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महाराष्ट्र : कोरोना के बहाने बिकने को तैयार है ओशो के प्रेम का मंदिर बाशो

Sat, 13 Mar 2021 04:19 AM IST
Jeet Kumar सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई।
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 13 Mar 2021 04:19 AM IST
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osho temple basho is ready to sell in maharashtra
ओशो आश्रम पुणे - फोटो : twitter

महाराष्ट्र के पुणे स्थित कोरेगांव पार्क में बना आचार्य रजनीश ओशो के प्रेम का मंदिर बाशो बिकने के लिए तैयार है। इसके लिए 107 करोड़ रुपये की बोली भी लग चुकी है। लेकिन, ओशो से जुड़े लाखों भक्त इससे बहुत आहत हैं। ओशो आश्रम से लंबे समय तक जुड़े रहे स्वामी चैतन्य कीर्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के नाम खुला पत्र लिखकर इसे बचाने की भावनात्मक अपील की है।

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आचार्य रजनीश ओशो का संदेश है कि जहां आनंद है वहां प्रेम है और जहां प्रेम है वहां परमात्मा है। इसलिए उन्होंने बड़ी शिद्दत से कोरेगांव में अलग-अलग प्लाट लेकर 28 एकड़ क्षेत्रफल में प्रेम का मंदिर बनवाया था।
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इसमें से प्लाट संख्या 15 और 16 को बेचने की पूरी तैयारी हो चुकी है। जिसका रकबा करीब 9,836 वर्गमीटर है। अब बस इंतजार है तो चैरिटी कमिश्नर के फैसले का। आगामी 15 मार्च को ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन (ओआईएफ) की याचिका पर चैरिटी आयुक्त के यहां सुनवाई होनी है।
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ओआईएफ ने चैरिटी आयुक्त को दिए आवेदन क्रमांक 2-20-21 में कहा है कि कोरोना संकट के दौरान अप्रैल 2020 से लेकर सितंबर 2020 तक 3 करोड़ 65 लाख रुपए खर्च हुआ। ट्रस्ट को और पैसे की जरूरत है, इसलिए यह प्लाट बेचना है। आश्रम का प्लाट बिकने की जानकारी मिलने पर ओशो के शिष्य योगेश ठक्कर-स्वामी प्रेमगीत और किशोर रावल-स्वामी आनंद ने ओआईएफ के आवेदन को चुनौती देते हुए हस्तक्षेप याचिका दायर की है।

वहीं, ओआईएफ की ट्रस्टी मां अमृत साधाना का कहना है कि यह हमारी अपनी जगह है और अपनी समझ के अनुसार इसे बेचने का फैसला किया है। कोरोना संकट के कारण आश्रम का मेंटिनेंस और उसके अंदर रहने वाले 15 लोगों का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। ओशो आश्रम एक साल से बंद है।

इंटरनेशनल मेडिटेशन रिसार्ट जिसे बाशो कहा जाता है वहां प्रत्येक प्लाट करीब डेढ़ एकड़ का है। जहां स्वीमिंग पूल, मेडिटेशन सेंटर आदि बनाए गए हैं। इसमें से मात्र 3 एकड़ जमीन बेची जा रही है। उन्होंने बताया कि बाशो बजाज परिवार की जमीन से सटा हुआ है। इसलिए उन्होंने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। 

पंचशील रियाल्टी के चेयरमैन अतुल चोरडिया ने 90 करोड़, ए टू जेड ऑनलाईन सर्विसेस प्रा.लि. ने 85.5 करोड़ और राजीव बजाज ने 107 करोड़ की बोली लगाई थी। निविदा प्रक्रिया के बाद ओआईएफ ने बजाज से 50 करोड़ रुपए एडवांस भी लिया है।

ओशो की विरासत को खत्म करने का षडयंत्र
ओशो फ्रेंड्स फाउंडेशन के स्वामी प्रेमगीत कहते हैं कि ओआईएफ ने चोरी-छुपे बाशो की जमीम बेचने की तैयारी की थी लेकिन अचानक हमें इसकी भनक लग गई। एक मराठी और अंग्रेजी अखबार में निकले टेंडर नोटिस में ट्रस्ट और ट्रस्टियों का नाम भी नहीं लिखा था।

उनका आरोप है कि ओआईएफ के ट्रस्टी एक विदेशी के हाथ की कठपुतली बनकर नाच रहे हैं। स्विटजरलैंड और अमेरिका में बैठकर वह जैसा चाहें वैसे ट्रस्टियों को नचा रहा हैं। यह ओशो की विरासत को खत्म करने का षडयंत्र है। जब कोरोना संकट के दौरान पूरा देश लॉकडाऊन था, लोग अपने घर में बंद थे तो पौने चार करोड़ रुपए कहां खर्च हुए। आश्रम के खर्च के बारे में कभी ओशो सन्यासियों को नहीं बताया गया। ओशो के सन्यासियों में इतनी क्षमता है कि यदि आश्रम को जरूरत है तो वे पैसे देने के लिए तैयार हैं।

इसके अलावा ओशो की बौद्धिक संपदा से बहुत बड़ी आय होती है तो देश से बाहर जा चुका है। आठ साल पहले तक सिर्फ ओशो की बौद्धिक संपदा से ही 25 से 30 करोड़ की आय होती थी। यदि उसी पैसे का इस्तेमाल हो तो ओआईएफ ओशो आश्रम की जमीन बेचने की बजाय और जमीन खरीद सकता है।
 

प्रधानमंत्री से आश्रम को बचाने की गुहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में स्वामी चैतन्य कीर्ति ने कहा है कि अति सुन्दर ओशो आश्रम विश्व भर के लोगों को हमेशा आकर्षित करता रहा है और उन सबके तन, मन, धन सहयोग से निर्मित हुआ है। यहाँ 1974 से आज तक ध्यान प्रेम और ज्ञान की गंगा बही है, ओशो के हजारों प्रवचन हुए हैं।

अष्टावक्त्रस्, कृष्ण, शिव, बुद्ध, महावीर, पतंजलि, नारद और शांडिल्य, गोरख, कबीर, मीरा, नानक, बुल्ले शाह, जीसस, पूर्व-पश्चिम के सभी मनीषी ओशो की रहस्य-दर्शन वाणी से पुन: जीवंत हुए हैं। ऐसे अप्रतिम मूल्यवान स्थान को आज सरंक्षण की आवश्यकता है और उसके लिए आपके तथा देश के लोगों के सहयोग की जरूरत है। आपके साथ पूरा देश है और देश ही नहीं, पूरी दुनिया है। आपका यह सहयोग पूरे विश्व में चर्चित होगा और सराहा जायेगा।

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