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घटती रफ्तार: भारत में कुल प्रजनन दर में लगातार हो रही कमी, क्या ये देश की जनसंख्या में गिरावट का है संकेत?

Mon, 09 May 2022 08:25 PM IST
जयदेव सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Mon, 09 May 2022 08:25 PM IST
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सार
बिहार में प्रजनन दर सबसे ज्यादा 2.98 है, दूसरे नंबर पर मेघालय में 2.91 है। तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है जहां TFR 2.35 है। मुस्लिम में TFR घटकर 2.36 रह गया है।
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overall TFR declines what it means for India
सबसे ज्यादा कुल प्रजनन दर वाले राज्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार लगातार कम हो रही है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि ये रफ्तार आबादी के प्रतिस्थापन स्तर से भी कम हो गई है। दरअसल, देश में कुल प्रजनन दर (यानी TFR) 2 हो गई है।  किसी देश की मौजूदा आबादी को बनाए रखने के लिए प्रतिस्थापन की दर 2.1 होनी चाहिए। 

सरकार की ओर से हुए पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे या NFHS-5) में आंकड़े सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार समेत केवल पांच राज्य ऐसे हैं जहां कुल प्रजनन दर 2.1 से ज्यादा है। बिहार में प्रजनन दर सबसे ज्यादा 2.98 है, दूसरे नंबर पर मेघालय में 2.91 का TFR है। तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है जहां TFR 2.35 है। झारखंड में 2.26 तो मणिपुर में 2.17 का TFR है। 

TFR 2.1 से कम होने से क्या देश की आबादी कम होने वाली है? मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ने की बात की जाती है उसका क्या? जब प्रजजन दर घट रही तो क्या जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की कोई जरूरत है? बेटा पैदा होने की चाह में ज्यादा बच्चे होने की बात होती है उसका क्या? शहर और गांव में अलग-अलग क्या स्थिति है? आइये जानते हैं…

क्या आने वाले दिनों में देश की आबादी कम होने वाली है?

पूर्व स्वस्थ्य सचिव ए आर नंदा कहते हैं कि सभी राज्यों में प्रजनन दर घट रही है। लेकिन, हमारी जनसंख्या का आकार काफी बड़ा है। जैसे चलती गाड़ी पर ब्रेक लगाने से वो तुरंत नहीं रुकती, उसे रुकने में थोड़ा वक्त लगता है। वैसे ही जनसंख्या का मोमेंटम तुरंत नहीं रुकेगा। आने वाले 20-30 साल तक हमारी आबादी बढ़ेगी। अभी ये करीब  140 करोड़ है। अगले 20-30 साल में जब ये 160 या 170 करोड़ हो जाएगी। उस वक्त हमारा ग्रोथ रेट शून्य हो जाएगा। उसके बाद ये माइनस में आएगा। यानी उसकी बाद जनसंख्या में कमी आनी शुरू होगी। 

राज्यवार कुल प्रजनन दर (TFR)

 

राज्य

TFR

बिहार

2.98

मेघालय

2.91

उत्तर प्रदेश

2.35

झारखंड

2.26

मणिपुर

2.17

राजस्थान

2.01

मध्य प्रदेश

1.99

हरियाणा

1.91

असम

1.87

मिजोरम

1.87

गुजरात

1.86

उत्तराखंड

1.85

दादरा-नागर हवेली और दमन-दीव

1.84

छत्तीसगढ़

1.82

ओडिशा

1.82

अरुणाचल प्रदेश

1.80

केरल

1.79

तमिलनाडु

1.76

तेलंगाना

1.75

नगालैंड

1.72

महाराष्ट्र

1.71

त्रिपुरा

1.70

आंध्र प्रदेश

1.68

कर्नाटक

1.67

हिमाचल प्रदेश

1.66

पश्चिम बंगाल

1.64

पंजाब

1.63

दिल्ली

1.62

पुडुचेरी

1.49

लक्षद्वीप

1.42

जम्मू-कश्मीर

1.41

चंडीगढ़

1.40

लद्दाख

1.31

गोवा

1.30

अंडमान निकोबार

1.28

सिक्किम

1.05

 

मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ने की बात की जाती है उसका क्या? 

बीते तीन दशक में NFHS के पांच सर्वे आए  हैं। 1992-93 में आए पहले सर्वे से अब आए पांचवें सर्वे के दौरान मुस्लिमों में प्रजनन दर में सबसे ज्यादा कमी आई है। 1992-93 में मुस्लिम महिलाओं में TFR 4.41 था। जो नए सर्वे में घटकर 2.36 रह गया है। हालांकि, अभी ये ये सभी धर्मों में सबसे ज्यादा है। वहीं, हिन्दू महिलाओं में इसी दौरान TFR 3.30 से घटकर 1.94 हो चुका है। 

पिछली बार के मुकाबले सिख और जैन समुदाय की प्रजनन दर में इजाफा हुआ है। 2015-16 में सिख समुदाय में प्रजनन दर 1.58 थी जो अब बढ़कर 1.60 हो गई है। वहीं, जैन समुदाय में प्रजजन दर 1.20 से बढ़कर 1.60 हो गई है। 

ए आर नंदा कहते हैं मेरा हमेशा से मानना है कि जनसंख्या धर्म के आधार पर नहीं बढ़ती घटती है। ज्यादातर प्रजनन दर कम पढ़ी-लिखी और अनपढ़ आबादी में होती है। गरीब और अति गरीब हिन्दू आबादियों में प्रजजन दर और गरीब मुस्लिम आबादी में प्रजनन दर करीब-करीब एक ही रहती रही है। ऐसा हमेशा से दिखाई देता रहा है।

जब प्रजजन दर घट रही तो क्या जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की कोई जरूरत है? 

एआर नंदा कहते हैं कि देश के ज्यादतर राज्यों में टोटल फर्टिलिटी रेट यानी TFR 2.1 या उससे कम हो चुका है। जो यूएन के मुताबिक किसी भी आबादी के रिप्लेसमेंट पॉपुलेशन का स्टैंडर्ड है। यानी हमारे देश की जनसंख्या वृद्धि की दर सही दिशा में जा रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, जैसे कुछ ही राज्य हैं, जहां TFR 2.1 से ज्यादा है। लेकिन, इन राज्यों में भी TFR तेजी से कम हो रहा है। आने वाले तीन से चार साल में यहां भी TFR 2.1 तक पहुंच जाएगा। 

एआर नंदा कहते हैं कि एक या दो बच्चों के लिए कानून बनाने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसा करने से कन्या भ्रूण हत्या जैसे मामले बढ़ेंगे। नंदा कहते हैं कि चीन जहां सबसे पहले जनसंख्या नियंत्रण जैसा कानून लागू हुआ उसे इसका बहुत नुकसान हुआ। खासतौर कन्या भ्रूण हत्या में बहुत इजाफा हुआ। इस कानून से हो रहे नुकसान की वजह से चीन को पहले एक से दो अब दो से तीन बच्चों की छूट देनी पड़ी। 

वहीं, भारत में ओडिशा जैसा राज्य जहां इस तरह का कानून सबसे करीब 28 साल से लागू है। वहां, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को इससे नुकसान हुआ है। ये लोग राज्य की पंचायत राज व्यवस्था की चुनाव प्रक्रिया से भी दूर हो गए। वहीं जिन राज्यों में ये पॉलिसी लागू की गई है, वहां इसके असर को लेकर कभी कोई रिपोर्ट नहीं जारी की गई।  

2006 में पूर्व IAS ऑफिसर निर्मला बुच ने इस पॉलिसी को लागू करने वाले पांच राज्यों पर स्टडी की थी। इस स्टडी में बताया गया कि दो बच्चों का नियम आने के बाद इन राज्यो में सेक्स-सिलेक्टिव और अनसेफ अबॉर्शन बढ़े हैं। कुछ मामलों में पुरुषों ने लोकल बॉडी इलेक्शन लड़ने के लिए पत्नी को तलाक दे दिया। इसके साथ ही कुछ मामलों में अयोग्यता से बचने के लिए बच्चों को गोद दे दिया गया।  

बेटा पैदा होने की चाह में ज्यादा बच्चे होने की बात होती है उसका क्या?

बेटे की चाह में ज्यादा बच्चे पैदा करने के चलन में भी कमी आई है। ताजा सर्वे बताता है कि 65 फीसदी महिलाएं जिनके दो बेटियां है वो बेटे की चाह में तीसरा बच्चा नहीं करना चाहती हैं। 



 गांवों के मुकाबले शहरों में प्रजनन दर कैसी है?

गांवों के मुकाबले शहरों में प्रजनन दर काफी कम हो गई है। शहरों में ये घटकर 1.6 हो गई है। वहीं, गांवों में ये आंकड़ा 2.1 पर है। यानी, गांवों में भी प्रजनन दर प्रतिस्थापन के स्तर पर आ चुकी है।  कुल प्रजनन दर 2 हो गई है। जो पिछली बार के 2.2 से भी कम है। शहर हो या गांव हर सर्वे में TFR लगातार कम हो रही है। 1992-93 में हुए पहले  सर्वे NFHS-1 में गांवों में कुल प्रजनन दर 3.7 शहरों में ये 2.7 थी। 1992-93 में कुल TFR 3.4 था।  

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