15 हजार से अधिक बच्चों को जन्म दिलाने वाली पद्मश्री नरसम्मा का निधन
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कर्नाटक के पिछड़े इलाके कृष्णापुरा में बिना चिकित्सकीय सहायता के पारंपरिक तरीके से प्रसव कराकर 15 हजार से अधिक बच्चों को जन्म दिलाने वाली 98 वर्षीय सुलागिट्टी नरसम्मा का मंगलवार को निधन हो गया। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित नरसम्मा कर्नाटक में ‘जननी अम्मा’ के नाम से मशहूर थीं।
नरसम्मा को फेफड़ों की बीमारी के कारण 29 नवंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह पिछले पांच दिन से वेंटिलेटर पर थीं। मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें समाज सेवा के लिए साल 2018 में ही केंद्र सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था।
नरसम्मा के निधन पर राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने गहरा दुख व्यक्त किया। 1920 में कर्नाटक के तुमकुर जिले में जन्मी नरसम्मा को समाजसेवा में उनके योगदान को देखते हुए तुमकुर यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी दी थी।
उन्होंने 20 साल की उम्र में पहली बार अपनी दादी के प्रसव कार्य में हाथ बंटाया था। इसके बाद से पिछले 77 वर्षों से वह 15 हजार से अधिक बच्चों का जन्म करा चुकी थीं। इसके अलावा वह प्रसूताओं को आयुर्वेदिक दवाएं भी देती थीं।
गर्भ में पल रहे बच्चे की नब्ज चेक कर लेती थीं
जननी अम्मा बारे में कहा जाता था कि वे गर्भ में पल रहे बच्चे की नब्ज चेक कर सकती थीं। लोगों का मानना था कि वे पेट छूकर गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य का हाल जान लेती थीं। अम्मा बताती थीं कि उन्हें प्रसव कराने की विधा अपनी दादी से मिली थी, जो दाई का काम कर चुकी थीं।
नि:शुल्क करती थीं सेवा
कर्नाटक के टुमकुर जिले के कृष्णापुरा गांव की रहने वाली सुलागिट्टी नरसम्मा एक निरक्षर कृषि मजदूर थीं। लेकिन पिछड़े इलाकों में प्रसव सहायिका के तौर पर उन्होंने बिना किसी चिकित्सा सुविधा के नि:शुल्क ही यह काम किया। उन्होंने सभी प्रसव पारंपरिक तरीकों से कराए गए थे। उनके नि:स्वार्थ भाव को देखते हुए उन्हें जननी अम्मा कहा जाने लगा।