अधिसूचना से खुलासा: गृह मंत्रालय के सात कार्यालयों के 80 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने हासिल की हिंदी में काम करने लायक जानकारी
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला किया है कि सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा है और इससे निश्चित रूप से हिंदी का महत्व बढ़ेगा।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले सात कार्यालयों के 80 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने राजभाषा हिंदी में कार्य करने की जानकारी हासिल कर ली है। मंत्रालय ने सोमवार को एक आधिकारिक अधिसूचना के जरिए इस बात का खुलासा किया। अधिसूचना में कहा गया है, राजभाषा (संघ के आधिकारिक उद्देश्यों के लिए उपयोग) नियम, 1976 (1987 में संशोधित) के नियम 10 के उप नियम (4) के अनुसरण में केंद्र सरकार एतद्द्वारा गृह मंत्रालय के तहत निम्नलिखित कार्यालयों को अधिसूचित करती है, जिसमें 80 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने हिंदी ज्ञान प्राप्त कर लिया है।
ये कार्यालय हैं: जनगणना संचालन निदेशालय, पश्चिम बंगाल; दिल्ली पुलिस मुख्यालय; डीआईजी का कार्यालय, संचालन रेंज, बोंगाईगांव, असम; कमांडेंट कार्यालय, 212 बटालियन, सीआरपीएफ, येट्टापक्का, आंध्र प्रदेश; कमांडेंट कार्यालय, 230 बटालियन, सीआरपीएफ, दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़; कमांडेंट कार्यालय, 233 बटालियन, सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर, बिजनौर, उत्तर प्रदेश; और कमांडेंट कार्यालय, 240 'महिला' बटालियन, सीआरपीएफ बेंगलुरु, कर्नाटक। 7 अप्रैल को यहां संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि हिंदी को अंग्रेजी के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए न कि स्थानीय भाषाओं के लिए।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला किया है कि सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा है और इससे निश्चित रूप से हिंदी का महत्व बढ़ेगा। उन्होंने पैनल के सदस्यों को बताया कि अब केंद्रीय मंत्रिमंडल के एजेंडे का 70 फीसदी हिस्सा हिंदी में तैयार किया गया है। शाह ने पैनल के सदस्यों से कहा कि अब समय आ गया है कि राजभाषा हिंदी को देश की एकता का अहम हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक अन्य स्थानीय भाषाओं के शब्दों को स्वीकार कर हिंदी को लचीला नहीं बनाया जाएगा, तब तक इसका प्रचार-प्रसार नहीं किया जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि जब अलग-अलग भाषा बोलने वाले राज्यों के नागरिक एक-दूसरे से संवाद करते हैं, तो यह भारत की भाषा में होना चाहिए।