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Hindi News ›   India News ›   Padma awardees And unsung heroes: Padma Awards 2026 on the eve of Republic Day

पद्म सम्मान - गुमनाम नायक: धुन के पक्के; न उम्र की सीमा, न कर्म का बंधन

Mon, 26 Jan 2026 08:29 AM IST
पवन पांडेय अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 26 Jan 2026 08:29 AM IST
सार

भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं: असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए पद्म विभूषण; उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए पद्म भूषण; और किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए पद्म श्री।

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Padma awardees And unsung heroes: Padma Awards 2026 on the eve of Republic Day
पद्म सम्मान - गुमनाम नायक - फोटो : ANI

विस्तार

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, गृह मंत्रालय ने 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं की आधिकारिक सूची जारी की। ये प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान कला, साहित्य, सामाजिक सेवा, चिकित्सा, शिक्षा और सार्वजनिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों के उन व्यक्तियों को सम्मानित करते हैं, जिन्होंने उत्कृष्टता, समर्पण और समाज में दीर्घकालिक योगदान दिया है।
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राम रेड्डी मामिडी, तेलंगाना
राम रेड्डी मामिडी सहकारिता-आधारित विकास को मजबूत किया। साहा विकास के संस्थापक के तौर पर मामिडी ने डेयरी व पशुधन सहकारिता को स्थापित करने और उन्हें बढ़ावा देने में अहम भूमिका।
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गफरुद्दीन मेवाती, राजस्थान
गफरुद्दीन भपंग वादक हैं और मेवात की पारंपरिक पांडुन के कड़े गायन शैली को वैश्विक मंचों तक पहुंचाया है। गफरुद्दीन को 2024 में संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप सम्मान मिल चुका है।
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पोकिला लेकथेपी, असम
पोकिला लेकथेपी असम के कार्बी आंगलोंग जिले की एक प्रख्यात कार्बी लोक गायिका हैं। उन्हें कार्बी संगीत के क्षेत्र में उनके चार दशकों से अधिक के योगदान के लिए जाना जाता है।

डॉ. थंगराज, हैदराबाद
डॉ. कुमारस्वामी थंगराज हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के वरिष्ठ आनुवंशिकीविद हैं। उनके शोध ने दक्षिण एशिया में मानव इतिहास और स्वास्थ्य की समझ को पुनर्परिभाषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक खोज में यह भी बताया कि अंडमान द्वीप समूह की जनजातीय आबादी करीब 65,000 वर्ष पूर्व दक्षिणी तटीय मार्ग से अफ्रीका से पलायन कर आई थीं।

नुरुद्दीन अहमद, असम
नुरुद्दीन अहमद असम के एक प्रख्यात मूर्तिकार, कला निर्देशक और सेट डिजाइनर हैं। उन्हें असमिया रंगमंच और संस्कृति में उनके क्रांतिकारी योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने मोबाइल थिएटर के लिए 'टाइटैनिक' और 'डायनासोर' जैसे भव्य सेट तैयार किए हैं। हाल ही में, उन्होंने बटाद्रवा सांस्कृतिक परियोजना में कलात्मक कार्य किया है।

खेम राज सुंदरियाल, हरियाणा
पानीपत निवासी 84 वर्षीय खेम राज मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। पानीपत के हैंडलूम (हथकरघा) उद्योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इंद्रजीत सिंह सिद्धू, चंडीगढ़
88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू 1996 में डीआईजी पद से सेवानिवृत्त हुए। एक दशक से चंडीगढ़ की सड़कों की सफाई कर रहे हैं। प्रतिदिन सुबह 6 बजे साइकिल रेहड़ी लेकर आसपास के इलाकों की सफाई करते हैं।

डॉ. पद्मा गुरमीत, लद्दाख
डॉ. गुरमीत पारंपरिक तिब्बती चिकित्सा पद्धति सोवा-रिग्पा के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र की इस प्राचीन उपचार प्रणाली को पुनर्जीवित करने और आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका।

के. पजनीवेल, पुडुचेरी
पजनीवेल अत्यंत कुशल पारंपरिक मूर्तिकार और कलाकार हैं। वह मुख्य रूप से टेराकोटा (मिट्टी के शिल्प) और पारंपरिक मूर्तिकला के माध्यम से पुडुचेरी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने स्थानीय लोक कथाओं और देवताओं की विशाल मूर्तियों को बनाने में विशेषज्ञता हासिल की है, जो न केवल दक्षिण भारत बल्कि विदेश में भी प्रदर्शित की गई हैं।

टेची गुबीन, अरुणाचल
टेची एक प्रतिष्ठित लोक कलाकार और सांस्कृतिक संरक्षक हैं। उन्हें मुख्य रूप से न्यिशी जनजाति की पारंपरिक लोक कलाओं और संगीत को जीवित रखने और वैश्विक पहचान दिलाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने अरुणाचल की समृद्ध आदिवासी विरासत, विशेषकर पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लोक गीतों के दस्तावेजीकरण और संरक्षण में दशकों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। युवा पीढ़ी को जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित भी किया।

कैलाश पंत, मध्य प्रदेश
वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार पंत ने नौकरी छोड़कर स्वतंत्र प्रेस स्थापित किया और साप्ताहिक जनधर्म का 22 वर्षों तक नियमित प्रकाशन किया। यह सामाजिक जागरण का माध्यम बना।

भगवानदास रैकवार, मध्य प्रदेश
अखाड़ा संस्कृति की प्राचीनतम कला बुंदेली युद्ध शैली के प्रशिक्षक हैं। गुरु रामचरण रावत के निर्देशन में 16-17 साल की उम्र में अखाड़ा खेलना शुरू किया। इसके बाद अखाड़ा को ही जीवन बना लिया।

मोहन नागर, मध्य प्रदेश
पर्यावरणविद नागर जल व भूमि पुनर्स्थापन के लिए जाने जाते हैं। वह 75 हजार से अधिक जल संरचनाएं तैयार कर चुके हैं। 60 एकड़ से अधिक बंजर पहाड़ों को हरा-भरा बनाने में बड़ी भूमिका।

बृज लाल, जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर के रहने वाले बृज लाल भट्ट पूर्व नौकरशाह हैं। वह कश्मीरी पंडितों की वापसी के मुखर आवाज हैं। कश्मीरी लोक संगीत के पुरोधा ने आतंकवाद के दौर में भी साज व आवाज का साथ नहीं छोड़ा। कश्मीरी पंडितों की सांस्कृतिक विरासत को अपनी गायकी से संजोये रखा। उनका मानना है कि कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के लिए व्यापक नीति बनाने की जरूरत है।

शफी शौक, श्रीनगर
श्रीनगर निवासी प्रोफेसर शफी शौक ने कश्मीरी, अंग्रेजी, उर्दू व हिंदी में 100 से अधिक पुस्तकों का लेखन, संपादन और अनुवाद किया है। उनकी किताबों में कश्मीरी डिक्शनरी, कश्मीरी व्याकरण और कश्मीरी भाषा एवं साहित्य का इतिहास विशेष रूप से उल्लेखनीय है। साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारती भाषा सम्मान, साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार से नवाजे जा चुके हैं।

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