबाह कर दिया। पाकिस्तान ने एक बार फिर ड्रोन्स और मिसाइलों से हमले की कोशिश की, लेकिन उसकी साजिश फिर नाकामयाब रही। भारत ने भी अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी पर जवाबी फायरिंग की। 

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10 मई
भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान की रीढ़ पर वार किया। सुबह ही पाकिस्तान के 11 अहम एयरबेसों को एक साथ निशाना बनाया गया। इनमें इस्लामाबाद के करीब एक एयरबेस से लेकर  स्कार्दू, बोलारी और सरगोधा तक के एयरबेस शामिल थे।

भारत के इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। आखिरकार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मोर्चा संभालते हुए भारत और पाकिस्तान से बातचीत की। हालांकि, पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि पाकिस्तान के आतंक का जवाब दिया जाना जरूरी है। 

10 मई की दोपहर 3.30 बजे पाकिस्तान के सैन्य अभियानों के महानिदेशक (डीजीएमओ) ने भारत के साथ सैन्य स्तर की सीधी वार्ता शुरू की। इस बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच इसी दिन शाम 5 बजे से संघर्षविराम पर सहमति बनी। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों की तरफ से एलान हो पाने से पहले ही अपने एक एक्स पोस्ट पर सीजफायर कराए जाने का श्रेय लेने की कोशिश शुरू कर दी। 

16 मई
जम्मू-कश्मीर में 14 मई से 16 मई के बीच दो ऑपरेशन में छह आतंकियों को मार गिराया गया। सभी आतंकी ऊंचाई वाले इलाकों में छिपे थे। ये ऑपरेशन केरन और त्राल इलाके में किए गए। आतंकियों के इस इलाके में छिपे होने की पहली सूचना 12 मई को ही मिल गई थी। 13 मई तक निगरानी के बाद ऑपरेशन लॉन्च कर दिया गया। 

17 मई
मोदी सरकार ने दुनिया तक भारत की बात पहुंचाने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का एलान किया। सांसदों के सात प्रतिनिधिमंडलों को आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखने और पाकिस्तान की पोल खोलने की जिम्मदारी दी गई। हर एक प्रतिनिधिमंडल में छह से सात सांसद और कई राजनयिकों को शामिल किया गया। कुल 59 सांसदों को डेलिगेशन्स में शामिल किया गया। हर प्रतिनिधिमंडल को अलग-अलग देशों की जिम्मेदारी सौंपी गई। 

20 मई-22 मई
  • अब तक कुल तीन डेलिगेशन रवाना हो चुके हैं। इनमें सबसे पहले जदयू सांसद संजय झा की अगुवाई वाला पहला डेलिगेशन इंडोनेशिया, मलयेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर को भारत के आतंकरोधी ऑपरेशन की जानकारी देने रवाना हुए। इस डेलिगेशन में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी से लेकर कांग्रेस के सलमान खुर्शीद और माकपा के जॉन ब्रिटास तक को शामिल किया गया है। 
  • इसके बाद शिवसेना के श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व वाला दूसरा डेलिगेशन संयुक्त अरब अमीरात, लाइबेरिया, कॉन्गो और सिएरा लियोन के लिए रवाना हो गया। उनके प्रतिनिधिमंडल में भाजपा की बांसुरी स्वराज से, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर और बीजद के सस्मित पात्रा भी शामिल रहे।
  • इसके अलावा एक और द्रमुक नेता कनिमोझी के नेतृत्व वाला एक और डेलिगेशन रूस, स्पेन ग्रीस, स्लोवेनिया और लातविया के दौरे पर रवाना हो चुका है। इस डेलिगेशन में सपा सांसद राजीव राय से लेकर राजद के प्रेम चंद गुप्ता और राजदूत मंजीव एस. पुरी तक शामिल हैं।

दूसरी तरफ विदेश मंत्री जयशंकर ने भी विदेशी मीडिया ग्रुप को दिए इंटरव्यू में कहा कि जहां कहीं से भी भारत के लिए खतरे उभरेंगे, उनका जवाब सैन्य तरीकों से दिया जाएगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से सीजफायर में मध्यस्थता करने के दावों को भी खारिज कर दिया। 

23 मई
दूसरी तरफ देश में पहलगाम हमलों के बाद से लेकर अब तक 3600 ओवरग्राउंड वर्करों को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आ चुकी है। यह कार्रवाई अनंतनाग, कुलगाम, शोपियां, पुलवामा, अवंतीपोरा, बडगाम, श्रीनगर, गांदरबल, बारामुला, हंदवाड़ा, कुपवाड़ा और बांदीपोरा सहित कई अन्य क्षेत्रों में की गई। यह गिरफ्तारियां आतंकी हमले के बाद कश्मीर घाटी में व्यापक आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत की गईं। इनमें से 160 के खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि अन्य पर गैर कानूनी रोकथाम अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

जांच से पता चला है कि इनमें से कई के जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के साथ सक्रिय संबंध थे। कई ओजीडब्ल्यू अपने पाकिस्तान में बैठे संचालकों के साथ गुप्त संचार बनाए रखने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और वीपीएन का उपयोग कर रहे थे। 

अब आगे क्या-क्या हो रहा?
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब 30 मई को कानपुर जाएंगे, जहां वे पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले शुभम द्विवेदी के परिजनों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे कानपुर को करोड़ों की परियोजनाएं भी सौंपेंगे। 
  • दूसरी तरफ राहुल गांधी 24 मई को जम्मू-कश्मीर के पुंछ का दौरा कर सकते हैं। वे यहां पाकिस्तान की गोलीबारी में मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। इस कदम का जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने स्वागत किया है।
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