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आईएनएक्स मीडिया मामला: हाईकोर्ट पहुंचे चिदंबरम, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का संज्ञान लेने को दी चुनौती
Wed, 27 Nov 2024 09:55 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 27 Nov 2024 09:55 PM IST
सार
P Chidambaram: कांग्रेस नेता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने तर्क दिया कि 2021 में जब ट्रायल कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल करने के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपराधों का संज्ञान लिया, तो मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए ईडी ने अपेक्षित मंजूरी नहीं ली।
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पी. चिदंबरम
- फोटो : ANI
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विस्तार
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने बुधवार को आईएनएक्स मीडिया मामले में एक ट्रायल कोर्ट के उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का संज्ञान लेने को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने दलील दी कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अनिवार्य मंजूरी नहीं ली गई।
कांग्रेस नेता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने तर्क दिया कि 2021 में जब ट्रायल कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल करने के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपराधों का संज्ञान लिया, तो मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए ईडी ने अपेक्षित मंजूरी नहीं ली। दलील दी गई, चूंकि चिदंबरम उस समय एक लोक सेवक थे, जब कथित अपराध हुआ था, इसलिए एजेंसी को सीआरपीसी और पीएमएलए के प्रावधानों के अनुसार मंजूरी लेनी थी।
ईडी के वकील ने कहा कि धन शोधन मामले में आरोपी के खिलाफ आरोप किसी आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन का हिस्सा नहीं हो सकते। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी 28 नवंबर को मामले की सुनवाई करेंगे।
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सीबीआई ने 15 मई, 2017 को मामला दर्ज किया था, जिसमें वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपये के विदेशी फंड प्राप्त करने के लिए आईएनएक्स मीडिया समूह को दी गई विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) मंजूरी में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। चिदंबरम को 21 अगस्त, 2019 को आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। उसी वर्ष 16 अक्तूबर को ईडी ने उन्हें संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था।
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कांग्रेस नेता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने तर्क दिया कि 2021 में जब ट्रायल कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल करने के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपराधों का संज्ञान लिया, तो मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए ईडी ने अपेक्षित मंजूरी नहीं ली। दलील दी गई, चूंकि चिदंबरम उस समय एक लोक सेवक थे, जब कथित अपराध हुआ था, इसलिए एजेंसी को सीआरपीसी और पीएमएलए के प्रावधानों के अनुसार मंजूरी लेनी थी।
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ईडी के वकील ने कहा कि धन शोधन मामले में आरोपी के खिलाफ आरोप किसी आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन का हिस्सा नहीं हो सकते। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी 28 नवंबर को मामले की सुनवाई करेंगे।
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सीबीआई ने 15 मई, 2017 को मामला दर्ज किया था, जिसमें वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपये के विदेशी फंड प्राप्त करने के लिए आईएनएक्स मीडिया समूह को दी गई विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) मंजूरी में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। चिदंबरम को 21 अगस्त, 2019 को आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। उसी वर्ष 16 अक्तूबर को ईडी ने उन्हें संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था।